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Sri Padmavati Navaratna Malika Stuti – श्री पद्मावती नवरत्नमालिका स्तुतिः

Sri Padmavati Navaratna Malika Stuti – श्री पद्मावती नवरत्नमालिका स्तुतिः
॥ श्री पद्मावती नवरत्नमालिका स्तुतिः ॥ श्रीमान् यस्याः प्रियस्सन् सकलमपि जगज्जङ्गमस्थावराद्यं स्वर्भूपातालभेदं विविधविधमहाशिल्पसामर्थ्यसिद्धम् । रञ्जन् ब्रह्मामरेन्द्रैस्त्रिभुवनजनकः स्तूयते भूरिशो यः सा विष्णोरेकपत्नी त्रिभुवनजननी पातु पद्मावती नः ॥ १ ॥ श्रीशृङ्गारैकदेवीं विधिमुखसुमनःकोटिकोटीरजाग्र- -द्रत्नज्योत्स्नाप्रसारप्रकटितचरणाम्भोजनीराजितार्चाम् । गीर्वाणस्त्रैणवाणीपरिफणितमहाकीर्तिसौभाग्यभाग्यां हेलानिर्दग्धदैन्यश्रमविषममहारण्यगण्यां नमामि ॥ २ ॥ विद्युत्कोटिप्रकाशां विविधमणिगणोन्निद्रसुस्निग्धशोभा- सम्पत्सम्पूर्णहाराद्यभिनवविभवालङ्क्रियोल्लासिकण्ठाम् । आद्यां विद्योतमानस्मितरुचिरचितानल्पचन्द्रप्रकाशां पद्मां पद्मायताक्षीं पदनलिननमत्पद्मसद्मां नमामि ॥ ३ ॥ शश्वत्तस्याः श्रयेऽहं चरणसरसिजं शार्ङ्गपाणेः पुरन्ध्र्याः स्तोकं यस्याः प्रसादः प्रसरति मनुजे क्रूरदारिद्र्यदग्धे । सोऽयं सद्योऽनवद्यस्थिरतररुचिरश्रेष्ठभूयिष्ठनव्य- -स्तव्यप्रासादपङ्क्तिप्रसितबहुविधप्राभवो बोभवीति ॥ ४ ॥ सौन्दर्योद्वेलहेमाम्बुजमहितमहासिंहपीठाश्रयाढ्यां पुष्यन्नीलारविन्दप्रतिमवरकृपापूरसम्पूर्णनेत्राम् । ज्योत्स्नापीयूषधारावहनवसुषमक्षौमधामोज्ज्वलाङ्गीं वन्दे सिद्धेशचेतस्सरसिजनिलयां चक्रिसौभाग्यऋद्धिम् ॥ ५ ॥ संसारक्लेशहन्त्रीं स्मितरुचिरमुखीं सारशृङ्गारशोभां सर्वैश्वर्यप्रदात्रीं सरसिजनयनां संस्तुतां साधुबृन्दैः । संसिद्धस्निग्धभावां सुरहितचरितां सिन्धुराजात्मभूतां सेवे सम्भावनीयानुपमितमहिमां सच्चिदानन्दरूपाम् ॥ ६ ॥ सिद्धस्वर्णोपमानद्युतिलसिततनुं स्निग्धसम्पूर्णचन्द्र- -व्रीडासम्पादिवक्त्रां तिलसुमविजयोद्योगनिर्निद्रनासाम् । तादात्वोत्फुल्लनीलाम्बुजहसनचणात्मीयचक्षुः प्रकाशां बालश्रीलप्रवालप्रियसखचरणद्वन्द्वरम्यां भजेऽहम् ॥ ७ ॥ यां देवीं मौनिवर्याः श्रयदमरवधूमौलिमाल्यार्चिन्ताङ्घ्रिं संसारासारवारान्निधितरतरणे सर्वदा भावयन्ते । श्रीकारोत्तुङ्गरत्नप्रचुरितकनकस्निग्धशुद्धान्तलीलां तां शश्वत्पादपद्मश्रयदखिलहृदाह्लादिनीं ह्लादयेऽहम् ॥ ८ ॥ आकाशाधीशपुत्रीं श्रितजननिवहाधीनचेतःप्रवृत्तिं वन्दे श्रीवेङ्कटेशप्रभुवरमहिषीं दीनचित्तप्रतोषाम् । पुष्यत्पादारविन्दप्रसृमरसुमहश्शामितस्वाश्रितान्त- -स्तामिस्रां तत्त्वरूपां शुकपुरनिलयां सर्वसौभाग्यदात्रीम् ॥ ९ ॥ श्रीशेषशर्माभिनवोपक्लुप्ता प्रियेण भक्त्या च समर्पितेयम् । पद्मावतीमङ्गलकण्ठभूषा विराजतां श्रीनवरत्नमाला ॥ १० ॥ ॥ इति श्री पद्मावती नवरत्नमालिका स्तुतिः ॥

