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Sarva Devata Kruta Lalitha Stotram – श्री ललिता स्तोत्रम् (सर्व देवत कृतम्)

Sarva Devata Kruta Lalitha Stotram – श्री ललिता स्तोत्रम् (सर्व देवत कृतम्)
प्रादुर्बभूव परमं तेजः पुञ्जमनूपमम् । कोटिसूर्यप्रतीकाशं चन्द्रकोटिसुशीतलम् ॥ १ ॥ तन्मध्यमे समुदभूच्चक्राकारमनुत्तमम् । तन्मध्यमे महादेविमुदयार्कसमप्रभाम् ॥ २ ॥ जगदुज्जीवनाकारां ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकाम् । सौन्दर्यसारसीमान्तामानन्दरससागराम् ॥ ३ ॥ जपाकुसुमसङ्काशां दाडिमीकुसुमाम्बराम् । सर्वाभरणसम्युक्तां शृङ्गारैकरसालयाम् ॥ ४ ॥ कृपातारङ्गितापाङ्ग नयनालोक कौमुदीम् । पाशाङ्कुशेक्षुकोदण्ड पञ्चबाणलसत्कराम् ॥ ५ ॥ तां विलोक्य महादेवीं देवाः सर्वे स वासवाः । प्रणेमुर्मुदितात्मानो भूयो भूयोऽखिलात्मिकाम् ॥ ६ ॥ ॥ इति श्री ललिता स्तोत्रम् ॥

श्री ललिता स्तोत्रम् (सर्व देवत कृतम्) - परिचय

श्री ललिता स्तोत्रम् (सर्व देवत कृतम्) माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी को समर्पित है। माँ ललिता "श्रीविद्या" की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी उपासना से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • ऐश्वर्य प्राप्ति: माँ ललिता की कृपा से सुख, समृद्धि और राजयोग मिलता है।
  • सौंदर्य और आरोग्य: साधक को शारीरिक कांति और निरोगी काया प्राप्त होती है।
  • शत्रु नाश: समस्त बाधाओं और शत्रुओं का शमन होता है।
  • ब्रह्मज्ञान: अंततः साधक को आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: प्रातःकाल या रात्रि (विशेषकर शुक्रवार और पूर्णिमा) को पाठ करना श्रेयस्कर है।
  • आसन: लाल आसन पर बैठकर, पूर्वाभिमुख होकर पाठ करें।
  • शुद्धि: स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • नैवेद्य: देवी को खीर, मिश्री या फलों का भोग लगाएं।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री ललिता स्तोत्रम् (सर्व देवत कृतम्) का पाठ किस तिथि को करना चाहिए?

शुक्रवार (Friday), पूर्णिमा और नवरात्रि के दिनों में इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

2. क्या बिना दीक्षा के श्रीविद्या उपासना की जा सकती है?

सामान्य स्तोत्र पाठ (जैसे ललिता सहस्रनाम) भक्ति भाव से कोई भी कर सकता है, परन्तु बीज मंत्रों का जप गुरु दीक्षा के बाद ही करना चाहिए।