Sri Vighneshwara Ashtottara Shatanamavali – श्री विघ्नेश्वर अष्टोत्तरशतनामावली

॥ श्री विघ्नेश्वर अष्टोत्तरशतनामावली ॥
॥ नामावली ॥
ॐ विनायकाय नमः ।
ॐ विघ्नराजाय नमः ।
ॐ गौरीपुत्राय नमः ।
ॐ गणेश्वराय नमः ।
ॐ स्कन्दाग्रजाय नमः ।
ॐ अव्ययाय नमः ।
ॐ पूताय नमः ।
ॐ दक्षाय नमः ।
ॐ अध्यक्षाय नमः ।
ॐ द्विजप्रियाय नमः ।
ॐ अग्निगर्वच्छिदे नमः ।
ॐ इन्द्रश्रीप्रदाय नमः ।
ॐ वाणीप्रदायकाय नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ।
ॐ शर्वतनयाय नमः ।
ॐ शर्वरीप्रियाय नमः ।
ॐ सर्वात्मकाय नमः ।
ॐ सृष्टिकर्त्रे नमः ।
ॐ देवानीकार्चिताय नमः ।
ॐ शिवाय नमः ।
ॐ सिद्धिबुद्धिप्रदाय नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः ।
ॐ गजाननाय नमः ।
ॐ द्वैमातुराय नमः ।
ॐ मुनिस्तुत्याय नमः ।
ॐ भक्तविघ्नविनाशनाय नमः ।
ॐ एकदन्ताय नमः ।
ॐ चतुर्बाहवे नमः ।
ॐ चतुराय नमः ।
ॐ शक्तिसम्युताय नमः ।
ॐ लम्बोदराय नमः ।
ॐ शूर्पकर्णाय नमः ।
ॐ हरये नमः ।
ॐ ब्रह्मविदुत्तमाय नमः ।
ॐ काव्याय नमः ।
ॐ ग्रहपतये नमः ।
ॐ कामिने नमः ।
ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः ।
ॐ पाशाङ्कुशधराय नमः ।
ॐ चण्डाय नमः ।
ॐ गुणातीताय नमः ।
ॐ निरञ्जनाय नमः ।
ॐ अकल्मषाय नमः ।
ॐ स्वयं सिद्धाय नमः ।
ॐ सिद्धार्चितपदाम्बुजाय नमः ।
ॐ बीजापूरफलासक्ताय नमः ।
ॐ वरदाय नमः ।
ॐ शाश्वताय नमः ।
ॐ कृतिने नमः ।
ॐ द्विजप्रियाय नमः ।
ॐ वीतभयाय नमः ।
ॐ गदिने नमः ।
ॐ चक्रिणे नमः ।
ॐ इक्षुचापधृते नमः ।
ॐ श्रीदाय नमः ।
ॐ अजाय नमः ।
ॐ उत्पलकराय नमः ।
ॐ श्रीपतिस्तुतिहर्षिताय नमः ।
ॐ कुलाद्रिभेत्त्रे नमः ।
ॐ जटिलाय नमः ।
ॐ चन्द्रचूडाय नमः ।
ॐ अमरेश्वराय नमः ।
ॐ नागयज्ञोपवीतवते नमः ।
ॐ कलिकल्मषनाशनाय नमः ।
ॐ स्थुलकण्ठाय नमः ।
ॐ स्वयङ्कर्त्रे नमः ।
ॐ सामघोषप्रियाय नमः ।
ॐ पराय नमः ।
ॐ स्थूलतुण्डाय नमः ।
ॐ अग्रण्याय नमः ।
ॐ धीराय नमः ।
ॐ वागीशाय नमः ।
ॐ सिद्धिदायकाय नमः ।
ॐ दूर्वाबिल्वप्रियाय नमः ।
ॐ कान्ताय नमः ।
ॐ पापहारिणे नमः ।
ॐ समाहिताय नमः ।
ॐ आश्रितश्रीकराय नमः ।
ॐ सौम्याय नमः ।
ॐ भक्तवाञ्छितदायकाय नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ अच्युतार्च्याय नमः ।
ॐ कैवल्याय नमः ।
ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः ।
ॐ ज्ञानिने नमः ।
ॐ दयायुताय नमः ।
ॐ दान्ताय नमः ।
ॐ ब्रह्मद्वेषविवर्जिताय नमः ।
ॐ प्रमत्तदैत्यभयदाय नमः ।
ॐ व्यक्तमूर्तये नमः ।
ॐ अमूर्तिमते नमः ।
ॐ शैलेन्द्रतनुजोत्सङ्गखेलनोत्सुकमानसाय नमः ।
ॐ स्वलावण्यसुधासारजितमन्मथविग्रहाय नमः ।
ॐ समस्तजगदाधाराय नमः ।
ॐ मायिने नमः ।
ॐ मूषकवाहनाय नमः ।
ॐ रमार्चिताय नमः ।
ॐ विधये नमः ।
ॐ श्रीकण्ठाय नमः ।
ॐ विबुधेश्वराय नमः ।
ॐ चिन्तामणिद्वीपपतये नमः ।
ॐ परमात्मने नमः ।
ॐ गजाननाय नमः ।
ॐ हृष्टाय नमः ।
ॐ तुष्टाय नमः ।
ॐ प्रसन्नात्मने नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदायकाय नमः ।
॥ इति श्री विघ्नेश्वर अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णम् ॥
श्री विघ्नेश्वर अष्टोत्तरशतनामावली — विस्तृत परिचय एवं दार्शनिक स्वरूप (Introduction)
