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चिन्तामणि षट्पदी (Chintamani Shatpadi)

Chintamani Shatpadi

चिन्तामणि षट्पदी (Chintamani Shatpadi)
॥ चिन्तामणि षट्पदी ॥ द्विरदवदन विषमरद वरद जयेशान शान्तवरसदन । सदनवसादन दयया कुरु सादनमन्तरायस्य ॥ १ ॥ इन्दुकला कलितालिक सालिकशुम्भत्कपोलपालियुग । विकटस्फुटकटधाराधारोऽस्यस्य प्रपञ्चस्य ॥ २ ॥ वरपरशुपाशपाणे पणितपणायापणायितोऽसि यतः । आरूह्य वज्रदन्तं आखुं विदधासि विपदन्तम् ॥ ३ ॥ लम्बोदर दूर्वासन शयधृतसामोदमोदकाशनक । शनकैरवलोकय मां यमान्तरायापहारिचारुदृशा ॥ ४ ॥ आनन्दतुन्दिलाखिलवृन्दारकवृन्दवन्दिताङ्घ्रियुग । सुखधृतदण्डरसालो नागजभालोऽतिभासि विभो ॥ ५ ॥ अगणेयगुणेशात्मज चिन्तकचिन्तामणे गणेशान । स्वचरणशरणं करुणावरुणालय देव पाहि मां दीनम् ॥ ६ ॥ रुचिरवचोऽमृतरावोन्नीता नीता दिवं स्तुतिः स्फीता । इति षट्पदी मदीया गणपतिपादाम्बुजे विशतु ॥ ७ ॥ इति चिन्तामणिषट्पदी ॥

परिचय (Introduction)

चिन्तामणि षट्पदी (Chintamani Shatpadi) भगवान गणेश की एक अत्यंत भावपूर्ण और मधुर स्तुति है। "षट्पदी" के दो सुंदर अर्थ हैं:

  • छह पद (Six Verses): यह स्तोत्र छह पदों वाला है।
  • भ्रमर (Bee): 'षट्पद' का अर्थ भौंरा भी होता है (जिसके छह पैर हों)। जैसे भौंरा कमल का रस पाने के लिए मंडराता है, वैसे ही भक्त का मन भगवान के चरण-कमलों के मकरंद (आनंद) के लिए लालायित है।

स्तोत्र का महत्व (Significance)

इसमें गणेश जी को चिन्तामणि कहा गया है। पौराणिक मान्यताओं में 'चिन्तामणि' वह दिव्य रत्न है जो मन की हर इच्छा पूरी करता है। गणेश जी साक्षात चिन्तामणि हैं जो अपने भक्तों की सभी चिंताओं (Worries), दुःखों और अभावों को हर लेते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits - Phala Shruti)

इस स्तोत्र के श्रद्धापूर्वक पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • चिंता निवारण: यह मानसिक तनाव, घबराहट और अज्ञात भय को दूर कर मन को शांति प्रदान करता है।

  • विघ्न नाश: "सादनमन्तरायस्य" - यह जीवन में आने वाली हर रुकावट (अंतराय) को जड़ से समाप्त कर देता है।

  • शरणागति और रक्षा: "पाहि मां दीनम्" - दीन-हीन भाव से प्रार्थना करने वाले भक्त को भगवान अपनी शरण में लेते हैं और रक्षा करते हैं।

पाठ विधि (Method of Recitation)

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • गणेश जी का मानसिक ध्यान करें और उन्हें "चिन्तामणि" स्वरूप में देखें।
  • पूरी श्रद्धा के साथ इस षट्पदी का पाठ करें।
  • संभव हो तो पाठ के बाद गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ भी करें।

प्रश्नोत्तरी (FAQ)

चिन्तामणि षट्पदी (Chintamani Shatpadi) क्या है?

यह भगवान गणेश को समर्पित छह पदों (श्लोकों) वाला एक लघु स्तोत्र है। इसमें उन्हें 'चिन्तामणि' (चिंताओं को हरने वाला रत्न) के रूप में पूजा गया है।

'षट्पदी' (Shatpadi) शब्द का क्या अर्थ है?

षट्पदी के दो अर्थ हैं: 1) छह पदों (चरणों) वाली रचना, और 2) 'भ्रमर' (भौंरा), जिसके छह पैर होते हैं। यहाँ भक्त का मन भौंरे की भांति गणेश जी के चरण-कमलों का रसपान करना चाहता है।

चिन्तामणि गणेश का क्या महत्व है?

चिन्तामणि स्वरूप सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला और भक्तों की चिंताओं (Worries) व दुःखों को तत्काल समाप्त करने वाला माना जाता है।

इस स्तोत्र की रचना किसने की है?

परंपरागत रूप से, ऐसी सुंदर 'षट्पदी' रचनाओं का श्रेय आदि शंकराचार्य जी (Adi Shankaracharya) को दिया जाता है, जो अद्वैत वेदांत के महान आचार्य थे।

श्लोक 1 में 'द्विरदवदन' का क्या अर्थ है?

'द्वि-रद' का अर्थ है 'दो दांतों वाला' (हाथी)। अतः द्विरदवदन का अर्थ है - गजमुख (Elephant-faced) भगवान गणेश।

इस स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, विशेषकर जब मन अशांत हो, चिंताओं से घिरा हो, या कोई नया कार्य शुरू कर रहे हों।

'अन्तराय' (Antaraya) का क्या मतलब है?

श्लोक 1 में 'सादनमन्तरायस्य' आया है। अन्तराय का अर्थ है 'बाधा' या 'विघ्न' (Obstacle)। गणेश जी इन बाधाओं का नाश (सादन) करते हैं।

श्लोक 6 में 'अगणेयगुण' किसे कहा गया है?

यह गणेश जी के लिए प्रयुक्त विशेषण है, जिसका अर्थ है 'जिनके गुणों की गणना नहीं की जा सकती' (Countless Virtues)।

क्या इसके पाठ से मोक्ष की प्राप्ति होती है?

अंतिम श्लोक में प्रार्थना की गई है कि यह स्तुति गणेश जी के चरण-कमलों में प्रवेश करे। यह भक्ति और अंत में मोक्ष (परम गति) की कामना को दर्शाता है।

पाठ विधि (Vidhi) क्या है?

स्नान कर पवित्र होकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें। गणेश जी को लाल फूल या दूर्वा अर्पित करें और इस षट्पदी का पाठ करें।