Sri Shiva Pratipadana Stotram – श्री शिव प्रतिपादन स्तोत्रम्

देवा ऊचुः ।
नमस्ते देवदेवेश नमस्ते करुणालय ।
नमस्ते सर्वजन्तूनां भुक्तिमुक्तिफलप्रद ॥ १ ॥
नमस्ते सर्वलोकानां सृष्टिस्थित्यन्तकारण ।
नमस्ते भवभीतानां भवभीतिविमर्दन ॥ २ ॥
नमस्ते वेदवेदान्तैरर्चनीय द्विजोत्तमैः ।
नमस्ते शूलहस्ताय नमस्ते वह्निपाणये ॥ ३ ॥
नमस्ते विश्वनाथाय नमस्ते विश्वयोनये ।
नमस्ते नीलकण्ठाय नमस्ते कृत्तिवाससे ॥ ४ ॥
नमस्ते सोमरूपाय नमस्ते सूर्यरूपिणे ।
नमस्ते वह्निरूपाय नमस्ते जलरूपिणे ॥ ५ ॥
नमस्ते भूमिरूपाय नमस्ते वायुमूर्तये ।
नमस्ते व्योमरूपाय नमस्ते ह्यात्मरूपिणे ॥ ६ ॥
नमस्ते सत्यरूपय नमस्तेऽसत्यरूपिणे ।
नमस्ते बोधरूपाय नमस्तेऽबोधरूपिणे ॥ ७ ॥
नमस्ते सुखरूपय नमस्तेऽसुखरूपिणे ।
नमस्ते पूर्णरूपाय नमस्तेऽपूर्णरूपिणे ॥ ८ ॥
नमस्ते ब्रह्मरूपाय नमस्तेऽब्रह्मरूपिणे ।
नमस्ते जीवरूपाय नमस्तेऽजीवरूपिणे ॥ ९ ॥
नमस्ते व्यक्तरूपाय नमस्तेऽव्यक्तरूपिणे ।
नमस्ते शब्दरूपाय नमस्तेऽशब्दरूपिणे ॥ १० ॥
नमस्ते स्पर्शरूपाय नमस्तेऽस्पर्शरूपिणे ।
नमस्ते रूपरूपाय नमस्तेऽरूपरूपिणे ॥ ११ ॥
नमस्ते रसरूपाय नमस्तेऽरसरूपिणे ।
नमस्ते गन्धरूपाय नमस्तेऽगन्धरूपिणे ॥ १२ ॥
नमस्ते देहरूपाय नमस्तेऽदेहरूपिणे ।
नमस्ते प्राणरूपाय नमस्तेऽप्राणरूपिणे ॥ १३ ॥
नमस्ते श्रोत्ररूपाय नमस्तेऽश्रोत्ररूपिणे ।
नमस्ते त्वक्स्वरूपाय नमस्तेऽत्वक्स्वरूपिणे ॥ १४ ॥
नमस्ते दृष्टिरूपाय नमस्तेऽदृष्टिरूपिणे ।
नमस्ते रसनारूप नमस्तेऽरसनात्मने ॥ १५ ॥
नमस्ते घ्राणरूपाय नमस्तेऽघ्राणरूपिणे ।
नमस्ते पादरूपाय नमस्तेऽपादरूपिणे ॥ १६ ॥
नमस्ते पाणिरूपाय नमस्तेऽपाणिरूपिणे ।
नमस्ते वाक्स्वरूपाय नमस्तेऽवाक्स्वरूपिणे ॥ १७ ॥
नमस्ते लिङ्गरूपाय नमस्तेऽलिङ्गरूपिणे ।
नमस्ते पायुरूपाय नमस्तेऽपायुरूपिणे ॥ १८ ॥
नमस्ते चित्तरूपाय नमस्तेऽचित्तरूपिणे ।
नमस्ते मातृरूपाय नमस्तेऽमातृरूपिणे ॥ १९ ॥
नमस्ते मानरूपाय नमस्तेऽमानरूपिणे ।
नमस्ते मेयरूपाय नमस्तेऽमेयरूपिणे ॥ २० ॥
नमस्ते मितिरूपाय नमस्तेऽमितिरूपिणे ।
नमस्ते सर्वरूपाय नमस्तेऽसर्वरूपिणे ॥ २१ ॥
रक्ष रक्ष महादेव क्षमस्व करुणालय ।
भक्तचित्तसमासीन ब्रह्मविष्णुशिवात्मक ॥ २२ ॥
इति श्रीस्कान्दपुराणे सूतसंहितायां शिवमाहात्म्यखण्डे तृतीयोऽध्याये नन्दीश्वरविष्णुसंवादे ईश्वरप्रतिपादन स्तोत्रम् ।
इतर पश्यतु ।
श्री शिव प्रतिपादन स्तोत्रम् - परिचय
श्री शिव प्रतिपादन स्तोत्रम् भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री शिव प्रतिपादन स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. श्री शिव प्रतिपादन स्तोत्रम् के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।