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सप्तमातृका स्तोत्रम्

Sapta Matrika Stotram — सात दिव्य मातृशक्तियों का स्तोत्र

सप्तमातृका स्तोत्रम्
॥ विनियोगः ॥ ॐ अस्य श्रीसप्तमातृका स्तोत्र महामन्त्रस्य, श्री सदाशिव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री सप्तमातृका देवताः, मम सर्वभीष्टसिद्धये जपे विनियोगः ॥ ॥ प्रार्थना ॥ ब्रह्माणी कमलेन्दुसौम्यवदना माहेश्वरी लीलया कौमारी रिपुदर्पनाशनकरी चक्रायुधा वैष्णवी । वाराही घनघोरघर्घरमुखी चैन्द्री च वज्रायुधा चामुण्डा गणनाथरुद्रसहिता रक्षन्तु नो मातरः ॥ ॥ मूल स्तोत्रम् ॥ १. ब्रह्माणी (Brahmani) हंसारूढा प्रकर्तव्या साक्षसूत्रकमण्डलुः । स्रुवं च पुस्तकं धत्ते ऊर्ध्वहस्तद्वये शुभा ॥ १ ॥ (ब्रह्माजी की शक्ति, हंस पर सवार, हाथ में कमंडलु और पुस्तक धारण करने वाली माँ ब्रह्माणी हमारी रक्षा करें।) ब्रह्माणी देव्यै नमः । २. माहेश्वरी (Maheshwari) माहेश्वरी प्रकर्तव्या वृषभासनसंस्थिता । कपालशूलखट्वाङ्गवरदा च चतुर्भुजा ॥ २ ॥ (भगवान शिव की शक्ति, वृषभ (बैल) पर सवार, त्रिशूल और कपाल धारण करने वाली माँ माहेश्वरी हमारी रक्षा करें।) माहेश्वरी देव्यै नमः । ३. कौमारी (Kaumari) कुमाररूपा कौमारी मयूरवरवाहना । रक्तवस्त्रधरा तद्वच्छूलशक्तिगदाधरा ॥ ३ ॥ (भगवान कार्तिकेय की शक्ति, मयूर (मोर) पर सवार, लाल वस्त्र और शक्ति (भाला) धारण करने वाली माँ कौमारी हमारी रक्षा करें।) कौमारी देव्यै नमः । ४. वैष्णवी (Vaishnavi) वैष्णवी विष्णुसदृशी गरुडोपरि संस्थिता । चतुर्बाहुश्च वरदा शङ्खचक्रगदाधरा ॥ ४ ॥ (भगवान विष्णु की शक्ति, गरुड़ पर सवार, शंख-चक्र-गदा धारण करने वाली माँ वैष्णवी हमारी रक्षा करें।) वैष्णवी देव्यै नमः । ५. वाराही (Varahi) वाराहीं तु प्रवक्ष्यामि महिषोपरि संस्थिताम् । वराहसदृशी घण्टानादा चामरधारिणी ॥ ५ ॥ गदाचक्रधरा तद्वद्दानवेन्द्रविघातिनी । लोकानां च हितार्थाय सर्वव्याधिविनाशिनी ॥ ६ ॥ (भगवान वराह की शक्ति, भैंसे पर सवार, वराह मुख वाली, घण्टा-नाद करने वाली और सभी व्याधियों का नाश करने वाली माँ वाराही हमारी रक्षा करें।) वाराही देव्यै नमः । ६. इन्द्राणी / ऐन्द्री (Indrani/Aindri) इन्द्राणी त्विन्द्रसदृशी वज्रशूलगदाधरा । गजासनगता देवी लोचनैर्बहुभिर्वृता ॥ ७ ॥ (देवराज इन्द्र की शक्ति, हाथी (ऐरावत) पर सवार, वज्र धारण करने वाली और सहस्र नेत्रों वाली माँ इन्द्राणी हमारी रक्षा करें।) इन्द्राणी देव्यै नमः । ७. चामुण्डा (Chamunda) दंष्ट्राला क्षीणदेहा च गर्ताक्षा भीमरूपिणी । दिग्बाहुः क्षामकुक्षिश्च मुसलं चक्रमार्गणौ ॥ ८ ॥ अङ्कुशं बिभ्रती खड्गं दक्षिणेष्वथ वामतः । खेटं पाशं धनुर्दण्डं कुठारं चेति बिभ्रती ॥ ९ ॥ चामुण्डा प्रेतगा रक्ता विकृतास्याहिभूषणा । द्विभुजा वा प्रकर्तव्या कृत्तिकाकार्यरन्विता ॥ १० ॥ (माँ काली का उग्र रूप, प्रेत (शव) पर सवार, मुण्डमाला धारण करने वाली, भयङ्कर मुख वाली और चण्ड-मुण्ड का नाश करने वाली माँ चामुण्डा हमारी रक्षा करें।) चामुण्डा देव्यै नमः । ॥ इति श्रीसप्तमातृका स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

