मयूरेश स्तोत्रम् (Mayuresha Stotram)
Mayuresha Stotram

परिचय (Introduction)
मयूरेश स्तोत्रम् (Mayuresha Stotram) भगवान गणेश के मयूरेश्वर (Mayureshwara) अवतार की स्तुति है। इसकी रचना स्वयं ब्रह्मा जी ने की है।
यह स्तोत्र मोरगाँव (Morgaon - मयूरपुरी) अष्टविनायक मंदिर का मुख्य प्रार्थना मंत्र है। त्रेता युग में "सिंधु" नामक दैत्य का वध करने के लिए गणेश जी ने "मयूर" (मोर) को अपना वाहन बनाया और 6 भुजाओं वाला अवतार लिया, जिसे मयूरेश्वर कहा जाता है।
महत्व (Significance)
- पुराण पुरुष: ब्रह्मा जी उन्हें "पुराणपुरुषं" कहते हैं, जिसका अर्थ है कि वे सृष्टि के आरंभ से भी पहले विद्यमान "आदि देव" हैं।
- त्रिदेव रूप: श्लोक ३ में कहा गया है कि वे अपनी इच्छा से सृष्टि का सृजन (Creator), पालन (Preserver) और संहार (Destroyer) करते हैं। अर्थात, ब्रह्मा, विष्णु और महेश उन्हीं के रूप हैं।
- निर्गुण-सगुण: वे "गुणातीत" (तीनों गुणों से परे) भी हैं और "गुणमय" (सगुण रूप धारण करने वाले) भी हैं।
लाभ (Benefits - Phala Shruti)
कारागार मुक्ति (Freedom from Prison): इस स्तोत्र का सबसे विशिष्ट लाभ यह है - "कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात्"। श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मात्र 7 दिनों में बंदी कारागार से मुक्त हो जाता है।
रोग निवारण (Health): यह "आधिव्याधिहरं" है, अर्थात मानसिक चिंता (आधि) और शारीरिक रोग (व्याधि) दोनों को नष्ट करता है।
सर्व कामाना पूर्ति: ब्रह्मा जी कहते हैं कि यह स्तोत्र "सर्वकामप्रदं" है - भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है।
प्रश्नोत्तरी (FAQ)