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Shri Kamalatmika Khadgamala Stotram – श्रीकमलात्मिका खड्गमालास्तोत्रम्

Shri Kamalatmika Khadgamala Stotram – श्रीकमलात्मिका खड्गमालास्तोत्रम्
॥ श्रीकमलात्मिका खड्गमालास्तोत्रम् ॥ ॥ विनियोगः ॥ अस्य श्रीकमलात्मिका खड्गमालास्तोत्रमहामन्त्रस्य भृगुदक्षब्रह्मऋषयः । नानाछन्दांसि । श्रीकमलात्मिका देवता । श्रीं बीजम् । ऐं शक्तिः । ह्रीं कीलकम् । अखण्ड ऐश्वर्यं आयुरारोग्यप्राप्त्यर्थे जपे विनियोगः ॥ ॥ ध्यानं ॥ कान्त्या काञ्चनसन्निभां हिमगिरिप्रख्यैश्चतुर्भिर्गजैः हस्तोत्क्षिप्तहिरण्मयामृतघटैरासिच्यमानां श्रियम् । बिभ्राणां वरमब्जयुग्ममभयं हस्तैः किरीटोज्ज्वलां क्षौमाबद्ध नितम्बबिम्बललितां वन्देऽरविन्दस्थिताम् ॥ ॥ खड्गमाला प्रारम्भः ॥ ॐ कमलात्मिकायै नमः । वासुदेवमयि, सङ्कर्षणमयि, प्रद्युम्नमयि, अनिरुद्धमयि, श्रीधरमयि, हृषीकेशमयि, वैकुण्ठमयि, विश्वरूपमयि, प्रथमावरणरूपिणि सर्वमाङ्गल्यप्रदचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ १॥ सलिलमयि, गुग्गुलमयि, कुरुण्टकमयि, शङ्खनिधिमयि, वसुधामयि, पद्मनिधिमयि, वसुमतिमयि, जह्नुसुतामयि, सूर्यसुतामयि, द्वितीयावरणरूपिणि सर्वधनप्रदचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ २॥ बलाकमयि, विमलामयी, कमलामयि, वनमालिकामयि, विभीषिकामयि, मालिकामयि, शाङ्करीमयि, वसुमालिकामयि तृतीयावरणरूपिणि सर्वशक्तिप्रदचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ३॥ भारतीमयि, पार्वतीमयि, चान्द्रीमयि, शचीमयि, दमकमयि, उमामयि, श्रीमयि, सरस्वतीमयि, दुर्गामयि, धरणीमयि, गायत्रिमयि, देवीमयि, उषामयि, चतुर्थावरणरूपिणि सर्वसिद्धिप्रदचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ४॥ अनुराग महालक्ष्मी बाणमयि, संवाद महालक्ष्मी बाणमयि, विजया महालक्ष्मी बाणमयि, वल्लभा महालक्ष्मी बाणमयि, मदा महालक्ष्मी बाणमयि, हर्षा महालक्ष्मी बाणमयि, बला महालक्ष्मी बाणमयि, तेजा महालक्ष्मी बाणमयि, पञ्चमावरणरूपिणि सर्वसंक्षोभणचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ५॥ ब्राह्मिमयि, महेश्वरीमयि, कौमारीमयि, वैष्णवीमयि, वाराहीमयि, इन्द्राणीमयि, चामुण्डामयि, महालक्ष्मीमयि, षष्टावरणरूपिणि सर्वसौभाग्यदायकचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ६॥ ऐरावतमयि, पुण्डरीकमयि, वामनमयि, कुमुदमयि, अञ्जनमयि, पुष्पदन्तमयि, सार्वभौममयि, सुप्रतीकमयि, सप्तमावरणरूपिणि सर्वाशापरिपूरकचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ७॥ सूर्यंयि, सोममयि, भौममयि, बुधमयि, बृहस्पतिमयि, शुक्रमयि, शनेश्चरमयि, राहुमयि, केतुमयि, अष्टमावरणरूपिणि सर्वरोगहरचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ८॥ लं पृथ्वीमयि, रं अग्निमयि, हं आकाशमयि, वं उदकमयि, यं वायुमयि नवमावरणरूपिणि सर्वानन्दमयिचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ९॥ निवृतिमयि, प्रतिष्ठामयि, विद्यामयि, शान्तिमयि, दशमावरणरूपिणि सर्वशापहरचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ १०॥ गायत्रीसहित ब्रह्ममयि, सावित्रीसहित विष्णुमयि, सरस्वतीसहित रुद्रमयि, लक्ष्मी समेत कुबेरमयि, रतिसहित काममयि, पुष्टिसहित विज्ञराजमयि, शङ्खनिधिसहित वसुधामयि, पद्मनिधिसहित वसुमतिमयि, गायात्र्यादिसहित कमलात्मिका, दिवौघुगुरुरूपिणि सिध्दौघगुरुरूपिणि मानवौघगुरुरूपिणि, श्रीगुरुरूपिणि, परमगुरुरूपिणि परमेष्ठिगुरुरूपिणि, परापरगुरुरूपिणि, अणिमासिद्धे, लघिमासिद्धे, महिमासिद्धे, ईशित्वसिद्धे, वशित्वसिद्धे, प्राकाम्यसिद्धे, भुक्तिसिद्धे, इच्छासिद्धे, प्राप्तिसिद्धे, सर्वकामसिद्धे, एकादशावरणरूपिणि सर्वार्थसाधकचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत श्रीकमलात्मिका ॥ ११॥ वराभयमयि, वटुकमयि, योगिनीमयि, क्षेत्रपालमयि, गणपतिमयि, अष्टवसुमयि, द्वादशादित्यमयि, एकादशरुद्रमयि, सर्वभूतमयि, शुति-स्मृती-धृति-श्रद्धा-मेधामयि, वज्रसहित इन्द्रमयि, शक्तिसहित अग्निमयि, दण्डसहित यममयि, खड्गसहित निरृतिमयि, पाशसहित वरुणमयि, अङ्कुशसहित वायुमयि, गदासहित सोममयि, शूलसहित ईशानमयि, पद्मसहित ब्रह्ममयि, चक्रसहित अनन्तमयि, द्वादशावरणरूपिणि त्र्यैलोक्यमोहनचक्रस्वामिनि अनन्तसमेत सदाशिवभैरवसेवित श्रीकमलात्मिका नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमः ॥ १२॥ ॥ इति श्रीकमलात्मिका खड्गमालास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

