Sri Rama Ashtottara Shatanamavali – श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली

॥ श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली ॥
॥ नामावली ॥
१. ओं श्रीरामाय नमः ।
२. ओं रामभद्राय नमः ।
३. ओं रामचन्द्राय नमः ।
४. ओं शाश्वताय नमः ।
५. ओं राजीवलोचनाय नमः ।
६. ओं श्रीमते नमः ।
७. ओं राजेन्द्राय नमः ।
८. ओं रघुपुङ्गवाय नमः ।
९. ओं जानकीवल्लभाय नमः ।
१०. ओं जैत्राय नमः ।
११. ओं जितामित्राय नमः ।
१२. ओं जनार्दनाय नमः ।
१३. ओं विश्वामित्रप्रियाय नमः ।
१४. ओं दान्ताय नमः ।
१५. ओं शरणत्राणतत्पराय नमः ।
१६. ओं वालिप्रमथनाय नमः ।
१७. ओं वाग्मिने नमः ।
१८. ओं सत्यवाचे नमः ।
१९. ओं सत्यविक्रमाय नमः ।
२०. ओं सत्यव्रताय नमः ।
२१. ओं व्रतधराय नमः ।
२२. ओं सदाहनुमदाश्रिताय नमः ।
२३. ओं कौसलेयाय नमः ।
२४. ओं खरध्वंसिने नमः ।
२५. ओं विराधवधपण्डिताय नमः ।
२६. ओं विभीषणपरित्रात्रे नमः ।
२७. ओं हरकोदण्डखण्डनाय नमः ।
२८. ओं सप्ततालप्रभेत्रे नमः ।
२९. ओं दशग्रीवशिरोहराय नमः ।
३०. ओं जामदग्न्यमहादर्पदलनाय नमः ।
३१. ओं ताटकान्तकाय नमः ।
३२. ओं वेदान्तसाराय नमः ।
३३. ओं वेदात्मने नमः ।
३४. ओं भवरोगस्य भेषजाय नमः ।
३५. ओं दूषणत्रिशिरोहन्त्रे नमः ।
३६. ओं त्रिमूर्तये नमः ।
३७. ओं त्रिगुणात्मकाय नमः ।
३८. ओं त्रिविक्रमाय नमः ।
३९. ओं त्रिलोकात्मने नमः ।
४०. ओं पुण्यचारित्रकीर्तनाय नमः ।
४१. ओं त्रिलोकरक्षकाय नमः ।
४२. ओं धन्विने नमः ।
४३. ओं दण्डकारण्यकर्तनाय नमः ।
४४. ओं अहल्याशापशमन नमः ।
४५. ओं पितृभक्ताय नमः ।
४६. ओं वरप्रदाय नमः ।
४७. ओं जितेन्द्रियाय नमः ।
४८. ओं जितक्रोधाय नमः ।
४९. ओं जगद्गुरवे नमः ।
५०. ओं ऋक्षवानरसङ्घातिने नमः ।
५१. ओं चित्रकूटसमाश्रयाय नमः ।
५२. ओं जयन्तत्राणवरदाय नमः ।
५३. ओं सुमित्रापुत्रसेविताय नमः ।
५४. ओं सर्वदेवादिदेवाय नमः ।
५५. ओं मृतवानरजीवनाय नमः ।
५६. ओं मायामारीचहन्त्रे नमः ।
५७. ओं महादेवाय नमः ।
५८. ओं महाभुजाय नमः ।
५९. ओं सर्वदेवस्तुताय नमः ।
६०. ओं सौम्याय नमः ।
६१. ओं ब्रह्मण्याय नमः ।
६२. ओं मुनिसंस्तुताय नमः ।
६३. ओं महायोगिने नमः ।
६४. ओं महोदाराय नमः ।
६५. ओं सुग्रीवेप्सितराज्यदाय नमः ।
६६. ओं सर्वपुण्याधिकफलाय नमः ।
६७. ओं स्मृतसर्वाघनाशनाय नमः ।
६८. ओं आदिपुरुषाय नमः ।
६९. ओं परमपुरुषाय नमः ।
७०. ओं महापुरुषाय नमः ।
७१. ओं पुण्योदयाय नमः ।
७२. ओं दयासाराय नमः ।
७३. ओं पुराणाय नमः ।
७४. ओं पुरुषोत्तमाय नमः ।
७५. ओं स्मितवक्त्राय नमः ।
७६. ओं मितभाषिणे नमः ।
७७. ओं पूर्वभाषिणे नमः ।
७८. ओं राघवाय नमः ।
७९. ओं अनन्तगुणगम्भीराय नमः ।
८०. ओं धीरोदात्तगुणोत्तमाय नमः ।
८१. ओं मायामानुषचारित्राय नमः ।
८२. ओं महादेवादिपूजिताय नमः ।
८३. ओं सेतुकृते नमः ।
८४. ओं जितवाराशये नमः ।
८५. ओं सर्वतीर्थमयाय नमः ।
८६. ओं हरये नमः ।
८७. ओं श्यामाङ्गाय नमः ।
८८. ओं सुन्दराय नमः ।
८९. ओं शूराय नमः ।
९०. ओं पीतवाससे नमः ।
९१. ओं धनुर्धराय नमः ।
