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Devacharya Krita Shiva Stuti – श्री शिव स्तुतिः (देवाचार्य कृतम्)

Devacharya Krita Shiva Stuti – श्री शिव स्तुतिः (देवाचार्य कृतम्)
आङ्गीरस उवाच – जय शङ्कर शान्तशशाङ्करुचे रुचिरार्थद सर्वद सर्वशुचे । शुचिदत्तगृहीत महोपहृते हृतभक्तजनोद्धततापतते ॥ १ ॥ तत सर्वहृदम्बर वरदनते नत वृजिन महावनदाहकृते । कृतविविधचरित्रतनो सुतनो- ऽतनु विशिखविशोषण धैर्यनिधे ॥ २ ॥ निधनादिविवर्जितकृतनति कृ- त्कृति विहित मनोरथ पन्नगभृत् । नगभर्तृनुतार्पित वामनवपु- स्स्ववपुःपरिपूरित सर्वजगत् ॥ ३ ॥ त्रिजगन्मयरूप विरूप सुदृ- ग्दृगुदञ्चन कुञ्चनकृत हुतभुक् । भव भूतपते प्रमथैकपते पतितेष्वपि दत्तकर प्रसृते ॥ ४ ॥ प्रसृताखिल भूतल संवरण प्रणवध्वनिसौध सुधाम्शुधर । धरराज कुमारिकया परया परितः परितुष्टनतोस्मि शिव ॥ ५ ॥ शिव देव गिरीश महेश विभो विभवप्रद शर्व शिवेश मृड । मृडयोडुपतिध्रजगत्त्रितयं कृतयन्त्रणभक्ति विघातकृताम् ॥ ६ ॥ न कृतां तत एष बिभेमि हर प्रहराशु ममाघममोघमते । नमतान्तरमन्यदवैमि शिवं शिवपादनतेः प्रणतोऽस्मिततः ॥ ७ ॥ विततेत्र जगत्यखिलाघहर हरतोषणमेव परङ्गुणवत् । गुणहीनमहीनमहावलयं लयपावकमीशनतोस्मि ततः ॥ ८ ॥ इति स्तुत्वा महादेवं विररामाङ्गिरस्सुतः । व्यतरच्च महादेवस्स्तुत्या तुष्टो वरान्बहून् ॥ ९ ॥ श्रीमहादेव उवाच – बृहता तपसानेन बृहतां पतिरस्यहो । नाम्ना बृहस्पतिरिति ग्रहेष्वर्च्यो भव द्विज ॥ १० ॥ अस्माल्लिङ्गार्चनान्नित्यं जीवभूतोसि मे यतः । अतोजीव इति ख्यातिं त्रिषु लोकेषु यास्यसि ॥ ११ ॥ वाचां प्रपञ्चैश्चतुरैर्निष्प्रपञ्चं यतस्स्तुतः । अतो वाचां प्रपञ्चस्य पतिर्वाचस्पतिर्भव ॥ १२ ॥ अस्य स्तोत्रस्य पठनादवातिष्ठति यः पुमान् । तस्य स्यात्संस्कृता वाणी त्रिभिर्वर्षै-स्त्रिकालतः ॥ १३ ॥ इति श्री देवाचार्य कृत शिव स्तोत्रम् । इतर पश्यतु ।

श्री शिव स्तुतिः (देवाचार्य कृतम्) - परिचय

श्री शिव स्तुतिः (देवाचार्य कृतम्) भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत स्तोत्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
  • विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
  • समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
  • भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री शिव स्तुतिः (देवाचार्य कृतम्) का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।

2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?

हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।

3. श्री शिव स्तुतिः (देवाचार्य कृतम्) के पाठ से क्या फल मिलता है?

इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।