Logoपवित्र ग्रंथ

Sri Chandramouleshwara Stava – श्री चन्द्रमौलीश्वर स्तवः

Sri Chandramouleshwara Stava – श्री चन्द्रमौलीश्वर स्तवः
यस्मिन् जगत्सर्वमिदं विभाति यश्चाप्यनन्यः सकलप्रपञ्चात् । तिलेषु तैलोपममास्थितं त्वां श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ १ ॥ पश्यन्ति यन्न श्रुतयः शिरस्थं शिरःस्थितं वस्त्विव सर्वलोकाः । त्वामात्मभूतं जगतां त्रयाणां श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ २ ॥ अणोरणीयान् महतो महीया- -नात्मा गुहायां निहितोऽस्य जन्तोः । त्वं सर्वभूतस्थितमात्मरूपं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ३ ॥ यः सर्वसाक्षी तमसः परस्ता- -द्विभाति सर्वं किल यस्य भासा । त्वामागमान्तैरपि दुर्निरूपं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ४ ॥ पुमानविज्ञाय शिवं कदाचि- -द्दुःखस्य नान्तं समुपैति धीरः । त्वां सच्चिदानन्दमयं प्रशान्तं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ५ ॥ अजं पुराणं पुरुषं महान्तं अनश्वरं वाङ्मनसाऽति दूरम् । ज्ञानात्मनां हृद्यवभासमानं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ६ ॥ वदन्त्यमी यत्पदमेव वेदा ज्ञाते तु यास्मिन् सकलं विबुद्धम् । त्वां प्रत्यगात्मनमचिन्त्यशक्तिं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ७ ॥ यं निर्विकल्पेन समाधिनैव तपस्विनश्चेतसि वीतरागाः । ध्यायन्ति तेजोमयमद्भुतं त्वां श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ८ ॥ त्रिलोचनं चन्द्रकलावतंसं गङ्गातरङ्गोल्लसदुत्तमाङ्गम् । स्मेरास्यमिष्टप्रदमष्टमूर्तिं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ९ ॥ अपारसच्चित्सुखराशिमेक- -मनादिमध्यान्तमनन्तरूपम् । त्रिलोचनं नीलगलं प्रशान्तं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ १० ॥ कैलासशैलेन्द्रशिरस्तटेषु नगेन्द्रपुत्र्या सह संवसन्तम् । विभूति रुद्राक्षविभूषिताङ्गं श्रीचन्द्रमौलीश्वरमाश्रयामः ॥ ११ ॥ इति शिवरहस्यान्तर्गते गणैः कृत श्री चन्द्रमौलीश्वर स्तुतिः ॥

श्री चन्द्रमौलीश्वर स्तवः - परिचय

श्री चन्द्रमौलीश्वर स्तवः भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
  • विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
  • समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
  • भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री चन्द्रमौलीश्वर स्तवः का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।

2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?

हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।

3. श्री चन्द्रमौलीश्वर स्तवः के पाठ से क्या फल मिलता है?

इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।