९२. ओं सर्वयज्ञाधिपाय नमः ।
९३. ओं यज्विने नमः ।
९४. ओं जरामरणवर्जिताय नमः ।
९५. ओं विभीषणप्रतिष्ठात्रे नमः ।
९६. ओं सर्वापगुणवर्जिताय नमः ।
९७. ओं परमात्मने नमः ।
९८. ओं परस्मै ब्रह्मणे नमः ।
९९. ओं सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः ।
१००. ओं परस्मै ज्योतिषे नमः ।
१०१. ओं परस्मै धाम्ने नमः ।
१०२. ओं पराकाशाय नमः ।
१०३. ओं परात्पराय नमः ।
१०४. ओं परेशाय नमः ।
१०५. ओं पारगाय नमः ।
१०६. ओं पाराय नमः ।
१०७. ओं सर्वदेवात्मकाय नमः ।
१०८. ओं परस्मै नमः ।
॥ इति श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णम् ॥
श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली — विस्तृत परिचय एवं दार्शनिक महत्व (Introduction)
श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली (Sri Rama Ashtottara Shatanamavali) सनातन धर्म के सबसे पवित्र और प्रभावशाली पाठों में से एक है। यह नामावली भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान श्री राम के १०८ दिव्य नामों का संग्रह है। 'अष्टोत्तर' का अर्थ है आठ अधिक और 'शत' का अर्थ है सौ, अर्थात १०८ नाम। भारतीय संस्कृति में १०८ की संख्या ब्रह्मांडीय चेतना और पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है। भगवान राम केवल एक ऐतिहासिक नायक नहीं, बल्कि 'मर्यादा पुरुषोत्तम' हैं, जिन्होंने मानव रूप में जन्म लेकर धर्म की सूक्ष्म सीमाओं का पालन कर एक आदर्श प्रस्तुत किया।
इस नामावली के प्रत्येक नाम में भगवान राम के जीवन की एक विशिष्ट घटना, उनकी शक्ति या उनके गुण का सूक्ष्म वर्णन मिलता है। जैसे "जानकीवल्लभाय" (माता सीता के प्रिय), "राजीवलोचनाय" (कमल के समान नेत्रों वाले), और "दशग्रीवशिरोहराय" (रावण के दसों सिरों को काटने वाले)। इन नामों का पाठ करना रामकथा के सार को आत्मसात करने जैसा है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस जैसे महाकाव्यों के अनुसार, राम नाम की महिमा स्वयं भगवान शिव भी गाते हैं। काशी के बारे में मान्यता है कि वहाँ स्वयं महादेव मृत्यु के समय जीव के कान में 'राम' नाम फूँकते हैं, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान राम का व्यक्तित्व 'सत्य' और 'त्याग' पर टिका है। जहाँ अन्य अवतारों ने अपनी लीलाओं में योग और माया का प्रचुर उपयोग किया, वहीं श्री राम ने एक सामान्य मनुष्य की भांति कष्ट सहकर अधर्म का नाश किया। यही कारण है कि उनकी नामावली का पाठ मनुष्य को धैर्य और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। कलयुग के इस अशांत वातावरण में, जहाँ मानसिक अवसाद और भ्रम की स्थिति बनी रहती है, वहाँ श्री राम के इन १०८ नामों का जप एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच (Aura Protection) की भाँति कार्य करता है। यह नामावली साधक को केवल भौतिक लाभ नहीं देती, बल्कि उसे 'आत्मानन्द' की ओर अग्रसर करती है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, श्री राम के १०८ नाम सूर्य की १०८ कलाओं के समान तेजस्वी हैं। चूँकि राम 'सूर्यवंश' में उत्पन्न हुए थे, इसलिए इन नामों का जप करने से साधक की कुण्डलिनी शक्ति में 'पिंगला नाड़ी' (सूर्य नाड़ी) का शोधन होता है, जिससे आत्मविश्वास और ओज में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व (Significance of Chanting)