श्रीकमलात्मिका खड्गमाला: तांत्रिक परिचय एवं रहस्य (Introduction & Tantric Secrets)

श्रीकमलात्मिका खड्गमालास्तोत्रम् दश महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या, माँ कमला (तांत्रिक लक्ष्मी) की उपासना का सबसे शक्तिशाली और गोपनीय साधन है। 'खड्गमाला' (Khadgamala) का शाब्दिक अर्थ है 'तलवारों की माला'। जिस प्रकार तलवार युद्ध में शत्रुओं को काटती है और विजय दिलाती है, उसी प्रकार यह स्तोत्र दरिद्रता, दुर्भाग्य और बाधाओं को काटकर साधक को तत्काल ऐश्वर्य और सिद्धि प्रदान करता है।

यंत्र पूजा का शाब्दिक रूप: तांत्रिक साधना में देवी के निवास स्थान को 'यंत्र' या 'चक्र' कहा जाता है। कमला यंत्र में कुल 12 आवरण (Layers/Enclosures) होते हैं। यह खड्गमाला उन 12 आवरणों, उनके द्वारपालों, उनकी शक्तियों (योगिनियों) और अधिष्ठात्री देवियों की क्रमबद्ध पूजा है। जब साधक इसका पाठ करता है, तो वह मानसिक रूप से देवी के यंत्र के सबसे बाहरी घेरे से शुरू करके केंद्र (बिन्दु) तक की यात्रा करता है। यह एक पूर्ण 'आवरण पूजा' है जो बिना किसी सामग्री के केवल वाणी से संपन्न होती है।

ऋषि और विनियोग: इस महामंत्र के ऋषि भृगु, दक्ष और ब्रह्मा हैं। इसका बीज 'श्रीं' (लक्ष्मी बीज), शक्ति 'ऐं' (सरस्वती/वाग्बीज) और कीलक 'ह्रीं' (माया/भुवनेश्वरी बीज) है। इसका मुख्य उद्देश्य 'अखंड ऐश्वर्य' और 'आरोग्य' की प्राप्ति है।

