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Sri Kamakshi Stotram 2 – श्री कामाक्षी स्तोत्रम् २

Sri Kamakshi Stotram 2 – श्री कामाक्षी स्तोत्रम् २
काञ्चीनूपुररत्नकङ्कण लसत्केयूरहारोज्ज्वलां काश्मीरारुणकञ्चुकाञ्चितकुचां कस्तूरिकाचर्चिताम् । कल्हाराञ्चितकल्पकोज्ज्वलमुखीं कारुण्यकल्लोलिनीं कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ १ ॥ कामारातिमनःप्रियां कमलभूसेव्यां रमाराधितां कन्दर्पाधिकदर्पदानविलसत्सौन्दर्यदीपाङ्कुराम् । कीरालापविनोदिनीं भगवतीं काम्यप्रदानव्रतां कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ २ ॥ गन्धर्वामरसिद्धचारणवधूद्गेयापदानाञ्चितां गौरीं कुङ्कुमपङ्कपङ्कित कुचद्वन्द्वाभिरामां शुभाम् । गम्भीरस्मितविभ्रमाङ्कितमुखीं गङ्गाधरालिङ्गितां कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ ३ ॥ विष्णुब्रह्ममुखामरेन्द्रपरिषत्कोटीरपीठस्थलां लाक्षारञ्जितपादपद्मयुगलां राकेन्दुबिम्बाननाम् । वेदान्तागमवेद्यचिन्त्यचरितां विद्वज्जनैरादृतां कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ ४ ॥ माकन्दद्रुममूलदेशमहिते माणिक्यसिंहासने दिव्यां दीपितहेमकान्तिनिवहावस्त्रावृतां तां शुभाम् । दिव्याकल्पितदिव्यदेहभरितां दृष्टिप्रमोदावहां कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ ५ ॥ आधारादिसमस्तचक्रनिलयामाद्यन्तशून्यामुमा- -माकाशादिसमस्तभूतनिवहाकारामशेषात्मिकाम् । योगीन्द्रैरति योगिनीशतगणैराराधितामम्बिकां कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ ६ ॥ ह्रीं‍कारप्रणवात्मिकां प्रणमतां श्रीविद्यविद्यामयीं ऐं श्रीं सौं रुचिमन्त्रमूर्ति निवहाकारामशेषात्मिकाम् । ब्रह्मानन्दरसानुभूतमहितां ब्रह्मप्रियंवादिनीं कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ ७ ॥ सिद्धानन्दजनस्य चिन्मयसुखाकारां महायोगिभिः मायाविश्वविमोहिनीं मधुमतीं ध्यायेच्छुभां ब्राह्मणीम् । ध्येयां किन्नरसिद्धचारणवधूद्गेयां सदा योगिभिः कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां काञ्चीपुरीदेवताम् ॥ ८ ॥ कामारिकामां कमलासनस्थां काम्यप्रदां कङ्कणचूडहस्ताम् । काञ्चीनिवासां कनकप्रभासां कामाक्षिदेवीं कलयामि चित्ते ॥ ९ ॥ इति श्री कामाक्षी स्तोत्रम् ।

श्री कामाक्षी स्तोत्रम् २ - परिचय

श्री कामाक्षी स्तोत्रम् २ माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी को समर्पित है। माँ ललिता "श्रीविद्या" की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी उपासना से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • ऐश्वर्य प्राप्ति: माँ ललिता की कृपा से सुख, समृद्धि और राजयोग मिलता है।
  • सौंदर्य और आरोग्य: साधक को शारीरिक कांति और निरोगी काया प्राप्त होती है।
  • शत्रु नाश: समस्त बाधाओं और शत्रुओं का शमन होता है।
  • ब्रह्मज्ञान: अंततः साधक को आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: प्रातःकाल या रात्रि (विशेषकर शुक्रवार और पूर्णिमा) को पाठ करना श्रेयस्कर है।
  • आसन: लाल आसन पर बैठकर, पूर्वाभिमुख होकर पाठ करें।
  • शुद्धि: स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • नैवेद्य: देवी को खीर, मिश्री या फलों का भोग लगाएं।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री कामाक्षी स्तोत्रम् २ का पाठ किस तिथि को करना चाहिए?

शुक्रवार (Friday), पूर्णिमा और नवरात्रि के दिनों में इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

2. क्या बिना दीक्षा के श्रीविद्या उपासना की जा सकती है?

सामान्य स्तोत्र पाठ (जैसे ललिता सहस्रनाम) भक्ति भाव से कोई भी कर सकता है, परन्तु बीज मंत्रों का जप गुरु दीक्षा के बाद ही करना चाहिए।