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Tulsi Vivah Mangalashtak – तुलसी विवाह मंगलाष्टक | Tulsi Vivah 2026

Tulsi Vivah Mangalashtak (8 Auspicious Verses for Tulsi Wedding)

Tulsi Vivah Mangalashtak – तुलसी विवाह मंगलाष्टक | Tulsi Vivah 2026
॥ अथ मंगलाष्टक मंत्र ॥ _इन पवित्र 8 श्लोकों का पाठ विवाह संस्कार के समय वर-वधू के कल्याण के लिए किया जाता है।_ ॥ श्लोक १ - देवताओं का आह्वान ॥ ओम श्री मत्पंकजविष्टरो हरिहरौ, वायुमर्हेन्द्रोऽनलः । चन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण, प्रताधिपादिग्रहाः ॥ प्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः, चिन्तामणिः कौस्तुभः । स्वामी शक्तिधरश्च लांगलधरः, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ १ ॥ ॥ श्लोक २ - पवित्र नदियां और गोविन्द ॥ गंगा गोमतिगोपतिगर्णपतिः, गोविन्दगोवधर्नौ । गीता गोमयगोरजौ गिरिसुता, गंगाधरो गौतमः ॥ गायत्री गरुडो गदाधरगया, गम्भीरगोदावरी । गन्धवर्ग्रहगोपगोकुलधराः, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ २ ॥ ॥ श्लोक ३ - त्रिगुण और त्रयी शक्ति ॥ नेत्राणां त्रितयं महत्पशुपतेः अग्नेस्तु पादत्रयं । तत्तद्विष्णुपदत्रयं त्रिभुवने, ख्यातं च रामत्रयम् ॥ गंगावाहपथत्रयं सुविमलं, वेदत्रयं ब्राह्मणम् । संध्यानां त्रितयं द्विजैरभिमतं, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ ३ ॥ ॥ श्लोक ४ - महान ऋषियों का आशीर्वाद ॥ बाल्मीकिः सनकः सनन्दनमुनिः, व्यासोवसिष्ठो भृगुः । जाबालिजर्मदग्निरत्रिजनकौ, गर्गोऽ गिरा गौतमः ॥ मान्धाता भरतो नृपश्च सगरो, धन्यो दिलीपो नलः । पुण्यो धमर्सुतो ययातिनहुषौ, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ ४ ॥ ॥ श्लोक ५ - देवी शक्ति और सती ॥ गौरी श्रीकुलदेवता च सुभगा, कद्रूसुपणार्शिवाः । सावित्री च सरस्वती च सुरभिः, सत्यव्रतारुन्धती ॥ स्वाहा जाम्बवती च रुक्मभगिनी, दुःस्वप्नविध्वंसिनी । वेला चाम्बुनिधेः समीनमकरा, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ ५ ॥ ॥ श्लोक ६ - पुण्य सलिला नदियां ॥ गंगा सिन्धु सरस्वती च यमुना, गोदावरी नमर्दा । कावेरी सरयू महेन्द्रतनया, चमर्ण्वती वेदिका ॥ शिप्रा वेत्रवती महासुरनदी, ख्याता च या गण्डकी । पूर्णाः पुण्यजलैः समुद्रसहिताः, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ ६ ॥ ॥ श्लोक ७ - समुद्र मंथन के रत्न ॥ लक्ष्मीः कौस्तुभपारिजातकसुरा, धन्वन्तरिश्चन्द्रमा । गावः कामदुघाः सुरेश्वरगजो, रम्भादिदेवांगनाः ॥ अश्वः सप्तमुखः सुधा हरिधनुः, शंखो विषं चाम्बुधे । रतनानीति चतुदर्श प्रतिदिनं, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ ७ ॥ ॥ श्लोक ८ - सृष्टि के अधिपति ॥ ब्रह्मा वेदपतिः शिवः पशुपतिः, सूयोर् ग्रहाणां पतिः । शुक्रो देवपतिनर्लो नरपतिः, स्कन्दश्च सेनापतिः ॥ विष्णुयर्ज्ञपतियर्मः पितृपतिः, तारापतिश्चन्द्रमा । इत्येते पतयस्सुपणर्सहिताः, कुर्वन्तु वो मंगलम् ॥ ८ ॥ ॥ इति श्री मंगलाष्टकम् सम्पूर्णम् ॥

