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Shri Mallikarjuna Mangalashasanam – श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् | Srisailam Jyotirlinga Stotra

Shri Mallikarjuna Mangalashasanam

Shri Mallikarjuna Mangalashasanam – श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् | Srisailam Jyotirlinga Stotra
उमाकांताय कांताय कामितार्थ प्रदायिने श्रीगिरीशाय देवाय मल्लिनाथाय मंगलम् ॥1॥ सर्वमंगल रूपाय श्री नगेंद्र निवासिने गंगाधराय नाथाय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥2॥ सत्यानंद स्वरूपाय नित्यानंद विधायने स्तुत्याय श्रुतिगम्याय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥3॥ मुक्तिप्रदाय मुख्याय भक्तानुग्रहकारिणे सुंदरेशाय सौम्याय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥4॥ श्रीशैले शिखरेश्वरं गणपतिं श्री हटकेशं पुनस्सारंगेश्वर बिंदुतीर्थममलं घंटार्क सिद्धेश्वरम् । गंगां श्री भ्रमरांबिकां गिरिसुतामारामवीरेश्वरं शंखंचक्र वराहतीर्थमनिशं श्रीशैलनाथं भजे ॥5॥ हस्तेकुरंगं गिरिमध्यरंगं शृंगारितांगं गिरिजानुषंगम् मूर्देंदुगंगं मदनांग भंगं श्रीशैललिंगं शिरसा नमामि ॥6॥

श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् – परिचय और महत्त्व

श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् (Shri Mallikarjuna Mangalashasanam) द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश) में स्थित भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी की स्तुति है। 'मल्लिका' का अर्थ है माता पार्वती (भ्रमराम्बा) और 'अर्जुन' का अर्थ है भगवान शिव। यह विश्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ ज्योतिर्लिंग (शिव) और शक्तिपीठ (माता सती की ग्रीवा) एक साथ स्थित हैं।

इस मंगलाशासनम् (शुभ कामना प्रार्थना) में श्रीशैल पर्वत, पाताल गंगा (कृष्णा नदी) और भगवान मल्लिकार्जुन के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को कैलास वास का पुण्य मिलता है।

स्तोत्र पाठ के लाभ (Benefits)

  • मनोकामना पूर्ति: 'कामितार्थ प्रदायिने' (श्लोक 1) - यह स्तोत्र भक्तों की सभी उचित मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है।

  • दाम्पत्य सुख: चूँकि यहाँ शिव और शक्ति का मिलन है, इसलिए सुखी वैवाहिक जीवन और अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इसका पाठ अत्यंत फलदायी है।

  • पाप नाश और मुक्ति: श्रीशैलम के दर्शन मात्र से मुक्ति मिलती है। जो भक्त वहां नहीं जा सकते, वे इस स्तोत्र के नित्य पाठ से घर बैठे वही पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

  • मानसिक शांति: 'नित्यानंद विधायने' (श्लोक 3) - इसके पाठ से मन को असीम शांति और परमानंद की अनुभूति होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

सर्वोत्तम दिन: सोमवार (Monday), प्रदोष (Pradosh) या शिवरात्रि।

  • स्नान: प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (सफेद हो तो उत्तम) धारण करें।

  • आसन: उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुश या ऊनी आसन पर बैठें।

  • शिवलिंग अभिषेक: घर में शिवलिंग हो तो जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।

  • भस्म: माथे पर भस्म या त्रिपुंड अवश्य लगाएं, क्योंकि यह भगवान शिव को अति प्रिय है।

  • आरती: पाठ के अंत में कर्पूर आरती करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. 'मंगलाशासनम्' का क्या अर्थ है?

'मंगलाशासनम्' का अर्थ है - आराध्य देव की मंगल कामना करना या उनकी जय-जयकार करना। यह दक्षिण भारतीय भक्ति परंपरा का एक अभिन्न अंग है।

2. श्रीशैलम ज्योतिर्लिंग का क्या महत्व है?

इसे 'दक्षिण का कैलाश' कहा जाता है। यह उन 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है जिसका उल्लेख पुराणों में प्रमुखता से है। यहाँ भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच 'ज्ञान फल' को लेकर हुई स्पर्द्धा से जुड़ी कथा प्रसिद्ध है।

3. क्या महिलाएं इसका पाठ कर सकती हैं?

जी हाँ, शिव और शक्ति (भ्रमराम्बा देवी) की संयुक्त स्तुति होने के कारण महिलाएं इसका पाठ निसंकोच कर सकती हैं। यह सौभाग्य वर्धक है।

4. क्या शाम को पाठ किया जा सकता है?

हाँ, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) शिव पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

5. इस स्तोत्र में 'भ्रमरांबिका' कौन हैं?

वे माता पार्वती का ही स्वरूप हैं। कथा के अनुसार, माता ने भ्रमर (भौंरे) का रूप धारण कर अरुणासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए उनका नाम भ्रमराम्बा पड़ा।

6. क्या बिना गुरु दीक्षा के यह पाठ कर सकते हैं?

बिल्कुल, यह एक सरल भक्ति स्तोत्र है। इसके लिए किसी विशेष दीक्षा या कठिन नियमों की आवश्यकता नहीं है। केवल शुद्ध मन और भक्ति पर्याप्त है।

7. 'उमाकांताय' का क्या अर्थ है?

प्रथम श्लोक में 'उमाकांताय' का अर्थ है - 'उमा (पार्वती) के पति'। यह भगवान शिव को संबोधित है।

8. पाठ के लिए कौन सा फूल श्रेष्ठ है?

भगवान मल्लिकार्जुन को चमेली (Jasmine/Mallika) का फूल अत्यंत प्रिय है। 'मल्लिका' का अर्थ चमेली ही है। इसके अलावा बेलपत्र और धतूरा भी चढ़ा सकते हैं।