बारह आवरणों का रहस्य और महत्व (Significance of the 12 Aavaranas)

इस खड्गमाला में देवी के साम्राज्य का विस्तृत वर्णन है। प्रत्येक आवरण एक विशेष प्रकार की सिद्धि और ऊर्जा का केंद्र है:

  • प्रथमावरण (सर्वमाङ्गल्यप्रद चक्र): इसमें वासुदेव, संकर्षण आदि विष्णु के व्यूह रूपों की पूजा है। यह साधक के जीवन में मंगल और शुभता लाता है।
  • द्वितीयावरण (सर्वधनप्रद चक्र): यहाँ शंखनिधि, पद्मनिधि, वसुधा और वसुमती जैसी शक्तियों का वास है। यह आवरण सीधे तौर पर धन, संपत्ति और खजाने (Treasure) से जुड़ा है।
  • षष्ठावरण (सर्वसौभाग्यदायक चक्र): इसमें ब्राह्मी, माहेश्वरी आदि अष्टमातृकाओं की पूजा है। यह साधक को अखंड सौभाग्य, विजय और सुरक्षा प्रदान करता है।
  • सप्तमावरण (सर्वाशापरिपूरक चक्र): इसमें ऐरावत, पुण्डरीक आदि आठ दिग्गजों (Elephants) की शक्तियां हैं। यह सभी दिशाओं से यश और कीर्ति दिलाता है और सभी आशाओं को पूर्ण करता है।
  • अष्टमावरण (सर्वरोगहर चक्र): यहाँ सूर्य, सोम, मंगल आदि नवग्रहों की पूजा है। यह साधक को ग्रहों के दुष्प्रभाव और शारीरिक रोगों से मुक्त करता है।
  • एकादशावरण (सर्वार्थसाधक चक्र): इसमें अणिमा, लघिमा आदि सिद्धियों और गुरु मंडल का पूजन है। यह साधक को अलौकिक सिद्धियां प्रदान करता है।
  • द्वादशावरण (त्र्यैलोक्यमोहन चक्र): यह यंत्र का केंद्र है जहाँ अस्त्र-शस्त्रों (वज्र, शक्ति, पाश, अंकुश) और दिक्पालों के साथ साक्षात् माँ कमलात्मिका सदाशिव और भैरव के साथ विराजमान हैं।

फलश्रुति: खड्गमाला पाठ के सिद्ध लाभ (Benefits of Recitation)

तंत्र शास्त्रों में खड्गमाला को 'कल्पवृक्ष' के समान माना गया है। इसके नियमित पाठ से साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • अखंड धन और राजयोग: चूँकि यह साक्षात् कमला (लक्ष्मी) के यंत्र की पूजा है, इसके पाठ से दरिद्रता का समूल नाश होता है और साधक को राजसी सुख, वाहन, भवन और अपार धन की प्राप्ति होती है।
  • ग्रह दोष निवारण: अष्टम आवरण में नवग्रहों की स्तुति होने के कारण, यह पाठ कुंडली के सभी दोषों (जैसे शनि की साढ़ेसाती, मंगल दोष) को शांत करता है।
  • शत्रु विजय और सुरक्षा: द्वादश आवरण में देवताओं के अस्त्रों (वज्र, शक्ति, खड्ग) की पूजा है। यह साधक के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा चक्र बनाता है जिसे कोई शत्रु भेद नहीं सकता।
  • सर्व-सिद्धि और वशीकरण: एकादश आवरण में अष्टसिद्धियों की पूजा से साधक में आकर्षण शक्ति (वशीकरण) और संकल्प सिद्धि की क्षमता आ जाती है।
  • रोग मुक्ति और आरोग्य: सर्वरोगहर चक्र (अष्टम आवरण) की ऊर्जा साधक को दीर्घायु और निरोगी काया प्रदान करती है।

पाठ विधि एवं अनुष्ठान के नियम (Ritual Method & Guidelines)

खड्गमाला का पाठ अत्यंत प्रभावशाली है, अतः इसे पूरी श्रद्धा और विधि के साथ करना चाहिए।

दैनिक पाठ विधि: प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। कमला यंत्र या माँ लक्ष्मी के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। सबसे पहले विनियोग और ध्यान मंत्र पढ़ें। उसके बाद "ॐ कमलात्मिकायै नमः" बोलकर खड्गमाला का पाठ शुरू करें। प्रत्येक नाम के बाद मन ही मन उस शक्ति को नमन करें।

