Sri Shiva Pancharatna Stuti (Krishna Kritam) – श्री शिव पञ्चरत्न स्तुतिः (कृष्ण कृतम्)

श्रीकृष्ण उवाच ।
मत्तसिन्धुरमस्तकोपरि नृत्यमानपदाम्बुजं
भक्तचिन्तितसिद्धिदानविचक्षणं कमलेक्षणम् ।
भुक्तिमुक्तिफलप्रदं भवपद्मजाच्युतपूजितं
कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम् ॥ १ ॥
वित्तदप्रियमर्चितं कृतकृच्छ्रतीव्रतपश्चरैः
मुक्तिकामिभिराश्रितैर्मुनिभिर्दृढामलभक्तिभिः ।
मुक्तिदं निजपादपङ्कजसक्तमानसयोगिनां
कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम् ॥ २ ॥
कृत्तदक्षमखाधिपं वरवीरभद्रगणेन वै
यक्षराक्षसमर्त्यकिन्नरदेवपन्नगवन्दितम् ।
रक्तभुग्गणनाथहृद्भ्रमराञ्चिताङ्घ्रिसरोरुहं
कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम् ॥ ३ ॥
नक्तनाथकलाधरं नगजापयोधरनीरजा-
-लिप्तचन्दनपङ्ककुङ्कुमपङ्किलामलविग्रहम् ।
शक्तिमन्तमशेषसृष्टिविधायकं सकलप्रभुं
कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम् ॥ ४ ॥
रक्तनीरजतुल्यपादपयोजसन्मणिनूपुरं
पत्तनत्रयदेहपाटनपङ्कजाक्षशिलीमुखम् ।
वित्तशैलशरासनं पृथुशिञ्जिनीकृततक्षकं
कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम् ॥ ५ ॥
यः पठेच्च दिने दिने स्तवपञ्चरत्नमुमापतेः
प्रातरेव मया कृतं निखिलाघतूलमहानलम् ।
तस्य पुत्रकलत्रमित्रधनानि सन्तु कृपाबलात्
ते महेश्वर शङ्कराखिल विश्वनायक शाश्वत ॥ ६ ॥
इति श्रीशिवमहापुराणे श्रीकृष्णकृत श्रीशिवपञ्चरत्नस्तुतिः ।
इतर पश्यतु ।
श्री शिव पञ्चरत्न स्तुतिः (कृष्ण कृतम्) - परिचय
श्री शिव पञ्चरत्न स्तुतिः (कृष्ण कृतम्) भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री शिव पञ्चरत्न स्तुतिः (कृष्ण कृतम्) का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. श्री शिव पञ्चरत्न स्तुतिः (कृष्ण कृतम्) के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।