श्री विघ्नेश्वर अष्टोत्तरशतनामावली (Sri Vighneshwara Ashtottara Shatanamavali) भगवान गणेश के उस प्रचंड और जाग्रत स्वरूप की वंदना है, जिसे "बाधाओं का स्वामी" कहा जाता है। हिंदू अध्यात्म में "विघ्नेश्वर" नाम का गूढ़ अर्थ है — "वह जो विघ्नों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है"। वे केवल विघ्न हरने वाले ही नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए विघ्न उत्पन्न करने वाले भी हैं जो अधर्म और अहंकार के पथ पर चलते हैं। यह नामावली १०८ दिव्य नामों का एक ऐसा शक्तिशाली संग्रह है जो साधक के जीवन के भौतिक, दैविक और आध्यात्मिक अवरोधों को समूल नष्ट करने की सामर्थ्य रखती है। किसी भी वैदिक अनुष्ठान का शुभारंभ "विघ्नेश्वर" की अनुमति के बिना संभव नहीं माना जाता।
पौराणिक संदर्भों, विशेष रूप से मुद्गल पुराण के अनुसार, भगवान गणेश ने "विघ्नेश्वर" अवतार "विघ्नाससुर" नामक राक्षस के अहंकार को चूर करने के लिए लिया था। कथा के अनुसार, राजा अभिनंदन ने इंद्र के पद की लालसा में एक विशाल यज्ञ किया। इंद्र ने भयभीत होकर यज्ञ को खंडित करने के लिए "विघ्न" नामक एक भयानक असुर को जन्म दिया। वह असुर इतना शक्तिशाली हो गया कि उसने समस्त ब्रह्मांड में यज्ञ-अनुष्ठान और शुभ कार्यों को पूरी तरह रोक दिया। तब देवताओं ने भगवान गणेश की शरण ली। गणेश जी ने विघ्नेश्वर रूप में प्रकट होकर उस असुर का दमन किया। पराजित होने पर विघ्नाससुर ने भगवान के चरणों में आत्मसमर्पण किया और प्रार्थना की कि उसका नाम सदैव भगवान के साथ जुड़ा रहे। तभी से गणेश जी "विघ्नेश्वर" कहलाए और महाराष्ट्र के ओझर (Ozar) में उनका मंदिर अष्टविनायक (Ashtavinayak) के सातवें सिद्धपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।
दार्शनिक रूप से, विघ्नेश्वर का स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में आने वाली बाधाएं वास्तव में हमारी परीक्षा और विकास के सोपान हैं। नामावली के नाम जैसे "विनायक" (विशिष्ट नायक), "गणाध्यक्ष" (समूहों के स्वामी) और "भक्तविघ्नविनाशनाय" (भक्तों के दुखों को हरने वाले) उनके विराट व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को प्रकाशित करते हैं। इस पाठ के दौरान जब हम प्रत्येक नाम के आरंभ में ॐ (ब्रह्मांडीय नाद) और अंत में नमः (समर्पण) जोड़ते हैं, तो एक विशिष्ट "साउंड वाइब्रेशन" उत्पन्न होता है। यह कंपन हमारे शरीर के 'मूलाधार चक्र' को जाग्रत करता है, जिससे साधक को कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रखर बुद्धि और धैर्य प्राप्त होता है।
वर्तमान युग की जटिलताओं, जैसे करियर में तनाव, विवाह में अड़चन और मानसिक अशांति के बीच, श्री विघ्नेश्वर नामावली का पाठ एक "अभेद कवच" की तरह कार्य करता है। बिना किसी अंक (Numbers) के प्रवाह के साथ इन नामों का जप करना ध्यान की एक उच्चतम अवस्था है। यह पाठ साधक को बाहरी विघ्नों के साथ-साथ उसके भीतर छिपे काम, क्रोध और लोभ जैसे आंतरिक शत्रुओं पर भी विजय दिलाता है। प्रत्येक नाम भगवान के एक विशिष्ट गुण का आह्वान है, जो भक्त को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर सफलता और आत्म-साक्षात्कार के प्रकाश की ओर ले जाता है।
विशिष्ट महत्व एवं ओझर धाम की महिमा (Significance)
