Sri Hatakeshwara Stuti – श्री हाटकेश्वर स्तुतिः

ओं नमोऽस्तु शर्व शम्भो त्रिनेत्र चारुगात्र त्रैलोक्यनाथ उमापते दक्षयज्ञविध्वंसकारक कामाङ्गनाशन घोरपापप्रणाशन महापुरुष महोग्रमूर्ते सर्वसत्त्वक्षयङ्कर शुभङ्कर महेश्वर त्रिशूलधर स्मरारे गुहाधामन् दिग्वासः महाचन्द्रशेखर जटाधर कपालमालाविभूषितशरीर वामचक्षुःक्षुभितदेव प्रजाध्यक्षभगाक्ष्णोः क्षयङ्कर भीमसेना नाथ पशुपते कामाङ्गदाहिन् चत्वरवासिन् शिव महादेव ईशान शङ्कर भीम भव वृषध्वज कलभप्रौढमहानाट्येश्वर भूतिरत आविमुक्तक रुद्र रुद्रेश्वर स्थाणो एकलिङ्ग कालिन्दीप्रिय श्रीकण्ठ नीलकण्ठ अपराजित रिपुभयङ्कर सन्तोषपते वामदेव अघोर तत्पुरुष महाघोर अघोरमूर्ते शान्त सरस्वतीकान्त सहस्रमूर्ते महोद्भव विभो कालाग्ने रुद्र रौद्र हर महीधरप्रिय सर्वतीर्थाधिवास हंसकामेश्वरकेदार अधिपते परिपूर्ण मुचुकुन्द मधुनिवास कृपाणपाणे भयङ्कर विद्याराज सोमराज कामराज महीधरराजकन्याहृदब्जवसते समुद्रशायिन् गयामुखगोकर्ण ब्रह्मयाने सहस्रवक्त्राक्षिचरण हाटकेश्वर नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमः ॥
इति श्रीवामनपुराणे हाटकेश्वर स्तुतिः ।
इतर पश्यतु ।
श्री हाटकेश्वर स्तुतिः - परिचय
श्री हाटकेश्वर स्तुतिः भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री हाटकेश्वर स्तुतिः का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. श्री हाटकेश्वर स्तुतिः के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।