श्री पद्मावती नवरत्नमालिका स्तुतिः: परिचय एवं पौराणिक पृष्ठभूमि (Introduction)

श्री पद्मावती नवरत्नमालिका स्तुतिः (Sri Padmavati Navaratna Malika Stuti) माँ पद्मावती को समर्पित एक अत्यंत मधुर और प्रभावशाली स्तुति है। माँ पद्मावती, जिन्हें 'अलमेलु मंगा' (Alamelu Manga) के नाम से भी जाना जाता है, तिरुपति के अधिपति भगवान वेंकटेश्वर (श्रीनिवास) की दिव्य अर्धांगिनी हैं। यह स्तोत्र ९ रत्नों (श्लोकों) की एक ऐसी माला है, जो न केवल देवी के दिव्य सौंदर्य का वर्णन करती है, बल्कि साधक के जीवन से घोर दरिद्रता और दुखों का विनाश करने की शक्ति रखती है।

पौराणिक कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ पद्मावती का जन्म आकाश राजा (Akasa Raja) के घर एक दिव्य सरोवर में खिले हुए कमल के पुष्प से हुआ था (इसीलिए उन्हें 'पद्मावती' कहा जाता है)। वे साक्षात् महालक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं। तिरुचानूर (शुकपुर) में उनका भव्य मंदिर स्थित है, जहाँ भगवान वेंकटेश्वर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक भक्त माँ पद्मावती के दर्शन न कर लें। स्तोत्र के ९वें श्लोक में उन्हें "आकाशाधीशपुत्रीं" और "शुकपुरनिलयां" कहकर संबोधित किया गया है, जो उनके प्राकट्य स्थान और निवास की पुष्टि करता है।

साहित्यिक रचना: इस दिव्य स्तोत्र की रचना प्रसिद्ध विद्वान श्री शेष शर्मा (Sri Sesha Sharma) ने की है, जैसा कि स्तोत्र के अंतिम श्लोक (मंगलाचरण) में स्पष्ट है। उन्होंने इस स्तुति को 'नवरत्नमाला' कहा है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक श्लोक एक बहुमूल्य रत्न के समान है जो भक्त के हृदय रूपी कण्ठ का आभूषण बनता है। यह रचना न केवल भक्ति रस से सराबोर है, बल्कि इसमें संस्कृत साहित्य का उच्च स्तरीय शिल्प भी देखने को मिलता है।

आध्यात्मिक दर्शन: माँ पद्मावती "दया" और "करुणा" का मूर्त रूप हैं। जहाँ भगवान वेंकटेश्वर न्याय के प्रतीक हैं, वहीं माँ पद्मावती मध्यस्थता करने वाली (Purushakara) शक्ति हैं। वे भक्त की पुकार को भगवान तक पहुँचाती हैं और अपनी मंद मुस्कान (स्मितरुचिरमुखी) से ही संसार के क्लेशों का हनन कर देती हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक को वैकुण्ठ की उस दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है जो जीवन को धन, धान्य और शांति से भर देती है।

विशिष्ट महत्व: नवरत्नों की शक्ति (Significance)

इस स्तुति को 'नवरत्न' कहने के पीछे गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। जिस प्रकार नौ रत्न (माणिक्य, मुक्ता आदि) व्यक्ति के भाग्य और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं, उसी प्रकार इस स्तोत्र के नौ श्लोक जीवन के नौ प्रमुख क्षेत्रों — धन, स्वास्थ्य, शांति, विजय, ज्ञान, भक्ति, संतान, सुख और मोक्ष को संतुलित करते हैं।

श्लोक ४ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ कवि कहते हैं कि जिसका थोड़ा सा भी प्रसाद (कृपा) "क्रूरदारिद्र्यदग्धे" (भयंकर दरिद्रता से जले हुए) मनुष्य पर पड़ जाए, वह क्षण भर में महलों और वैभव का स्वामी बन जाता है। यह स्तोत्र 'दैन्य' (हीनता) के उस विषम महारण्य (जंगल) को जलाने के लिए 'हेलानिर्दग्ध' (अग्नि) के समान है। यह श्रीनिवास और पद्मावती के अटूट संबंध का गान है, जो भक्त को 'चक्रिसौभाग्य' (भगवान विष्णु का सौभाग्य) प्रदान करता है।

फलश्रुति: पाठ के लाभ (Benefits from Phala Shruti)

माँ पद्मावती की इस नवरत्नमालिका स्तुति के नियमित पाठ से साधक को निम्नलिखित दिव्य लाभ प्राप्त होते हैं:

  • दरिद्रता का नाश: "हेलानिर्दग्धदैन्यश्रम" — यह पाठ जीवन की आर्थिक तंगी और गरीबी को जड़ से मिटा देता है।