विघ्नेश्वर नामावली का महत्व इसलिए भी अद्वितीय है क्योंकि यह "अष्टविनायक" के जाग्रत तीर्थ 'ओझर' (महाराष्ट्र) की ऊर्जा को समाहित किए हुए है। मान्यता है कि ओझर में भगवान विघ्नेश्वर की मूर्ति की आँखों और नाभि में हीरे जड़े हैं, जो उनके तेज और ऐश्वर्य का प्रतीक हैं। इस नामावली का नियमित पाठ करने से वही पुण्य फल मिलता है जो प्रत्यक्ष ओझर धाम की यात्रा और वहाँ अभिषेक करने से प्राप्त होता है।
इस नामावली में "एकदन्ताय" नाम यह बोध कराता है कि भगवान ने अपनी शक्ति का उपयोग अज्ञानता का संहार करने के लिए किया। "सिद्धिबुद्धिप्रदाय" नाम सुनिश्चित करता है कि साधक को न केवल भौतिक सफलता (सिद्धि) मिलेगी, बल्कि उसे संभालने का विवेक (बुद्धि) भी प्राप्त होगा। केतु और मंगल ग्रह के दोषों के कारण कार्यों में होने वाले विलंब को दूर करने के लिए यह नामावली सिद्ध औषधि मानी गई है।
फलश्रुति: नामावली पाठ के अभूतपूर्व लाभ (Benefits)
शास्त्रों और ऋषि-मुनियों के वचनों के अनुसार, श्री विघ्नेश्वर नामावली का श्रद्धापूर्वक पाठ निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:
- समस्त बाधाओं का शमन: "विघ्नराजाय" — विवाह में अड़चन, नौकरी में बाधा या व्यापारिक मंदी को दूर करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।
- नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: "प्रमत्तदैत्यभयदाय" — यह नामावली शत्रुओं के कुचक्रों, बुरी नजर और नकारात्मक तांत्रिक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करती है।
- मानसिक शांति और निर्भयता: "वीतभयाय" — इसके नियमित जप से चिंता (Anxiety) और अज्ञात भय समाप्त होता है और आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
- आरोग्य और दीर्घायु: "अव्ययाय" — यह नामावली साधक के शारीरिक और मानसिक कष्टों को नष्ट कर उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है।
- विद्या और बुद्धि का विकास: "वाणीप्रदायकाय" — छात्रों के लिए यह एकाग्रता बढ़ाने और परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रामबाण है।
पाठ विधि एवं अर्चना विधान (Ritual Method)
भगवान विघ्नेश्वर की साधना सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावी है। अर्चना विधि से इसे करने पर शीघ्र फल प्राप्त होता है:
पूजा के मुख्य चरण:
- समय और दिन: प्रातःकाल सूर्योदय के समय या संध्या वंदन काल में। मंगलवार (Tuesday) और प्रत्येक मास की संकष्टी चतुर्थी इसके लिए विशेष शुभ दिन हैं।
- शुद्धि: स्नान के पश्चात लाल या पीले वस्त्र पहनकर पूजा में बैठें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- दूर्वा अर्पण: "ॐ दूर्वाबिल्वप्रियाय नमः" — प्रत्येक नाम के बाद भगवान को एक 'दूर्वा' (घास) या पीला अक्षत अर्पित करें। उन्हें २१ दूर्वा चढ़ाना विशेष मंगलकारी है।
- नैवेद्य: भगवान को गुड़, मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएँ।
- संकल्प: पाठ प्रारंभ करने से पहले अपनी विशिष्ट बाधा के निवारण हेतु हाथ में जल लेकर संकल्प अवश्य लें।
विशेष मनोकामना हेतु:
- कार्य सिद्धि के लिए: २१ दिनों तक लगातार १०८ नामों के साथ भगवान विघ्नेश्वर को सिंदूर अर्पित करने से असाध्य कार्य भी सिद्ध होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. 'विघ्नेश्वर' नाम का क्या महत्व है?