सप्तमातृका — परिचय और उत्पत्ति (Origin Story)

सप्तमातृका (The Seven Divine Mothers) आदिशक्ति का वह समूह है, जो असुरी शक्तियों का नाश करने के लिए देवताओं के शरीरों से प्रकट हुआ था। इनकी कथा देवी महात्म्यम् (दुर्गा सप्तशती) के 8वें अध्याय में आती है।

जब माँ दुर्गा (अम्बिका) का युद्ध महा-असुर रक्तबीज से हुआ, तो रक्तबीज को वरदान था कि उसके रक्त की एक भी बूँद पृथ्वी पर गिरते ही उसी के समान बलशाली एक नया रक्तबीज पैदा हो जाएगा। इस विकट स्थिति में, देवताओं की शक्तियाँ उनके आयुधों और वाहनों के साथ प्रकट हुईं।

"यस्य देवस्य यद्रूपं यथा भूषणवाहनम् । तद्वदेव हि तच्छक्तिसुरारीन् योद्धुमाययौ ॥"
(जिस देवता का जैसा रूप, वेशभूषा और वाहन था, उनकी शक्ति भी ठीक वैसे ही रूप में असुरों से लड़ने के लिए आईं।)

सप्तमातृका विवरण (The 7 Mothers)

मातृका (Mother)उत्पत्ति (Origin)वाहन (Vehicle)आयुध (Weapon)
1. ब्रह्माणीब्रह्मा जीहंसकमंडलु, सूत्र
2. माहेश्वरीभगवान शिववृषभ (बैल)त्रिशूल, डमरू
3. कौमारीकार्तिकेय (स्कन्द)मयूर (मोर)शक्ति (भाला)
4. वैष्णवीभगवान विष्णुगरुड़चक्र, शंख, गदा
5. वाराहीवराह अवतारमहिष (भैंसा)हल, दण्ड
6. इन्द्राणीइन्द्र देवऐरावत (हाथी)वज्र
7. चामुण्डादेवी की भृकुटीप्रेत (शव)खड्ग, मुण्ड

पाठ के लाभ (Benefits)

  • बाल-रक्षा (Child Protection): यह स्तोत्र बच्चों की नजर दोष, बीमारी और बुरी शक्तियों से रक्षा करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

  • शत्रु और भय नाश: चामुण्डा और वाराही की कृपा से शत्रुओं (बाहरी और भीतरी जैसे क्रोध, ईर्ष्या) का नाश होता है।

  • कुल-रक्षा: इसे 'कुल-देवी' के रूप में भी पूजा जाता है, जिससे पूरे कुल और परिवार की रक्षा होती है।

  • योग सिद्धि: साधकों के लिए ये ७ मातृकाएँ मूलाधार से सहस्रार तक के ७ चक्रों की अधिष्ठात्री देवियाँ भी मानी जाती हैं।

FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सप्तमातृकाएँ (Saptha Matrikas) कौन हैं?

सप्तमातृकाएँ ७ दिव्य देवियाँ हैं: 1. ब्रह्माणी, 2. माहेश्वरी, 3. कौमारी, 4. वैष्णवी, 5. वाराही, 6. इन्द्राणी, और 7. चामुण्डा। वे पुरुष देवताओं (ब्रह्मा, शिव, विष्णु आदि) की शक्तियों का स्त्री रूप हैं।

2. सप्तमातृकाओं की उत्पत्ति कैसे हुई?

देवी महात्म्यम् (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, जब रक्तबीज नामक असुर से युद्ध हुआ, तो उसके रक्त की हर बूँद से नया असुर पैदा हो रहा था। तब देवताओं के शरीरों से ये शक्तियाँ प्रकट हुईं और उन्होंने रक्तबीज का रक्त पीकर उसका अंत किया।

3. इस स्तोत्र का मुख्य लाभ क्या है?

इसका मुख्य लाभ 'बाल-रक्षा' (बच्चों की सुरक्षा) है। माताएँ अपने बच्चों के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए इसका पाठ करती हैं। इसके अलावा यह शत्रु-नाश और नकारात्मक शक्तियों से भी रक्षा करता है।

4. वाराही देवी का स्वरूप कैसा है?

वाराही देवी का मुख 'वराह' (Boar) जैसा है। वह भगवान वराह की शक्ति हैं और हल (plough) तथा मूसल धारण करती हैं। वे तंत्र साधना में विशेष पूजनीय हैं।

5. क्या अष्टमातृका (Ashta Matrika) भी होती हैं?

हाँ, कभी-कभी 'नरसिंही' (भगवान नरसिंह की शक्ति) या 'महालक्ष्मी' को जोड़कर अष्टमातृकाओं की भी पूजा की जाती है। नेपाल और कुछ तांत्रिक परंपराओं में अष्टमातृका प्रचलित हैं।