तुलसी विवाह मंगलाष्टक: अर्थ और महत्व

तुलसी विवाह मंगलाष्टक (Tulsi Vivah Mangalashtak) एक अत्यंत पवित्र प्रार्थना है जिसका पाठ कार्तिक शुक्ल द्वादशी (तुलसी विवाह) के दिन और सामान्य हिंदू विवाह समारोहों में किया जाता है। 'मंगल' का अर्थ है 'शुभ' और 'अष्टक' का अर्थ है 'आठ'। ये 8 श्लोक समस्त ब्रह्मांड की दैवीय शक्तियों, नदियों, पर्वतों और ऋषियों का आह्वान करते हैं ताकि वे उपस्थित वर-वधू (शालिग्राम और तुलसी) को सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दें।

जब भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप में) और तुलसी माता का विवाह संपन्न होता है, तो मंगलाष्टक का पाठ वातावरण को देवत्व से भर देता है। यह पाठ न केवल विवाह को, बल्कि यजमान के पूरे घर और परिवार को पवित्र करता है।

मंगलाष्टक के 8 श्लोकों का भावार्थ

१. देवताओं का आशीर्वाद (Devatas)

प्रथम श्लोक में भगवान विष्णु, शिव (हरि-हर), कमल पर विराजमान ब्रह्मा, वायु देव, देवराज इन्द्र, अग्नि देव, चन्द्रमा, सूर्य, कुबेर (वित्तपाल), वरुण देव और सभी शक्तिशाली ग्रह सम्मिलित हैं। प्रार्थना है कि ये सभी देवता आपका कल्याण (मंगल) करें।

२. पवित्र नदियां व शक्ति (Holy Rivers & Deities)

गंगा, गोमती, भगवान गणेश (गोपति/गणपति), गोविन्द, गोवर्धन पर्वत, पवित्र गीता, गोमय (गाय का गोबर), गोरज (गोधूलि वेला), पार्वती (गिरिसुता), शिव (गंगाधर) और महर्षि गौतम - ये सभी पवित्र शक्तियां आपके जीवन में मंगल करें।

३. त्रयी शक्ति (Power of Three)

भगवान शिव के तीन नेत्र, भगवान विष्णु (वामन) के तीन पग, तीनों लोक (त्रिभुवन), तीनों राम (परशुराम, राम, बलराम), गंगा की तीन धाराएं (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल), तीनों वेद और तीनों संध्याएं (प्रात: , मध्याह्न, सायं) - ये त्रयी शक्तियां आपका मंगल करें।

४. सप्तर्षि और महान राजा (Sages & Kings)

आदि कवि वाल्मीकि, सनक-सनन्दन आदि मुनि, व्यास, वसिष्ठ, भृगु, जमदग्नि, अत्रि, जनक, गर्ग और गौतम ऋषि। साथ ही महान राजा मान्धाता, भरत, सगर, दिलीप, नल, युधिष्ठिर (धर्मसुत), ययाति और नहुष - ये सभी महान आत्माएं आपका कल्याण करें।

५. देवियां और पतिव्रता नारी (Goddesses)

माता गौरी, कुलदेवी, सती सावित्री, विद्या की देवी सरस्वती, कामधेनु (सुरभि), सत्यवती अरुन्धती, स्वाहा, जाम्बवती, रुक्मणी, और समुद्र की रक्षा करने वाली शक्तियां - ये सभी देवियां आपके लिए मंगलकारी हों।

६. पुण्य नदियां (Sacred Rivers)

गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, सरयू, महेंद्रतनया (महानदी), चर्मणवती (चंबल), शिप्रा, वेत्रवती, महासुरनदी और गण्डकी - ये सभी पवित्र जल से भरी नदियां, समुद्र सहित, सतत आपका मंगल करती रहें।