श्री राम नामावली का महत्व केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे भावों की अनुभूति है। 'राम' शब्द दो अक्षरों से बना है — 'रा' और 'म'। 'रा' अग्नि बीज है जो पापों को जलाता है और 'म' अमृत बीज है जो मन को शीतलता प्रदान करता है। जब हम १०८ नामों का जप करते हैं, तो हम भगवान राम के पूरे जीवन चरित्र की मानसिक प्रदक्षिणा करते हैं।
यह नामावली 'विष्णु सहस्रनाम' का ही लघु और सघन रूप मानी जाती है। पद्म पुराण में उल्लेख है कि भगवान राम का एक नाम जपना अन्य देवताओं के एक हजार नामों के बराबर है। जो साधक अपनी वाणी में दोष या संकोच महसूस करते हैं, उनके लिए "वाग्मिने नमः" और "सत्यवाचे नमः" जैसे नामों का जप अमोघ औषधि की तरह कार्य करता है।
फलश्रुति: पाठ के चमत्कारी लाभ (Benefits from Phala Shruti)
शास्त्रों और ऋषि-मुनियों के अनुसार, श्रद्धापूर्वक श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करने से निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं:
- पाप मुक्ति (Destruction of Sins): "स्मृतसर्वाघनाशनाय" — श्री राम का स्मरण मात्र सभी ज्ञात और अज्ञात पापों का नाश कर देता है। संचित कर्मों के बंधन ढीले होने लगते हैं।
- मानसिक शांति और स्पष्टता: इसके नियमित जप से मन के विक्षेप (Anxiety) दूर होते हैं और साधक को 'सच्चिदानन्द' की अनुभूति होती है।
- भय और शत्रु नाश: "जितक्रोधाय" और "शूराय" जैसे नामों के प्रभाव से साधक निर्भय बनता है। यह पाठ अदृश्य नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
- धर्म और न्याय की प्राप्ति: यदि आप किसी कानूनी विवाद या पारिवारिक कलह में फँसे हैं, तो राम नामावली का पाठ न्याय दिलाने में सहायक होता है।
- आरोग्य लाभ: "भवरोगस्य भेषजाय" — भगवान राम स्वयं संसार रूपी रोगों की औषधि हैं। यह पाठ शारीरिक व्याधियों को दूर कर लंबी आयु प्रदान करता है।
पाठ विधि एवं विशेष अवसर (Ritual Method & Special Occasions)
नामावली का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए विधि विधान का पालन करना आवश्यक है। यद्यपि भगवान राम केवल भाव के भूखे हैं, फिर भी शास्त्रीय पद्धति ऊर्जा को केंद्रित करने में मदद करती है।
साधना के नियम:
- समय: सर्वोत्तम समय 'ब्रह्म मुहूर्त' (प्रातः ४ से ६ बजे) है। सायंकाल संध्या वंदन के समय भी इसका पाठ फलदायी है।
- वस्त्र और आसन: श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें। कुश के आसन या पीली ऊनी कंबल पर बैठकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
