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श्री बृहस्पति पञ्चविंशतिनाम स्तोत्रम् (Sri Brihaspati Panchavimshati Nama Stotram)

Sri Brihaspati Panchavimshati Nama Stotram

श्री बृहस्पति पञ्चविंशतिनाम स्तोत्रम् (Sri Brihaspati Panchavimshati Nama Stotram)
चराचरगुरुं नौमि गुरुं सर्वोपकारकम् । यस्य सङ्कीर्तनादेव क्षणादिष्टं प्रजायते ॥ १ ॥ बृहस्पतिः सुराचार्यो नीतिज्ञो नीतिकारकः । गुरुर्जीवोऽथ वागीशो वेदवेत्ता विदांवरः ॥ २ ॥ सौम्यमूर्तिः सुधादृष्टिः पीतवासाः पितामहः । अग्रवेदी दीर्घश्मश्रुर्हेमाङ्गः कुङ्कुमच्छविः ॥ ३ ॥ सर्वज्ञः सर्वदः सर्वः सर्वपूज्यो ग्रहेश्वरः । सत्यधामाऽक्षमाली च ग्रहपीडानिवारकः ॥ ४ ॥ फलश्रुति पञ्चविंशतिनामानि गुरुं स्मृत्वा तु यः पठेत् । आयुरारोग्यसम्पन्नो धनधान्यसमन्वितः ॥ ५ ॥ जीवेद्वर्षशतं साग्रं सर्वव्याधिविवर्जितः । कर्मणा मनसा वाचा यत्पापं समुपार्जितम् ॥ ६ ॥ तदेतत्पठनादेव दह्यतेऽग्निरिवेन्धनम् । गुरोर्दिनेऽर्चयेद्यस्तु पीतवस्त्रानुलेपनैः ॥ ७ ॥ धूपदीपोपहारैश्च विप्रभोजनपूर्वकम् । पीडाशान्तिर्भवेत्तस्य स्वयमाह बृहस्पतिः ॥ ८ ॥ मेरुमूर्ध्नि समाक्रान्तो देवराजपुरोहितः । ज्ञाता यः सर्वशास्त्राणां स गुरुः प्रीयतां मम ॥ ९ ॥ इति बृहस्पति स्तोत्रम् ।

महत्व (Significance)

श्री बृहस्पति पञ्चविंशतिनाम स्तोत्रम् एक अत्यंत विशेष स्तोत्र है जिसमें देवताॐ के गुरु, बृहस्पति देव के 25 शक्ति-शाली नामों का वर्णन है। यह स्तोत्र छोटा है लेकिन इसके प्रभाव बहुत गहरे हैं।

गुरु (Jupiter) ज्ञान, विवेक, शिक्षा, संतान और धन के कारक हैं। जब कोई भक्त इन 25 नामों का जाप करता है, तो वह बृहस्पति देव के सभी गुणों का आवाहन करता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो अपनी बुद्धि को कुशाग्र करना चाहते हैं या जीवन में सही मार्ग की तलाश में हैं।

लाभ (Benefits)

  • दीर्घायु और आरोग्य: फलश्रुति के अनुसार, इसका पाठ करने वाला व्यक्ति सौ वर्षों तक जीवित रहता है (जीवेद्वर्षशतं) और सभी रोगों से मुक्त रहता है।

  • पाप नाश: मन, वचन और कर्म से किए गए पाप इस स्तोत्र के पाठ से उसी तरह जल जाते हैं जैसे अग्नि में ईंधन (दह्यतेऽग्निरिवेन्धनम्)।

  • मनोवांछित फल: इसके संकीर्तन मात्र से पल भर में अभीष्ट (मनचाहा) फल प्राप्त होता है (क्षणादिष्टं प्रजायते)।

  • धन-धान्य और समृद्धि: यह स्तोत्र भक्त को धन और धान्य से संपन्न बनाता है।

पाठ विधि (Chanting Method)

श्रेष्ठ फल प्राप्ति के लिए:

  • गुरुवार (Thursday) के दिन प्रातः काल स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें।

  • बृहस्पति देव की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें।

  • पीले चन्दन, पीले फूल और धूप-दीप से पूजन करें (धूपदीपोपहारैश्च)।

  • इसके बाद भक्ति भाव से इन 25 नामों का पाठ करें। ब्राह्मणों को भोजन कराने से भी विशेष शांति मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. बृहस्पति पञ्चविंशतिनाम स्तोत्र का पाठ क्यों करें?

इस स्तोत्र में गुरु बृहस्पति के 25 प्रभावशाली नाम हैं। इनके स्मरण मात्र से ही मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और व्यक्ति को दीर्घायु, आरोग्य और संपत्ति प्राप्त होती है।

2. इस स्तोत्र के पाठ का क्या फल है?

फलश्रुति के अनुसार, जो व्यक्ति इसका पाठ करता है, वह सौ वर्षों तक जीवित रहता है (शतायु), सभी पापों से मुक्त हो जाता है और अग्नि में ईंधन की तरह उसके पाप नष्ट हो जाते हैं।

3. क्या इसे प्रतिदिन पढ़ सकते हैं?

हाँ, इसे प्रतिदिन पढ़ा जा सकता है। लेकिन गुरुवार के दिन इसका विशेष महत्त्व है।