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Sri Kamakshi stotram 1 – श्री कामाक्षी स्तोत्रम् १

Sri Kamakshi stotram 1 – श्री कामाक्षी स्तोत्रम् १
_(**पुस्तक**: यह स्तोत्र “****” पुस्तकमें मुद्रित है । .)_ कल्पानोकहपुष्पजालविलसन्नीलालकां मातृकां कान्तां कञ्जदलेक्षणां कलिमलप्रध्वंसिनीं कालिकाम् । काञ्चीनूपुरहारदामसुभगां काञ्चीपुरीनायिकां कामाक्षीं करिकुम्भसन्निभकुचां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ १ ॥ काशाभां शुकभासुरां प्रविलसत्कोशातकी सन्निभां चन्द्रार्कानललोचनां सुरुचिरालङ्कारभूषोज्ज्वलाम् । ब्रह्मश्रीपतिवासवादिमुनिभिः संसेविताङ्घ्रिद्वयां कामाक्षीं गजराजमन्दगमनां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ २ ॥ ऐं क्लीं सौरिति यां वदन्ति मुनयस्तत्त्वार्थरूपां परां वाचामादिमकारणं हृदि सदा ध्यायन्ति यां योगिनः । बालां फालविलोचनां नवजपावर्णां सुषुम्नाश्रितां कामाक्षीं कलितावतंससुभगां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ ३ ॥ यत्पादाम्बुजरेणुलेशमनिशं लब्ध्वा विधत्ते विधि- -र्विश्वं तत्परिपाति विष्णुरखिलं यस्याः प्रसादाच्चिरम् । रुद्रः संहरति क्षणात्तदखिलं यन्मायया मोहितः कामाक्षीमतिचित्रचारुचरितां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ ४ ॥ सूक्ष्मात्सूक्ष्मतरां सुलक्षिततनुं क्षान्ताक्षरैर्लक्षितां वीक्षाशिक्षितराक्षसां त्रिभुवनक्षेमङ्करीमक्षयाम् । साक्षाल्लक्षणलक्षिताक्षरमयीं दाक्षायणीं साक्षिणीं कामाक्षीं शुभलक्षणैः सुललितां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ ५ ॥ ओङ्काराङ्गणदीपिकामुपनिषत्प्रासादपारावतीं आम्नायाम्बुधिचन्द्रिकामघतमःप्रध्वंसहंसप्रभाम् । काञ्चीपट्‍टणपञ्जरान्तरशुकीं कारुण्यकल्लोलिनीं कामाक्षीं शिवकामराजमहिषीं वन्दे महेशप्रियाम् ॥ ६ ॥ ह्रीङ्कारात्मकवर्णमात्रपठनादैन्द्रीं श्रियं तन्वतीं चिन्मात्रां भुवनेश्वरीमनुदिनं भिक्षाप्रदानक्षमाम् । विश्वाघौघनिवारिणीं विमलिनीं विश्वम्भरां मातृकां कामाक्षीं परिपूर्णचन्द्रवदनां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ ७ ॥ वाग्देवीति च यां वदन्ति मुनयः क्षीराब्धिकन्येति च क्षोणीभृत्तनयेति च श्रुतिगिरो यां आमनन्ति स्फुटम् । एकानेकफलप्रदां बहुविधाऽऽकारास्तनूस्तन्वतीं कामाक्षीं सकलार्तिभञ्जनपरां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ ८ ॥ मायामादिमकारणं त्रिजगतामाराधिताङ्घ्रिद्वयां आनन्दामृतवारिराशिनिलयां विद्यां विपश्चिद्धियाम् । मायामानुषरूपिणीं मणिलसन्मध्यां महामातृकां कामाक्षीं करिराजमन्दगमनां वन्दे महेशप्रियाम् ॥ ९ ॥ कान्ता कामदुघा करीन्द्रगमना कामारिवामाङ्कगा कल्याणी कलितावतारसुभगा कस्तूरिकाचर्चिता कम्पातीररसालमूलनिलया कारुण्यकल्लोलिनी कल्याणानि करोतु मे भगवती काञ्चीपुरीदेवता ॥ १० ॥ इति श्री कामाक्षी स्तोत्रम् ।

श्री कामाक्षी स्तोत्रम् १ - परिचय

श्री कामाक्षी स्तोत्रम् १ माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी को समर्पित है। माँ ललिता "श्रीविद्या" की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी उपासना से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • ऐश्वर्य प्राप्ति: माँ ललिता की कृपा से सुख, समृद्धि और राजयोग मिलता है।
  • सौंदर्य और आरोग्य: साधक को शारीरिक कांति और निरोगी काया प्राप्त होती है।
  • शत्रु नाश: समस्त बाधाओं और शत्रुओं का शमन होता है।
  • ब्रह्मज्ञान: अंततः साधक को आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: प्रातःकाल या रात्रि (विशेषकर शुक्रवार और पूर्णिमा) को पाठ करना श्रेयस्कर है।
  • आसन: लाल आसन पर बैठकर, पूर्वाभिमुख होकर पाठ करें।
  • शुद्धि: स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • नैवेद्य: देवी को खीर, मिश्री या फलों का भोग लगाएं।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री कामाक्षी स्तोत्रम् १ का पाठ किस तिथि को करना चाहिए?

शुक्रवार (Friday), पूर्णिमा और नवरात्रि के दिनों में इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

2. क्या बिना दीक्षा के श्रीविद्या उपासना की जा सकती है?

सामान्य स्तोत्र पाठ (जैसे ललिता सहस्रनाम) भक्ति भाव से कोई भी कर सकता है, परन्तु बीज मंत्रों का जप गुरु दीक्षा के बाद ही करना चाहिए।