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पुष्टिपति स्तोत्रम् - देवर्षि कृतम् (Pushtipati Stotram)

Pushtipati Stotram (Devarshi Krutam)

पुष्टिपति स्तोत्रम् - देवर्षि कृतम् (Pushtipati Stotram)
॥ पुष्टिपति स्तोत्रम् (देवर्षि कृतम्) ॥ देवर्षय ऊचुः । जय देव गणाधीश जय विघ्नहराव्यय । जय पुष्टिपते ढुण्ढे जय सर्वेश सत्तम ॥ १ ॥ जयानन्त गुणाधार जय सिद्धिप्रद प्रभो । जय योगेन योगात्मन् जय शान्तिप्रदायक ॥ २ ॥ जय ब्रह्मेश सर्वज्ञ जय सर्वप्रियङ्कर । जय स्वानन्दपस्थायिन् जय वेदविदांवर ॥ ३ ॥ जय वेदान्तवादज्ञ जय वेदान्तकारण । जय बुद्धिधर प्राज्ञ जय सर्वामरप्रिय ॥ ४ ॥ जय मायामये खेलिन् जयाव्यक्त गजानन । जय लम्बोदरः साक्षिन् जय दुर्मतिनाशन ॥ ५ ॥ जयैकदन्तहस्तस्त्वं जयैकरदधारक । जय योगिहृदिस्थ त्वं जय ब्राह्मणपूजित ॥ ६ ॥ जय कर्म तपोरूप जय ज्ञानप्रदायक । जयामेय महाभाग जय पूर्णमनोरथ ॥ ७ ॥ जयानन्द गणेशान जय पाशाङ्कुशप्रिय । जय पर्शुधर त्वं वै जय पावनकारक ॥ ८ ॥ जय भक्ताभयाध्यक्ष जय भक्तमहाप्रिय । जय भक्तेश विघ्नेश जय नाथ महोदर ॥ ९ ॥ नमो नमस्ते गणनायकाय नमो नमस्ते सकलात्मकाय । नमो नमस्ते भवमोचनाय नमो नमस्तेऽतिसुखप्रदाय ॥ १० ॥ इति श्रीमन्मुद्गले महापुराणे एकदन्तचरिते पञ्चषष्टितमोऽध्याये देवर्षिकृत पुष्टिपति स्तोत्रम् ॥

परिचय (Introduction)

पुष्टिपति स्तोत्र (Pushtipati Stotram) भगवान गणेश की एक दुर्लभ और शक्तिशाली स्तुति है, जो मुद्गल पुराण (Mudgala Purana) के 'एकदन्त चरित्र' (अध्याय ६५) में वर्णित है।

इसकी रचना देवर्षियों (नारद आदि) ने की थी। इसमें गणेश जी को "पुष्टिपति" (Lord of Nourishment) संबोधित किया गया है। "पुष्टि" का व्यापक अर्थ है - उत्तम स्वास्थ्य, धन-धान्य, और आत्मिक बल। यह स्तोत्र जीवन के हर अभाव को दूर कर के पूर्णता प्रदान करता है।

महत्व (Significance)

  • देवर्षि कृतम्: चूंकि इसकी रचना सिद्ध ऋषियों ने की है, इसलिए यह "वाक सिद्धि" (Speech having power to manifest) से युक्त माना जाता है।
  • ढुण्ढि रूप: इसमें गणेश जी को "ढुण्ढे" कहा गया है, जो 'काशी' (Varanasi) में स्थित "ढुण्ढिराज गणेश" का भी स्मरण दिलाता है - जो भक्तों की पुकार को खोज-खोज कर सुनते हैं।
  • समग्र कल्याण: यह स्तोत्र केवल विघ्न नहीं हरता, बल्कि "शांति", "योग", "बुद्धि" और "आनंद" भी प्रदान करता है।

लाभ (Benefits)

  • उत्तम स्वास्थ्य (Health & Vitality): जैसा कि नाम है "पुष्टिपति", यह कुपोषण, कमजोरी और बीमारियों को दूर कर शरीर को पुष्ट करता है।

  • मानसिक शांति (Mental Peace): "जय शान्तिप्रदायक" - यह मंत्र तनाव, चिंता और अशांति को समाप्त कर मन को स्थिर करता है।

  • पूर्ण मनोरथ (Fulfillment of Desires): "जय पूर्णमनोरथ" - शुद्ध भाव से की गई हर मनोकामना गणेश जी पूर्ण करते हैं।

प्रश्नोत्तरी (FAQ)

"पुष्टिपति" (Pushtipati) का क्या अर्थ है?

पुष्टिपति का अर्थ है "पोषण के स्वामी" (Lord of Nourishment)। यहाँ "पुष्टि" केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुष्टि, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की समग्र समृद्धि को दर्शाता है।

यह स्तोत्र किस पुराण से लिया गया है?

यह स्तोत्र "मुद्गल पुराण" (Mudgala Purana) के खण्ड ६, अध्याय ६५ (एकदन्त चरित्र) से लिया गया है।

इस स्तोत्र की रचना किसने की?

इसकी रचना "देवर्षियों" (नारद आदि दिव्य ऋषियों) ने की थी। उन्होंने भगवान गणेश की स्तुति करके उनसे जगत के कल्याण की प्रार्थना की।

श्लोक १ में "ढुण्ढे" (Dhundhe) शब्द का क्या मतलब है?

"ढुण्ढि" (Dhundhi) का अर्थ है "खोजने वाला" या "अन्वेषण करने वाला"। भगवान गणेश भक्तों की समस्याओं को खोजकर उनका समाधान करते हैं और भक्त भगवान को खोजते हैं।

"दुर्मतिनाशन" (Durmatinashana) का क्या लाभ है?

इसका अर्थ है "बुरी बुद्धि का नाश करने वाला"। इस स्तोत्र का पाठ करने से नकारात्मक विचार, डिप्रेशन और मानसिक तनाव दूर होता है।

इस स्तोत्र के पाठ का मुख्य फल क्या है?

मुख्य फल "आरोग्य" (Health) और "पूर्णमनोरथ" (इच्छापूर्ति) है। यह शारीरिक कमजोरी को दूर करके बल और तेज प्रदान करता है।

क्या इसे बच्चों के लिए पढ़ा जा सकता है?

हाँ, "पुष्टि" (Nourishment/Growth) के देवता होने के कारण, बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माता-पिता इसका पाठ कर सकते हैं।

पाठ करने का सर्वश्रेष्ठ समय क्या है?

प्रातःकाल स्नान के बाद या भोजन से पूर्व इसका पाठ करना लाभकारी माना जाता है, जिससे अन्न और जीवन दोनों में पवित्रता आती है।

"योगात्मन्" (Yogatman) का क्या तात्पर्य है?

गणेश जी स्वयं "योग" स्वरूप हैं। वे योगियों के हृदय में वास करते हैं और भक्तों को आत्म-साक्षात्कार (Self-realization) की ओर ले जाते हैं।

क्या बीमार व्यक्ति इसका पाठ कर सकता है?

अवश्य। यह एक "आरोग्य स्तोत्र" है। बीमारी के दौरान इसका पाठ (या श्रवण) करने से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शक्ति मिलती है।