७. चौदह रत्न (14 Gems)

समुद्र मंथन से निकले 14 रत्न - लक्ष्मी जी, कौस्तुभ मणि, पारिजात वृक्ष, सुरा (वारुणी), धन्वन्तरि वैद्य, चन्द्रमा, कामधेनु, ऐरावत हाथी, रम्भा अप्सरा, उच्चैःश्रवा घोड़ा, अमृत, शार्ंग धनुष, पांचजन्य शंख और विष - ये अद्भुत रत्न प्रतिदिन आपके जीवन में मंगल लायें।

८. अधिपति देव (Lords of Creation)

वेदों के पति ब्रह्मा, पशुओं के पति शिव, ग्रहों के पति सूर्य, देवों के पति इन्द्र (शुक्र/बृहस्पति संदर्भ), मनुष्यों के पति राजा (नल), सेना के पति कार्तिकेय (स्कन्द), यज्ञपति विष्णु, पितरों के पति यमराज और नक्षत्रों के पति चन्द्रमा - ये सभी अधिपति गरुड़ सहित आपका मंगल करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. तुलसी विवाह में मंगलाष्टक का पाठ कब किया जाता है?

तुलसी विवाह के समय, जब भगवान शालिग्राम और तुलसी माता के बीच 'अन्तरपाट' (पर्दा) पकड़ा जाता है और अक्षत छोड़े जाते हैं, ठीक उसी समय मंगलाष्टक का पाठ किया जाता है। प्रत्येक श्लोक के अंत में 'सावधान' बोला जा सकता है या 'कुर्वन्तु वो मंगलम्' पर अक्षत छोड़े जाते हैं।

2. क्या इस मंगलाष्टक का प्रयोग सामान्य विवाह में भी होता है?

हाँ, यह वही मंगलाष्टक है जो हिंदू वैवाहिक संस्कारों (Lagna) में वर और वधू के फेरों या वरमाला से पूर्व बोला जाता है। यह सार्वभौमिक रूप से सभी शुभ कार्यों के लिए मान्य है।

3. 'कुर्वन्तु वो मंगलम्' का क्या अर्थ है?

इसका शाब्दिक अर्थ है - "वे (देवता/शक्तियां) आपका मंगल करें" (May they do auspiciousness for you)। यह एक सामूहिक आशीर्वाद है।

4. मंगलाष्टक में कितने श्लोक होते हैं?

जैसा नाम से स्पष्ट है 'अष्टक' यानी 8 श्लोक। लेकिन कभी-कभी पाठ परंपरा में कुछ अतिरिक्त श्लोक भी जोड़े जाते हैं, पर मुख्य रूप से 8 श्लोक ही प्रमाणिक माने जाते हैं।

5. क्या इसे घर पर नित्य पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, यदि घर में कोई मांगलिक कार्य हो, पूजा हो या आप सुख-शांति चाहते हों, तो इसका नित्य पाठ किया जा सकता है। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर पवित्रता लाता है।

6. श्लोक 7 में '14 रत्नों' का उल्लेख क्यों है?

समुद्र मंथन से 14 रत्न प्राप्त हुए थे जो समृद्धि और शक्ति के प्रतीक हैं। विवाह में कामना की जाती है कि वर-वधू का जीवन भी इन रत्नों की तरह मूल्यवान और समृद्ध बने, इसलिए उनका आह्वान किया जाता है।

7. तुलसी विवाह का क्या महत्व है?

तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के दिन या उसके बाद किया जाता है। माना जाता है कि जो भक्त तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु से कराते हैं, उन्हें कन्यादान का पुण्य मिलता है और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।

8. क्या स्त्रियों भी यह पाठ कर सकती हैं?

अवश्य। भक्त प्रह्लाद, ध्रुव और गोपियों ने भी भगवान की स्तुति की है। कोई भी व्यक्ति, स्त्री या पुरुष, श्रद्धापूर्वक मंगलाष्टक का पाठ कर सकता है।