Sri Maha Sastha Ashtottara Shatanamavali – श्री महाशास्तृ अष्टोत्तरशतनामावली

॥ श्री महाशास्तृ अष्टोत्तरशतनामावली ॥
॥ नामावली ॥
ॐ महाशास्तृ नमः ।
ॐ विश्वशास्तृ नमः ।
ॐ लोकशास्तृ नमः ।
ॐ महाबलाय नमः ।
ॐ धर्मशास्तृ नमः ।
ॐ वेदशास्तृ नमः ।
ॐ कालशास्तृ नमः ।
ॐ गजाधिपाय नमः ।
ॐ तुराय नमः ।
ॐ शूलधराय नमः । ॥ १० ॥
ॐ धनुर्हस्ताय नमः ।
ॐ अनामयाय नमः ।
ॐ रैवताद्रिवासिने नमः ।
ॐ रक्ताक्षाय नमः ।
ॐ ईश्वराय नमः ।
ॐ विगुणे नमः ।
ॐ महातेजसे नमः ।
ॐ योगीशाय नमः ।
ॐ भक्तवत्सलाय नमः ।
ॐ परमेष्ठिने नमः । ॥ २० ॥
ॐ पूर्णाय नमः ।
ॐ पुष्पायाय नमः ।
ॐ पुष्कलेशाये नमः ।
ॐ परात्पराय नमः ।
ॐ आदिमूर्ते नमः ।
ॐ मन्त्ररूपाय नमः ।
ॐ ओंकाराय नमः ।
ॐ चतुर्मुखाय नमः ।
ॐ सर्वदेवाय नमः ।
ॐ सर्वज्ञाय नमः । ॥ ३० ॥
ॐ सर्वदुःखविनाशनाय नमः ।
ॐ सर्वत्रात्रे नमः ।
ॐ सर्वभोक्रे नमः ।
ॐ सर्वदात्रे नमः ।
ॐ महेश्वराय नमः ।
ॐ शरण्येशाय नमः ।
ॐ सर्वसाक्षिणे नमः ।
ॐ शर्वाय नमः ।
ॐ सर्वजिते नमः ।
ॐ शास्त्ररूपाय नमः । ॥ ४० ॥
ॐ शम्बरारिणे नमः ।
ॐ सर्वतन्त्रफलप्रदाय नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ।
ॐ सर्ववरप्रदाय नमः ।
ॐ सर्वाभीष्टप्रदाय नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलदाय नमः ।
ॐ सर्वक्लेशहराय नमः ।
ॐ सर्वसौभाग्यदाय नमः ।
ॐ सर्वव्याधिहराय नमः ।
ॐ सर्वपापहराय नमः । ॥ ५० ॥
ॐ सर्वशत्रुविनाशनाय नमः ।
ॐ सर्वभयहराय नमः ।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदाय नमः ।
ॐ सर्वराजवशङ्कराय नमः ।
ॐ सर्वलोकवशङ्कराय नमः ।
ॐ सर्वजनवशङ्कराय नमः ।
ॐ सर्वभूतवशङ्कराय नमः ।
ॐ सर्वदेववशङ्कराय नमः ।
ॐ सर्वदोषहराय नमः ।
ॐ सर्वविघ्नविनाशनाय नमः । ॥ ६० ॥
ॐ मकरसंक्रान्तिपूजिताय नमः ।
ॐ मन्त्रमूर्तिस्वरूपाय नमः ।
ॐ मन्त्रसिद्धिप्रदाय नमः ।
ॐ महायोगिने नमः ।
ॐ महाभोगिने नमः ।
ॐ महावीराय नमः ।
ॐ महाप्रभुवे नमः ।
ॐ महाज्ञानिने नमः ।
ॐ महाशक्ताय नमः ।
ॐ महाकीर्तये नमः । ॥ ७० ॥
ॐ महाद्युतये नमः ।
ॐ महागौरये नमः ।
ॐ महासेव्याय नमः ।
ॐ महोत्साहाय नमः ।
ॐ महागुणाय नमः ।
ॐ महाधनाय नमः ।
ॐ महानेत्राय नमः ।
ॐ महापाशाय नमः ।
ॐ महाङ्कुशाय नमः ।
ॐ महादण्डाय नमः । ॥ ८० ॥
ॐ महाशूलाय नमः ।
ॐ महाधनुषे नमः ।
ॐ महाचक्राय नमः ।
ॐ महाशङ्खाय नमः ।
ॐ महानादाय नमः ।
ॐ महागदाय नमः ।
ॐ महाखड्गाय नमः ।
ॐ महाखेताय नमः ।
ॐ महावज्राय नमः ।
ॐ महाशक्तये नमः । ॥ ९० ॥
ॐ महादंष्ट्राय नमः ।
ॐ महाकायाय नमः ।
ॐ महासेनाय नमः ।
ॐ महामूर्ते नमः ।
ॐ महेश्वराय नमः ।
ॐ हरिहरपुत्राय नमः ।
ॐ मोहिनीसुताय नमः ।
ॐ शबरीगिरीशाय नमः ।
ॐ मणिकण्ठाय नमः ।
ॐ कलिपावनरूपाय नमः । ॥ १०० ॥
ॐ अद्वैतमूर्तये नमः ।
ॐ ब्रह्मनिष्ठाय नमः ।
ॐ पम्पातीरविहारिणे नमः ।
ॐ व्याघ्रवाहनारूढाय नमः ।
ॐ पन्दलराजकुमाराय नमः ।