विघ्नेश्वर का अर्थ है "विघ्नों के ईश्वर"। यह नाम दर्शाता है कि भगवान गणेश बाधाओं को उत्पन्न करने और उन्हें पूर्णतः समाप्त करने की सर्वोच्च सत्ता रखते हैं।
2. क्या इस नामावली का संबंध अष्टविनायक से है?
हाँ, महाराष्ट्र के ओझर में स्थित "श्री विघ्नेश्वर" मंदिर अष्टविनायक का सातवां मुख्य स्थान है। यह नामावली उसी जाग्रत स्वरूप की उपासना है।
3. बाधाओं को दूर करने के लिए कौन सा नाम सबसे शक्तिशाली है?
पूरी नामावली प्रभावी है, परन्तु विशेष रूप से "ॐ विघ्नराजाय नमः" और "ॐ भक्तविघ्नविनाशनाय नमः" का जप अवरोधों को नष्ट करने में अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
4. क्या नामावली पाठ में 'ॐ' लगाना अनिवार्य है?
जी हाँ, ॐ समस्त ब्रह्मांड की मूल ध्वनि है। किसी भी नाम के साथ ॐ जोड़ने से उसकी मंत्र शक्ति जाग्रत हो जाती है और फल शीघ्र मिलता है।
5. क्या इस पाठ में अंकों (Numbers) का उपयोग करना चाहिए?
मंत्र शास्त्र के अनुसार, नामावली का सस्वर पाठ या अर्चना करते समय अंकों के बिना निरंतरता बनाए रखना श्रेष्ठ है, ताकि ध्वनि का कंपन (Vibration) अखंड बना रहे।
6. क्या विवाह में आ रही रुकावटों के लिए यह पाठ सहायक है?
निश्चित रूप से। सकाम भक्ति में विघ्नेश्वर की अर्चना विवाह, संतान और पारिवारिक मंगल कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए सुविख्यात है।
7. विनायक और विघ्नेश्वर में क्या अंतर है?
विनायक का अर्थ है "विशिष्ट नायक" (सर्वोच्च गुरु), जबकि विघ्नेश्वर का विशेष कार्य "बाधाओं को नियंत्रित करने वाली सत्ता" है। तात्विक रूप से दोनों एक ही हैं।
8. 'विघ्नाससुर' वध की कथा क्या है?
मुद्गल पुराण के अनुसार, विघ्नाससुर ने देवताओं के यज्ञों को रोक दिया था। भगवान गणेश ने विघ्नेश्वर अवतार लेकर उसे पराजित किया, जिसके बाद वह भगवान का सेवक बन गया।
9. क्या बच्चे भी इस नामावली का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, इससे बच्चों की बुद्धि तीव्र होती है और उनमें एकाग्रता बढ़ती है। विद्यार्थियों के लिए "सिद्धिबुद्धिप्रदाय" नाम का जप विशेष फलदायी है।
10. पाठ के दौरान किस रंग के वस्त्र पहनना शुभ है?
भगवान गणेश को लाल और पीला रंग प्रिय है। इन रंगों के वस्त्र पहनकर पूजा करना सकारात्मकता और शीघ्र फल प्राप्ति में सहायक होता है।