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Narada Kruta Sri Rama Stuti – श्री राम स्तुतिः (नारद कृतम्)

Narada Kruta Sri Rama Stuti – श्री राम स्तुतिः (नारद कृतम्)
॥ श्री राम स्तुतिः (नारद कृतम्) ॥ श्रीरामं मुनिविश्रामं जनसद्धामं हृदयारामं सीतारञ्जन सत्यसनातन राजारामं घनश्यामम् । नारीसंस्तुत कालिन्दीनत निद्राप्रार्थित भूपालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ १ ॥ नानाराक्षसहन्तारं शरधर्तारं जनताधारं वालीमर्दन सागरबन्धन नानाकौतुककर्तारम् । पौरानन्दद नारीतोषक कस्तूरीयुत सत्फालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ २ ॥ श्रीकान्तं जगतीकान्तं स्तुतसद्भक्तं बहुसद्भक्तं सद्भक्तहृदयेप्सितपूरक पद्माक्षं नृपजाकान्तम् । पृथ्वीजापति विश्वामित्रसुविद्यादर्शितसच्छीलं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ ३ ॥ सीतारञ्जितविश्वेशं धरपृथ्वीशं सुरलोकेशं ग्रावोद्धारण रावणमर्दन तद्भ्रातृकृतलङ्केशम् । किष्किन्धाकृतसुग्रीवं प्लवगबृन्दाधिप सत्पालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ ४ ॥ श्रीनाथं जगतांनाथं जगतीनाथं नृपतीनाथं भूदेवासुरनिर्जरपन्नग-गन्धर्वादिकसन्नाथम् । कोदण्डधृत तूणीरान्वित सङ्ग्रामेकृत भूपालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ ५ ॥ रामेशं जगतामीशं जम्बुद्वीपेशं नतलोकेशं वाल्मीकिकृतसंस्तवहर्षित सीतालालित वागीशम् । पृथ्वीशं हृतभूभारं सतयोगीन्द्रं जगतीपालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ ६ ॥ चिद्रूपं जितसद्भूपं नतसद्भक्तं नतसद्भूपं सप्तद्वीपजवर्षजकामिनिसंनीराजित पृथ्वीशम् । नानापार्थिव नानोपायन सम्यक्तोषित सद्भूपं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ ७ ॥ संसेव्यं मुनिभिर्गेयं कविभिः स्तव्यं हृदि सन्ध्यारं नानापण्डिततर्कपुराणजवाक्यैर्धिक्कृतसत्काव्यम् । साकेतस्थित कौसल्यासुत गन्धाद्यङ्कित सत्फालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ ८ ॥ भूपालं घनसन्नीलं नृपसद्बालं कलिसङ्कालं सीताजानिं वरोत्पललोचन मन्त्रीमोचित तत्कालम् । श्रीसीताकृतपद्मास्वादन सम्यक्शिक्षित तत्कालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ ९ ॥ ॥ फलश्रुति ॥ हे राजन् नवभिः श्लोकैः भुविपापहरं नवकं रम्यं मे बुद्ध्याकृतमुत्तम नूतनमेतद्राघवमर्त्यानम् । स्त्रीपौत्रान्नादिकक्षेमप्रदमस्मत्सद्वरदं बालं रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम् ॥ १० ॥ ॥ इति श्री नारद कृत श्रीरामस्तुतिः सम्पूर्णा ॥

श्री राम स्तुतिः (नारद कृतम्): परिचय एवं भक्ति परम्परा

श्री राम स्तुतिः (नारद कृतम्) सनातन धर्म के उन अनमोल रत्नों में से एक है, जो साक्षात भक्ति शिरोमणि देवर्षि नारद के हृदय से प्रवाहित हुई है। यह स्तुति प्रभु श्री राम के अवतार की महिमा, उनके वीर स्वरूप और उनकी शरणागत वत्सलता का एक काव्यमय चित्रण है। इस स्तुति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लयबद्धता और प्रत्येक श्लोक के अंत में आने वाला पद 'च्छेदित सत्तालम्' है, जो भगवान राम के उस पराक्रम की याद दिलाता है जब उन्होंने एक ही बाण से सात ताल के वृक्षों को बीध दिया था।