ॐ प्रणतार्तिहराय नमः ।
ॐ सत्यसन्धाय नमः ।
ॐ भगवान् श्री सत्यसायि रूपाय नमः ।
॥ इति श्री महाशास्तृ अष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णम् ॥
श्री महाशास्तृ अष्टोत्तरशतनामावली — विस्तृत परिचय एवं कलयुग अवतार महिमा (Introduction)
श्री महाशास्तृ अष्टोत्तरशतनामावली (Sri Maha Sastha Ashtottara Shatanamavali) सनातन धर्म के उन रहस्यमयी और शक्तिशाली पाठों में से एक है, जो शिव (शैव) और विष्णु (वैष्णव) परंपराओं के सुंदर संगम को दर्शाता है। भगवान महाशास्तृ, जिन्हें लोक भाषा में भगवान अय्यप्पा या धर्म शास्ता कहा जाता है, साक्षात् महादेव और भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप के पुत्र हैं। इसी कारण उन्हें "हरिहरपुत्र" भी कहा जाता है। कलयुग के इस अशांत समय में, जहाँ मनुष्य मानसिक और बाहरी संघर्षों से घिरा हुआ है, भगवान शास्ता को एक "जाग्रत देव" माना गया है। केरल के सबरीमाला पर्वत पर उनका दिव्य निवास स्थान करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुरों के अत्याचार और महिषी (भैंस रूपी राक्षसी) के विनाश के लिए भगवान शिव और विष्णु की संयुक्त ऊर्जा से महाशास्तृ का प्रादुर्भाव हुआ। उनका जन्म केवल राक्षसों के संहार के लिए नहीं, बल्कि मनुष्यों को अनुशासन, सत्य और समता का पाठ पढ़ाने के लिए हुआ था। इस अष्टोत्तरशतनामावली के १०८ नामों में भगवान के उन सभी गुणों का वर्णन मिलता है जो उन्हें अद्वितीय बनाते हैं। जैसे "विश्वशास्तृ नमः" उन्हें ब्रह्मांड के शिक्षक के रूप में प्रतिष्ठित करता है, तो "शबरीगिरीशाय नमः" उन्हें सबरी पर्वत के स्वामी के रूप में दर्शाता है। ये १०८ नाम वास्तव में १०८ तांत्रिक और आध्यात्मिक बीज हैं, जिनका पाठ साधक के प्रारब्ध कर्मों के कुप्रभावों को नष्ट करने की शक्ति रखता है।
दार्शनिक रूप से, भगवान अय्यप्पा "ब्रह्मचर्य" और "योग" की उच्चतम अवस्था के प्रतीक हैं। सबरीमाला मंदिर का महावाक्य "तत्त्वमसि" (वह तुम ही हो) यह संदेश देता है कि जीव और ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है। शास्ता नामावली का अर्चन करते समय जब हम प्रत्येक नाम के आरंभ में ॐ और अंत में "नमः" जोड़ते हैं, तो वह नाम एक जाग्रत मंत्र बन जाता है। ज्योतिष शास्त्र में भगवान शास्ता को शनि ग्रह (Saturn) का अधिपति माना गया है। मान्यता है कि शनि के साढ़ेसाती या ढैया के दोषों से मुक्ति के लिए शास्ता नामावली का पाठ अमोघ है। यह पाठ न केवल वाणी को शुद्ध करता है, बल्कि जातक के आभा मंडल (Aura) को इतना ऊर्जावान बना देता है कि नकारात्मक शक्तियाँ और बुरी नजर उसे स्पर्श भी नहीं कर पातीं।