- ध्यान: पाठ से पूर्व भगवान राम के 'कोदंडधारी' (धनुष लिए हुए) या 'राम दरबार' का चित्र हृदय में अंकित करें।
- अर्पण: १०८ नामों के साथ तुलसी के दल (पत्ते) भगवान के चरणों में अर्पित करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। तुलसी के अभाव में पीले अक्षत या पुष्पों का प्रयोग करें।
विशेष अवसर:
- राम नवमी: चैत्र मास की राम नवमी पर सामूहिक पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
- हनुमान जयंती: चूँकि हनुमान जी राम के अनन्य भक्त हैं, अतः इस दिन पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- एकादशी: प्रत्येक एकादशी को नामावली का पाठ करने से विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
शास्त्रों के अनुसार 'प्रातः काल' (सूर्योदय से पूर्व) पाठ करना सर्वोत्तम है। यदि समय का अभाव हो, तो संध्या काल में दीप जलाकर भी पाठ किया जा सकता है।
2. क्या इस नामावली का पाठ महिलाएं भी कर सकती हैं?
जी हाँ, भगवान राम के द्वार सबके लिए खुले हैं। महिलाएं पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ इन नामों का पाठ कर सकती हैं।
3. क्या बिना संस्कृत जाने केवल अर्थ पढ़कर लाभ मिल सकता है?
हाँ, भक्ति में 'भाव' सर्वोपरि है। यदि आप संस्कृत नहीं पढ़ सकते, तो आप इनके हिंदी अर्थ का श्रवण या पठन कर सकते हैं। ध्वनि ऊर्जा के लिए संस्कृत का उच्चारण श्रेष्ठ है, पर फल भाव से ही मिलता है।
4. १०८ नामों का जप करते समय किस माला का प्रयोग करें?
भगवान राम विष्णु के अवतार हैं, इसलिए तुलसी की माला (Tulsi Mala) सबसे उपयुक्त है। चंदन की माला का भी प्रयोग किया जा सकता है।
5. क्या नामावली का पाठ करने से शत्रु बाधा दूर होती है?
जी, नामावली में "खरध्वंसिने" और "जितवाराशये" जैसे नाम हैं जो वीरता के प्रतीक हैं। यह साधक के शत्रुओं का दमन करती है और उसे निर्भीक बनाती है।
6. घर में राम नामावली का हवन कैसे करें?
प्रत्येक नाम के अंत में 'नमः' के बाद 'स्वाहा' जोड़कर (जैसे- ओं श्रीरामाय स्वाहा) हवन कुंड में आहुति दें। इससे घर का शुद्धिकरण होता है।
7. 'मर्यादा पुरुषोत्तम' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है वह पुरुष जो मर्यादाओं (सीमाओं) में रहकर भी उत्तम है। श्री राम ने पुत्र, पति, राजा और भाई की हर मर्यादा का पालन किया, इसलिए उन्हें यह नाम दिया गया।
8. क्या यह पाठ बच्चों को भी सिखाना चाहिए?
अवश्य। इससे बच्चों में अच्छे संस्कार, एकाग्रता और धैर्य का विकास होता है। राम के नाम उनके चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं।
9. नामावली का पाठ करते समय किन बातों का परहेज करें?
पाठ के दौरान सात्विक आहार लें, मांस-मदिरा से बचें और मन में किसी के प्रति द्वेष या ईर्ष्या न रखें।
10. क्या राम नाम जप से मानसिक तनाव (Stress) कम होता है?
विद्वानों का मानना है कि 'राम' शब्द का उच्चारण मस्तिष्क के स्नायु तंत्र को शांत करता है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर गिरता है और तनाव कम होता है।