नारद मुनि, जिन्हें भगवान विष्णु का मानस पुत्र और त्रिलोक का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है, उनके द्वारा रचित यह स्तुति किसी भी साधक के लिए राम-भक्ति के द्वार खोलने वाली कुंजी है। रामायण की कथा के अनुसार, नारद जी ने ही महर्षि वाल्मीकि को प्रभु राम के १६ गुणों का उपदेश दिया था, जिसके बाद 'रामायण' की रचना हुई। इस स्तुति में नारद जी ने राम को 'मुनिविश्रामम्' (मुनियों को विश्राम देने वाले) और 'हृदयारामम्' (हृदय को आनंदित करने वाले) कहा है। यह शब्दावली दर्शाती है कि राम केवल एक ऐतिहासिक राजा नहीं, बल्कि प्रत्येक योगी और भक्त के हृदय में रमने वाले परब्रह्म हैं।

यह स्तुति ९ मुख्य श्लोकों में विभाजित है, जिसमें १०वां श्लोक 'फलश्रुति' के रूप में है। इसमें भगवान के बाल स्वरूप से लेकर उनके रावण वध, अहल्या उद्धार और राज्याभिषेक तक की लीलाओं का सूक्ष्म समावेश है। नारद जी ने यहाँ प्रभु को 'चिद्रूपम्' (चेतन स्वरूप) और 'जगतीपालम्' (जगत का पालन करने वाला) कहकर उनके ईश्वरत्व को प्रमाणित किया है। यह स्तुति विशेष रूप से उन भक्तों के लिए सिद्ध है जो अपने जीवन में शांति, स्थिरता और ईश्वरीय सुरक्षा की कामना करते हैं।

आध्यात्मिक ग्रंथों जैसे आनन्द रामायण और अध्यात्म रामायण में नारद-राम संवाद का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह स्तुति उसी परंपरा का हिस्सा है जहाँ एक भक्त अपने आराध्य के गुणों का गान कर स्वयं को धन्य महसूस करता है। इस स्तुति का पाठ करना साक्षात अयोध्या के वैभव और राम-राज्य की शांति का अनुभव करने जैसा है।

विशिष्ट महत्व और 'च्छेदित सत्तालम्' का रहस्य (Significance)

नारद कृत श्री राम स्तुति का महत्व इसके दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थों में छिपा है। प्रत्येक श्लोक के अंत में प्रयुक्त वाक्यांश "रामं त्वां शिरसा सततं प्रणमामि च्छेदित सत्तालम्" का गहरा अर्थ है।

सप्तताल भेदन का प्रतीक

रामायण के किष्किन्धा काण्ड में प्रसंग आता है कि सुग्रीव को प्रभु की शक्ति पर विश्वास दिलाने के लिए श्री राम ने एक ही बाण से सात 'ताल' के वृक्षों को काट दिया था। आध्यात्मिक स्तर पर ये 'सात ताल' हमारे शरीर की सात ग्रंथियों या सात विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर और अहंकार) के प्रतीक हैं। नारद जी कहते हैं कि जो राम इन सात तालों का भेदन कर सकते हैं, वही हमारे हृदय की अविद्या की ग्रंथियों को भी काट सकते हैं।

नारद की अनन्य भक्ति

नारद जी स्वयं 'भक्ति सूत्र' के रचयिता हैं। उनकी इस स्तुति में 'सद्भाव' और 'समर्पण' की प्रधानता है। यहाँ प्रभु को 'निद्राप्रार्थित भूपालं' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि योगनिद्रा भी जिनकी प्रार्थना करती है। यह प्रभु के उस स्वरूप का वर्णन है जो काल और माया से ऊपर है। इस स्तुति का पाठ करने से साधक के भीतर सात्विक गुणों का उदय होता है और तामसिक प्रवृत्तियों का नाश होता है।

फलश्रुति: नारद कृत श्री राम स्तुति के लाभ (Benefits)

इस स्तुति के १०वें श्लोक में नारद जी ने स्वयं इसके चमत्कारी लाभों का वर्णन किया है:

  • पाप मुक्ति: 'भुविपापहरं' — इस पाठ से पृथ्वी पर जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का नाश होता है।
  • पारिवारिक कल्याण: 'स्त्रीपौत्रान्नादिकक्षेमप्रदम्' — यह स्तुति परिवार, संतान, अन्न और धन की सुरक्षा एवं समृद्धि प्रदान करती है।
  • मानसिक शांति: 'हृदयारामं' होने के कारण, यह मन के विक्षेपों को दूर कर परम शांति और स्थिरता प्रदान करती है।
  • शत्रु और बाधा नाश: 'रावणमर्दन' और 'शत्रुसैन्यानां निहन्ता' नामों के प्रभाव से जीवन की सभी बाधाएं और गुप्त शत्रु परास्त होते हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यह पाठ साधक को 'मुनि विश्राम' की अवस्था तक ले जाता है, जहाँ उसे संसार के दुखों से पूर्ण निवृत्ति मिलती है।

पाठ विधि एवं साधना के नियम (Ritual Method)

नारद कृत श्री राम स्तुति का पाठ अत्यंत पवित्रता और भक्ति के साथ किया जाना चाहिए। इसकी सर्वोत्तम विधि निम्नलिखित है:

दैनिक पाठ विधान

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय पाठ के लिए सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले वस्त्र) धारण करें।
  • आसन: ऊनी या कुशा के आसन पर उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके बैठें।
  • पूजा: प्रभु श्री राम और सीता जी के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं और तुलसी का पत्ता अर्पित करें।
  • माला: पाठ के पश्चात तुलसी की माला से १०८ बार 'राम' नाम का जप करना विशेष फलदायी है।

विशेष मनोकामना हेतु

यदि कोई विशेष संकट हो, तो लगातार २१ दिनों तक ९ बार इस स्तुति का पाठ करें। राम नवमी, हनुमान जयंती और प्रत्येक पक्ष की नवमी तिथि पर इसका अनुष्ठान करना अमोघ माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. नारद कृत श्री राम स्तुति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य प्रभु राम की अनन्य भक्ति प्राप्त करना, पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि (अन्न, पुत्र और क्षेम) की प्राप्ति है।

2. 'च्छेदित सत्तालम्' का शाब्दिक अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है — "जिन्होंने सात ताल के वृक्षों को बीध दिया था।" यह भगवान राम की अजेय शक्ति का प्रतीक है।

3. क्या इस स्तुति का पाठ बच्चे भी कर सकते हैं?

हाँ, इसमें 'नृपसद्बालं' (राजा के श्रेष्ठ बालक) का वर्णन है। बच्चों द्वारा इसके पाठ से उनकी बुद्धि प्रखर होती है और उनमें मर्यादा के संस्कार विकसित होते हैं।

4. क्या इस स्तुति में रामायण की कथा का वर्णन है?

जी हाँ, इसमें अहल्या उद्धार (ग्रावोद्धारण), रावण वध, सुग्रीव मित्रता और सागर बन्धन जैसी प्रमुख घटनाओं का सूक्ष्म वर्णन है।

5. क्या यह स्तुति धन और संपत्ति प्रदान करती है?

फलश्रुति के अनुसार, यह 'अन्नादिकक्षेमप्रदम्' है, अर्थात यह भोजन, संपत्ति और पारिवारिक सुरक्षा देने वाली है।

6. नारद जी ने इस स्तुति की रचना किस ग्रन्थ में की है?

यह स्तुति विभिन्न रामायण आधारित आगमों और पुराणों में मिलती है, जिसे विशेष रूप से नारद-राम संवाद की परंपरा में पूजा जाता है।

7. क्या इसे घर के मंदिर में पढ़ना उचित है?

हाँ, घर के मंदिर में प्रभु राम के सामने इसका पाठ करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख का वास होता है।

8. 'निद्राप्रार्थित भूपालं' का क्या रहस्य है?

इसका अर्थ है कि वह राजा (राम) जिसकी प्रार्थना साक्षात निद्रा (योगनिद्रा) भी करती है। यह उनके ईश्वरत्व और सर्वोच्च चेतना का प्रतीक है।

9. क्या इस स्तुति से मानसिक तनाव दूर होता है?

हाँ, 'हृदयारामं' नाम का जप और इस स्तुति का लयबद्ध पाठ मन को गहरा विश्राम और शांति प्रदान करता है।

10. पाठ के लिए सबसे अच्छा दिन कौन सा है?

प्रतिदिन पाठ करना सर्वोत्तम है, लेकिन गुरुवार और शनिवार को इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।