  • स्थिर वैभव: माँ पद्मावती की कृपा से प्राप्त धन स्थिर और कल्याणकारी होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

  • सौभाग्य की वृद्धि: "सर्वसौभाग्यदात्रीम्" — विवाह में विलम्ब, गृह कलह और अशांति दूर होकर अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है।

  • मानसिक शांति: "संसारक्लेशहन्त्रीं" — यह स्तोत्र मानसिक तनाव, भय और चिंता को समाप्त कर हृदय को आह्लादित करता है।

  • सर्व ऐश्वर्य प्राप्ति: "सर्वैश्वर्यप्रदात्रीं" — जो साधक श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करता है, उसे समाज में मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।

  • आध्यात्मिक उन्नति: यह पाठ भक्त को भगवान वेंकटेश्वर (श्रीनिवास) की अनन्य भक्ति और सामीप्य प्रदान करता है।

पाठ विधि एवं विशेष अवसर (Ritual Method & Special Occasions)

माँ पद्मावती की आराधना के लिए शुक्रवार का दिन और 'पद्म' (कमल) का पुष्प विशेष महत्व रखता है।

साधना के नियम:

  • शुभ समय: ब्रह्म मुहूर्त या संध्या वेला (शुक्रवार को विशेष रूप से) पाठ के लिए सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान के पश्चात पीले या लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आसन: ऊनी या रेशमी आसन पर बैठकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
  • पूजा विधि: माँ पद्मावती और भगवान वेंकटेश्वर के चित्र के सम्मुख घी का दीपक जलाएं। संभव हो तो उन्हें 'कमल' का पुष्प या लाल गुलाब अर्पित करें।
  • नैवेद्य: देवी को दूध से बनी मिठाई या मिश्री-मक्खन का भोग लगाएं।

विशेष अवसर: कार्तिक मास (पद्मावती ब्रह्मोत्सवम), शुक्रवार, एकादशी और शरद पूर्णिमा के दिन इस नवरत्नमालिका का पाठ करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है। शनिवार के दिन भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के पूर्व तिरुचानूर में इस स्तोत्र का पाठ करना साक्षात् कृपा दिलाने वाला माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. माँ पद्मावती और अलमेलु मंगा एक ही हैं?

जी हाँ, तेलुगु में उन्हें 'अलमेलु मंगा' (Alamelu Manga) कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'पुष्प पर रहने वाली देवी'। संस्कृत में उन्हें 'पद्मावती' कहा जाता है।

2. इस स्तोत्र की रचना किसने की है?

इस स्तोत्र की रचना परम विद्वान श्री शेष शर्मा (Sri Sesha Sharma) ने माँ पद्मावती की अनन्य भक्ति में की थी।

3. क्या कर्ज मुक्ति के लिए यह पाठ किया जा सकता है?

हाँ, श्लोक ४ में स्पष्ट वर्णन है कि माँ की कृपा से 'क्रूर दरिद्रता' का नाश होता है। यह आर्थिक संकटों और कर्ज से मुक्ति के लिए अत्यंत प्रभावी है।

4. तिरुचानूर मंदिर का इस स्तोत्र से क्या संबंध है?

तिरुचानूर (शुकपुर) माँ पद्मावती का मूल निवास स्थान है। स्तोत्र में उन्हें 'शुकपुरनिलयां' कहा गया है। तिरुमला जाने से पहले यहाँ दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है।

5. 'नवरत्न' शब्द का यहाँ क्या तात्पर्य है?

यहाँ 'नवरत्न' का अर्थ माँ की स्तुति में लिखे गए ९ दिव्य श्लोक हैं, जो आध्यात्मिक रत्नों के समान अमूल्य हैं।

6. क्या स्त्रियाँ यह पाठ कर सकती हैं?

निश्चित रूप से। अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए स्त्रियाँ विशेष रूप से इस स्तोत्र का पाठ करती हैं।

7. माँ पद्मावती को कौन सा पुष्प प्रिय है?

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, उन्हें कमल (Lotus) का पुष्प अत्यंत प्रिय है। पाठ के दौरान कमल अर्पण करने से माँ शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

8. 'आकाशाधीशपुत्रीं' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है 'आकाश राजा की पुत्री'। आकाश राजा चंद्रवंशी राजा थे जिन्होंने माँ पद्मावती को सरोवर में पाया और अपनी पुत्री के रूप में पाला था।

9. क्या इस पाठ से वैवाहिक समस्याओं का समाधान होता है?

जी हाँ, माँ पद्मावती और भगवान वेंकटेश्वर का मिलन दिव्य प्रेम का प्रतीक है। इस स्तुति के पाठ से दाम्पत्य जीवन में मधुरता आती है।

10. पाठ करते समय किस मंत्र का उच्चारण शुभ है?

स्तुति के पूर्व या पश्चात 'ॐ नमो वेंकटेशाय' या 'ॐ श्री पद्मावत्यै नमः' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।