वर्तमान कलयुग के चुनौतीपूर्ण वातावरण में, जहाँ एकाग्रता का अभाव और मानसिक अशांति सामान्य है, श्री महाशास्तृ नामावली का पाठ एक "अभय कवच" की तरह कार्य करता है। भगवान के नेत्रों की अग्नि ("ॐ रक्ताक्षाय नमः") अज्ञान के अंधकार को भस्म कर देती है, और उनका "मणिकण्ठ" (गले में मणि) स्वरूप जातक को तेज और बुद्धि प्रदान करता है। यह नामावली वास्तव में स्वयं को अनुशासित करने और ईश्वरीय प्रेम में डूबने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इन नामों का निरंतर अर्चन साधक को 'शास्ता' के सानिध्य में लाकर उसे संसार के समस्त दुखों से पार उतार देता है।
विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व एवं 'हरिहर' तत्व (Significance)
महाशास्तृ नामावली का महत्व इसलिए सर्वोपरि है क्योंकि यह शिव और विष्णु की शक्तियों का एकीकृत रूप है। यह नामावली साधक को यह बोध कराती है कि ईश्वर एक है और उसके विभिन्न स्वरूप केवल लीला मात्र हैं। तंत्र शास्त्र में भगवान शास्ता को "कलियुग वरद" माना गया है, अर्थात् कलयुग में वरदान देने वाले जाग्रत देवता।
विशेष रूप से मकर संक्रांति (Makar Jyothi) और मण्डला काल के दौरान इन नामों का अर्चन करना महापुण्यकारी माना गया है। "मन्त्रसिद्धिप्रदाय नमः" नाम यह स्पष्ट करता है कि उनके नाम जप से अन्य मंत्रों की सिद्धि भी सुलभ हो जाती है। यह पाठ उन लोगों के लिए अनिवार्य है जो संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक शक्ति की तलाश में हैं।
फलश्रुति: नामावली पाठ के अभूतपूर्व लाभ (Benefits)
शास्त्रों और भक्तों के व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर, श्री महाशास्तृ नामावली के अर्चन से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
- शनि दोष निवारण: शनि ग्रह की प्रतिकूलता को शांत करने और साढ़ेसाती के कष्टों को कम करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ पाठ है।
- शत्रु और बाधा विजय: "सर्वशत्रुविनाशनाय नमः" — विरोधियों के कुचक्रों और कार्यों में आने वाली रुकावटों का समूल नाश होता है।
- मानसिक शांति और निर्भयता: "सर्वभयहराय नमः" — १०८ नामों के जप से तनाव, चिंता और अज्ञात भयों से मुक्ति मिलती है।
- संतान और वंश वृद्धि: जो जातक संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए भगवान शास्ता की आराधना पुत्र-पौत्र प्रदाता मानी गई है।
- सर्व रोग निवारण: "सर्वव्याधिहराय नमः" — शारीरिक और मानसिक व्याधियों को दूर कर उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
पाठ विधि एवं अर्चना विधान (Ritual Method)
भगवान शास्ता "सत्य और नियम" के देवता हैं। पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाएँ:
साधना के नियम:
- समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात 'ब्रह्म मुहूर्त' सर्वश्रेष्ठ है। शनिवार और मकर संक्रांति का दिन विशेष फलदायी है।
- शुद्धि: स्नान के पश्चात काले (Black), नीले या केसरिया वस्त्र धारण करें। मुख पूर्व दिशा की ओर रखें।
