एकाश्लोकी नवग्रह चक्र स्तोत्रम्
Ekashloki Navagraha Chakra Stotram — Planetary Body Nyasa for Longevity

एकाश्लोकी नवग्रह चक्र स्तोत्रम् — शरीर ही ब्रह्मांड है
हिंदू धर्मशास्त्रों और योग विज्ञान का एक मूलभूत सिद्धांत है — "यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे" (जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में है)। एकाश्लोकी नवग्रह चक्र स्तोत्रम् (Ekashloki Navagraha Chakra Stotram) इसी सिद्धांत का व्यावहारिक रूप है। यह सामान्य पूजा-पाठ से अलग एक योगिक क्रिया (Yogic Practice) है।
जहाँ अन्य नवग्रह स्तोत्र बाहरी देवताओं की स्तुति करते हैं, यह दुर्लभ श्लोक उन देवताओं को आपके स्वयं के शरीर के भीतर विभिन्न अंगों और चक्रों (Energy Centers) में प्रतिष्ठित करता है। इसका उद्देश्य केवल ग्रह शांति नहीं, बल्कि दीर्घायु (Ayush) और आरोग्य (Health) की प्राप्ति है।
श्लोक का विस्तृत विश्लेषण (Chakra Mapping)
इस एक श्लोक में शरीर के 7 चक्रों और मर्म स्थानों का ग्रहों के साथ अद्भुत संयोजन किया गया है। आइये इसे डिकोड करें:
| ग्रह (Planet) | श्लोक में शब्द | शरीर में स्थान (Body Part/Chakra) |
|---|---|---|
| सूर्य (Sun) | सहस्रकिरणं | आधार (मूलाधार चक्र) — Root Chakra |
| चन्द्र (Moon) | ताराधवं | स्वाश्रय (स्वाधिष्ठान चक्र) — Sacral Chakra |
| मंगल (Mars) | माहेयं | मणिपूरक चक्र — Solar Plexus (Navel) |
| बुध (Mercury) | बुधं | हृदय (अनाहत चक्र) — Heart Chakra |
| गुरु (Jupiter) | वाचस्पतिम् | कण्ठ (विशुद्ध चक्र) — Throat Chakra |
| शुक्र (Venus) | भृगुनन्दनं | भ्रू-मध्य (आज्ञा चक्र) — Third Eye |
| शनि (Saturn) | दिनमणेः पुत्रं | त्रिकूट स्थल (सहस्रार के पास) — Crown Area |
| राहु-केतु-गुलिक | राहु-केतु-गुलिकान् | नाड़ी और मर्म स्थान — Nerves & Vital Points |
लाभ एवं महत्व
- आरोग्य (Health): श्लोक का अंतिम शब्द है 'आयुषे'। यह स्पष्ट करता है कि यह प्रार्थना मुख्यतः आयु वृद्धि और बीमारियों से रक्षा के लिए है। यह 'मेडिकल एस्ट्रोलॉजी' (Medical Astrology) का एक शक्तिशाली उपाय है।
- चक्र संतुलन (Chakra Balancing): जब हम ग्रहों का ध्यान उनके संबंधित चक्रों पर करते हैं, तो वे चक्र सक्रिय और संतुलित होते हैं। जैसे कंठ में गुरु का ध्यान वाणी दोष दूर करता है।
- नाड़ी शुद्धि: राहु और केतु को अक्सर छाया ग्रह माना जाता है जो अदृश्य बाधाएं उत्पन्न करते हैं। उन्हें नाड़ियों और मर्म स्थानों में नमन करने से स्नायु तंत्र (Nervous System) संबंधी विकार दूर होते हैं।
- गुलिक शांति: गुलिक शनि का पुत्र माना जाता है और अत्यंत पाप ग्रह है। शरीर में इसकी शांति होने से विषाक्त प्रभाव (Toxicity) कम होता है।
यदि आप विस्तृत नवग्रह शांति चाहते हैं, तो महर्षि व्यास कृत नवग्रह स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
ध्यान और पाठ विधि (Visualization Method)
इस स्तोत्र को केवल पढ़ने के बजाय 'न्यास' (Nyasa) की तरह करना अधिक फलदायी है:
- आसन: सुखासन या पद्मासन में सीधे बैठें। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
- श्वास: गहरी श्वास लें और मन को शांत करें।
- स्पर्श और उच्चारण:
- "आधारे प्रथमे सहस्रकिरणं..." बोलते समय अपने ध्यान को मूलाधार (Base of spine) पर ले जाएं।
- "ताराधवं स्वाश्रये..." बोलते समय नाभि से थोड़ा नीचे ध्यान करें।
- "हृदि बुधं..." बोलते समय दायें हाथ को हृदय पर रखें।
- "कण्ठे च..." बोलते समय गले को स्पर्श करें।
- "भ्रूमध्ये..." बोलते समय दोनों भौहों के बीच ध्यान करें।
- "त्रिकूटस्थले..." बोलते समय सिर के सबसे ऊपरी भाग (चोटी) पर ध्यान दें।
- समापन: अंत में "नमाम्यायुषे" कहते हुए पूरे शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को महसूस करें और लंबी आयु की प्रार्थना करें।