Shri Mallikarjuna Mangalashasanam – श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् | Srisailam Jyotirlinga Stotra
Shri Mallikarjuna Mangalashasanam

श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् – परिचय और महत्त्व
श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् (Shri Mallikarjuna Mangalashasanam) द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश) में स्थित भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी की स्तुति है। 'मल्लिका' का अर्थ है माता पार्वती (भ्रमराम्बा) और 'अर्जुन' का अर्थ है भगवान शिव। यह विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ ज्योतिर्लिंग (शिव) और शक्तिपीठ (माता सती की ग्रीवा) एक साथ स्थित हैं।
इस मंगलाशासनम् (शुभ कामना प्रार्थना) में श्रीशैल पर्वत, पाताल गंगा (कृष्णा नदी) और भगवान मल्लिकार्जुन के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को कैलास वास का पुण्य मिलता है।
स्तोत्र पाठ के लाभ (Benefits)
मनोकामना पूर्ति: 'कामितार्थ प्रदायिने' (श्लोक 1) - यह स्तोत्र भक्तों की सभी उचित मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है।
दाम्पत्य सुख: चूँकि यहाँ शिव और शक्ति का मिलन है, इसलिए सुखी वैवाहिक जीवन और अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इसका पाठ अत्यंत फलदायी है।
पाप नाश और मुक्ति: श्रीशैलम के दर्शन मात्र से मुक्ति मिलती है। जो भक्त वहां नहीं जा सकते, वे इस स्तोत्र के नित्य पाठ से घर बैठे वही पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
मानसिक शांति: 'नित्यानंद विधायने' (श्लोक 3) - इसके पाठ से मन को असीम शांति और परमानंद की अनुभूति होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
सर्वोत्तम दिन: सोमवार (Monday), प्रदोष (Pradosh) या शिवरात्रि।
स्नान: प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (सफेद हो तो उत्तम) धारण करें।
आसन: उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुश या ऊनी आसन पर बैठें।
शिवलिंग अभिषेक: घर में शिवलिंग हो तो जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
भस्म: माथे पर भस्म या त्रिपुंड अवश्य लगाएं, क्योंकि यह भगवान शिव को अति प्रिय है।
आरती: पाठ के अंत में कर्पूर आरती करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)