- अर्चन सामग्री: १०८ नामों के साथ नीले फूल, इत्र, या विभूति भगवान के चित्र पर अर्पित करें।
- नैवेद्य: गुड़, नारियल, और घी का भोग लगाएँ। अय्यप्पा स्वामी को 'अरावण पायसम' अत्यंत प्रिय है।
- दीप: घी का दीपक जलाएँ और पूजा के दौरान "स्वामी शरणम् अय्यप्पा" का मानसिक जप करते रहें।
विशेष प्रयोग:
- संकट निवारण हेतु: मण्डला काल (४१ दिन) तक नित्य १०८ नामों का पाठ करते हुए मस्तक पर विभूति का तिलक लगाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भगवान महाशास्तृ या अय्यप्पा कौन हैं?
भगवान महाशास्तृ साक्षात् महादेव और भगवान विष्णु (मोहिनी अवतार) के पुत्र हैं। उन्हें कलयुग के रक्षक और धर्म के अधिष्ठाता माना जाता है।
2. इस नामावली का पाठ कब करना सर्वोत्तम है?
सूर्योदय के समय प्रातःकाल पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है। शनिवार (Saturday) इनका प्रिय दिन है, इस दिन पाठ करना विशेष फलदायी होता है।
3. 'मणिकण्ठ' नाम का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है — "वह जिनके गले (कण्ठ) में मणि सुशोभित है"। राजा पन्दलम को वे शिशु रूप में गले में मणि के साथ प्राप्त हुए थे, इसलिए उन्हें मणिकण्ठ कहा जाता है।
4. क्या इस नामावली का पाठ घर में किया जा सकता है?
हाँ, घर के पवित्र पूजा स्थान पर अय्यप्पा स्वामी के चित्र के सामने शुद्धता के साथ यह पाठ किया जा सकता है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
5. १०८ नामों से अर्चना करने की सही विधि क्या है?
प्रत्येक नाम के आरंभ में ॐ और अंत में नमः लगाकर (जैसे - ॐ महाशास्तृ नमः) भगवान पर पुष्प या अक्षत चढ़ाना ही अर्चना की सही विधि है।
6. शनि दोष के लिए यह पाठ क्यों प्रभावी है?
शास्त्रों के अनुसार, शनि देव ने भगवान शास्ता को वचन दिया था कि जो उनके नामों का जप करेगा, उसे शनि कभी कष्ट नहीं देंगे। इसीलिए शनि शांति के लिए यह अचूक है।
7. क्या स्त्रियाँ भी महाशास्तृ नामावली का पाठ कर सकती हैं?
निश्चित रूप से। भगवत भक्ति में कोई भेदभाव नहीं है। स्त्रियाँ भी पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ भगवान के इन १०८ नामों का जप कर सकती हैं।
8. पाठ के दौरान ॐ और नमः का क्या महत्व है?
ॐ ब्रह्मांड की आदि ध्वनि है और नमः पूर्ण शरणागति का भाव। इनके जुड़ने से नाम एक सिद्ध मंत्र बन जाता है।
9. 'धर्म शास्ता' का वास्तविक अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है — "वह जो धर्म का शासन करता है"। वे न्याय और सत्य की स्थापना करने वाले सर्वोच्च न्यायाधीश हैं।
10. क्या बच्चों के लिए यह पाठ लाभकारी है?
जी हाँ, इससे बच्चों में अनुशासन, साहस और एकाग्रता बढ़ती है। उन्हें "महाज्ञानिने नमः" जैसे नामों का पाठ करना चाहिए।