कुमकुमार्चन (Kumkumarchana): यदि संभव हो, तो प्रत्येक नाम (जैसे 'वासुदेवमयि नमः', 'सलिलमयि नमः') के साथ यंत्र पर या देवी के चरणों में चुटकी भर कुमकुम अर्पित करें। यह प्रयोग धन प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है।

विशेष मुहूर्त: शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली, और नवरात्रि की अष्टमी/नवमी को इसका पाठ विशेष फलदायी होता है। धनतेरस की रात इसका पाठ करने से साल भर धन की कमी नहीं होती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. 'खड्गमाला' का क्या अर्थ है?
'खड्ग' का अर्थ है तलवार और 'माला' का अर्थ है समूह। यह देवी की शक्तियों और आयुधों की एक ऐसी माला है जो साधक के पापों और दुर्भाग्य को तलवार की तरह काट देती है। यह एक रक्षा कवच भी है।
2. कमला और कमलात्मिका में क्या अंतर है?
दोनों एक ही हैं। 'कमला' दश महाविद्या का नाम है और 'कमलात्मिका' उनका तांत्रिक संबोधन है, जिसका अर्थ है 'कमल स्वरूप वाली' या 'जिसकी आत्मा कमल की तरह विकसित है'।
3. क्या इस पाठ के लिए यंत्र होना जरूरी है?
यदि आपके पास प्राण-प्रतिष्ठित कमला यंत्र या श्रीयंत्र है, तो यह सर्वोत्तम है। लेकिन यदि यंत्र नहीं है, तो आप माँ लक्ष्मी या कमला के चित्र के सामने भी भावपूर्वक यह पाठ कर सकते हैं।
4. इस स्तोत्र में 'मयि' (जैसे वासुदेवमयि) शब्द बार-बार क्यों आता है?
'मयि' का अर्थ है 'स्वरूप वाली' या 'से युक्त'। वासुदेवमयि का अर्थ है 'वासुदेव (विष्णु) के स्वरूप वाली'। यह दर्शाता है कि खड्गमाला की सभी शक्तियां देवी कमला का ही विस्तार हैं।
5. क्या यह पाठ श्रीविद्या (ललिता) खड्गमाला से अलग है?
जी हाँ। श्रीविद्या खड्गमाला ललिता त्रिपुरसुन्दरी के 9 आवरणों (श्रीचक्र) की पूजा है। यह कमला खड्गमाला माँ कमला के 12 आवरणों की पूजा है। दोनों का उद्देश्य और देवता अलग हैं, हालाँकि दोनों मोक्ष प्रदायक हैं।
6. क्या स्त्रियाँ इसका पाठ कर सकती हैं?
बिल्कुल। माँ लक्ष्मी की उपासना का अधिकार सभी को है। स्त्रियाँ अपनी सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए कुमकुम से इसका अर्चन कर सकती हैं।
7. अष्टम आवरण में ग्रहों की पूजा क्यों है?
यह दर्शाता है कि माँ कमला ही ग्रहों की नियंता हैं। उनकी कृपा से क्रूर ग्रह (शनि, राहु, केतु) भी शांत हो जाते हैं और शुभ फल देने लगते हैं। यह 'सर्वरोगहर' चक्र भी है।
8. 'निधि' का क्या अर्थ है (श्लोक 2)?
'निधि' का अर्थ है खजाना। कुबेर के पास 9 निधियां (शंख, पद्म आदि) मानी जाती हैं। इस आवरण की पूजा से साधक को गुप्त धन और आकस्मिक लाभ (Windfall gain) की प्राप्ति हो सकती है।
9. क्या रात्रि में इसका पाठ करना चाहिए?
तंत्र साधना में रात्रि (निशीथ काल) का विशेष महत्व है। स्थिर लक्ष्मी के लिए दिवाली या पूर्णिमा की रात को इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
10. 'सदाशिवभैरवसेवित' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि माँ कमला की सेवा स्वयं सदाशिव और भैरव करते हैं। यह देवी की सर्वोच्च सत्ता को दर्शाता है, कि वे केवल विष्णु-पत्नी नहीं, बल्कि परब्रह्म शक्ति हैं।