श्रीमातङ्ग्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
Sri Matangi Ashtottara Shatanama Stotram — कालीविलास तन्त्र

श्रीमातङ्ग्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् — परिचय (Introduction)
श्रीमातङ्ग्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् माता मातंगी के 108 अत्यंत दिव्य और मंगलकारी नामों का एक अद्भुत स्तोत्र है। यह स्तोत्र 'श्रीकालीविलासतन्त्र' के 17वें पटल से उधृत है, जिसमें स्वयं भगवान शिव (तामस रूप में) माता पार्वती को इन नामों की महिमा बतलाते हैं। दश महाविद्याओं में नौवीं महाविद्या के रूप में पूजी जाने वाली देवी मातंगी ज्ञान, वाणी (Speech), संगीत, कला और सम्मोहन की अधिष्ठात्री देवी हैं।
इस स्तोत्र (Shatanama Stotram) का महत्व असीम है। कलियुग में शीघ्र फल प्रदान करने वाली महाविद्याओं में देवी मातंगी का विशिष्ट स्थान है। जो भी साधक या सामान्य गृहस्थ इन 108 नामों का नित्य पाठ करता है, माता उस पर अपनी अहैतुकी कृपा बरसाती हैं, जिसके प्रभाव से चतुर्वर्ग (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) की प्राप्ति सुलभ हो जाती है।
त्रिसन्ध्य पाठ की अनिवार्यता और वाक्-सिद्धि
स्तोत्र के 15वें श्लोक में स्वयं शिव कहते हैं कि "त्रिसन्ध्य यः पठेन्नित्यं तस्य सिद्धिर्न संशयः" — अर्थात् जो व्यक्ति तीनों संध्याओं (प्रातः, मध्याहन और सायं) में प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे सभी वांछित सिद्धियां अवश्य प्राप्त होती हैं, इसमें कोई संशय नहीं है।
इन नामों के उच्चारण मात्र से वाणी में अपार ओज और वाक्-सिद्धि शक्ति उत्पन्न होती है, जिसका प्रभाव समाज में एक चुम्बकीय आकर्षण (Magnetic Attraction) की तरह कार्य करता है।
स्तोत्र पाठ के विशिष्ट लाभ (Benefits from Chanting)
श्री मातङ्गी शतनाम स्तोत्र के नित्य पाठ से साधक को अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलताएँ प्राप्त होती हैं:
- कला और संगीत में निपुणता: यह पाठ उन लोगों के लिए अमोघ मंत्र है जो गायन, वादन, नृत्य, या किसी भी कला के क्षेत्र में सफलता पाना चाहते हैं।
- बुद्धि और स्मरण शक्ति: विद्यार्थियों के लिए यह नामावली वरदान है। यह तीव्र मेधा, ग्रहण शक्ति और स्मरण शक्ति प्रदान करती है।
- शत्रु और मुकदमों पर विजय: देवी मातंगी के प्रभावशाली तांत्रिक नामों का जप बड़े से बड़े शत्रु के मन को शांत कर देता है।
- वशीकरण और आकर्षण: जो नियमित रूप से मातंगी माता के इन 108 नामों का जप करता है, उसे समाज में मान-सम्मान व यश प्राप्त होता है।
- चतुर्वर्ग सिद्धि: स्तोत्र के विनियोग में स्पष्ट है कि इसका पाठ 'चतुर्वर्ग सिद्धये' अर्थात् धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
पाठ विधि और विशेष नियम (Ritual Method & Rules)
माता मातंगी की उपासना अत्यंत सरल होने के साथ-साथ बहुत ही भाव-प्रधान है। सहस्रनामावली का यह पाठ कोई भी श्रद्धालु स्त्री या पुरुष घर पर कर सकता है।
समय, दिशा और सामग्री
- श्रेष्ठ समय: त्रिसन्ध्या (सुबह, दोपहर और शाम) का समय पाठ के लिए सर्वोत्तम है।
- दिशा व आसन: उत्तर (North) दिशा की ओर मुख करके बैठें। हरा या लाल आसन बिछाएं।
- वस्त्र: हरे या लाल रंग के साफ-सुथरे वस्त्र धारण करना माता मातंगी को अति प्रिय है।
- दीपक एवं धूप: घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करें और सुगंधित (विशेषतः मोगरा) धूप जलाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)