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Sri Bala Tripura Sundari Ashtottara Shatanamavali – श्री बालात्रिपुरसुन्दरी अष्टोत्तरशतनामावली

Sri Bala Tripura Sundari Ashtottara Shatanamavali – श्री बालात्रिपुरसुन्दरी अष्टोत्तरशतनामावली
ॐ कल्याण्यै नमः । ॐ त्रिपुरायै नमः । ॐ बालायै नमः । ॐ मायायै नमः । ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः । ॐ सुन्दर्यै नमः । ॐ सौभाग्यवत्यै नमः । ॐ क्लीङ्कार्यै नमः । ॐ सर्वमङ्गलायै नमः । ९ ॐ ह्रीङ्कार्यै नमः । ॐ स्कन्दजनन्यै नमः । ॐ परायै नमः । ॐ पञ्चदशाक्षर्यै नमः । ॐ त्रिलोक्यै नमः । ॐ मोहनायै नमः । ॐ अधीशायै नमः । ॐ सर्वेश्यै नमः । ॐ सर्वरूपिण्यै नमः । १८ ॐ सर्वसङ्क्षोभिण्यै नमः । ॐ पूर्णायै नमः । ॐ नवमुद्रेश्वर्यै नमः । ॐ शिवायै नमः । ॐ अनङ्गकुसुमायै नमः । ॐ ख्यातायै नमः । ॐ अनङ्गभुवनेश्वर्यै नमः । ॐ जप्यायै नमः । ॐ स्तव्यायै नमः । २७ ॐ श्रुत्यै नमः । ॐ नित्यायै नमः । ॐ नित्यक्लिन्नायै नमः । ॐ अमृतोद्भवायै नमः । ॐ मोहिन्यै नमः । ॐ परमायै नमः । ॐ आनन्दायै नमः । ॐ कामेश्यै नमः । ॐ तरुण्यै नमः । ३६ ॐ कलायै नमः । ॐ कलावत्यै नमः । ॐ भगवत्यै नमः । ॐ पद्मरागकिरीटिन्यै नमः । ॐ सौगन्धिन्यै नमः । ॐ सरिद्वेण्यै नमः । ॐ मन्त्रिण्यै नमः । ॐ मन्त्ररूपिण्यै नमः । ॐ तत्त्वत्रय्यै नमः । ४५ ॐ तत्त्वमय्यै नमः । ॐ सिद्धायै नमः । ॐ त्रिपुरवासिन्यै नमः । ॐ श्रियै नमः । ॐ मत्यै नमः । ॐ महादेव्यै नमः । ॐ कौलिन्यै नमः । ॐ परदेवतायै नमः । ॐ कैवल्यरेखायै नमः । ५४ ॐ वशिन्यै नमः । ॐ सर्वेश्यै नमः । ॐ सर्वमातृकायै नमः । ॐ विष्णुस्वस्रे नमः । ॐ देवमात्रे नमः । ॐ सर्वसम्पत्प्रदायिन्यै नमः । ॐ आधारायै नमः । ॐ हितपत्नीकायै नमः । ॐ स्वाधिष्ठानसमाश्रयायै नमः । ६३ ॐ आज्ञायै नमः । ॐ पद्मासनासीनायै नमः । ॐ विशुद्धस्थलसंस्थितायै नमः । ॐ अष्टत्रिंशत्कलामूर्त्यै नमः । ॐ सुषुम्नायै नमः । ॐ चारुमध्यमायै नमः । ॐ योगीश्वर्यै नमः । ॐ मुनिध्येयायै नमः । ॐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः । ७२ ॐ चतुर्भुजायै नमः । ॐ चन्द्रचूडायै नमः । ॐ पुराण्यै नमः । ॐ आगमरूपिण्यै नमः । ॐ ओङ्कारादये नमः । ॐ महाविद्यायै नमः । ॐ महाप्रणवरूपिण्यै नमः । ॐ भूतेश्वर्यै नमः । ॐ भूतमय्यै नमः । ८१ ॐ पञ्चाशद्वर्णरूपिण्यै नमः । ॐ षोढान्यासमहाभूषायै नमः । ॐ कामाक्ष्यै नमः । ॐ दशमातृकायै नमः । ॐ आधारशक्त्यै नमः । ॐ अरुणायै नमः । ॐ लक्ष्म्यै नमः । ॐ श्रीपुरभैरव्यै नमः । ॐ त्रिकोणमध्यनिलयायै नमः । ९० ॐ षट्कोणपुरवासिन्यै नमः । ॐ नवकोणपुरावासायै नमः । ॐ बिन्दुस्थलसमन्वितायै नमः । ॐ अघोरायै नमः । ॐ मन्त्रितपदायै नमः । ॐ भामिन्यै नमः । ॐ भवरूपिण्यै नमः । ॐ एतस्यै नमः । ॐ सङ्कर्षिण्यै नमः । ९९ ॐ धात्र्यै नमः । ॐ उमायै नमः । ॐ कात्यायन्यै नमः । ॐ शिवायै नमः । ॐ सुलभायै नमः । ॐ दुर्लभायै नमः । ॐ शास्त्र्यै नमः । ॐ महाशास्त्र्यै नमः । ॐ शिखण्डिन्यै नमः । १०८ इति श्री बालाष्टोत्तरशतनामावली । इतर पश्यतु ।

परिचय: 108 नामों का महत्व

श्री बालात्रिपुरसुन्दरी अष्टोत्तरशतनामावली बाला देवी के 108 सबसे शक्तिशाली नामों का संग्रह है। यह सहस्रनाम (1000 नाम) का संक्षिप्त सार है, जिसे व्यस्त गृहस्थ साधकों के लिए विशेष रूप से संकलित किया गया है। जहां सहस्रनाम का पाठ 45-60 मिनट लेता है, वहीं यह अष्टोत्तर मात्र 10-15 मिनट में पूर्ण हो जाता है।
108 की संख्या अत्यंत पवित्र है। सूर्य से पृथ्वी की दूरी सूर्य के व्यास का 108 गुना है। 108 उपनिषद हैं। जप माला में 108 मनके होते हैं। इस प्रकार, 108 नाम ब्रह्मांडीय सामंजस्य (Cosmic Harmony) का प्रतीक हैं।

विशिष्ट नामों का रहस्य

इस नामावली के कुछ नाम अत्यंत गहन अर्थ रखते हैं:

१. कल्याण्यै (प्रथम नाम):

पहला नाम 'कल्याणी' है, जो बाला के मूलभूत स्वभाव को दर्शाता है। वे समस्त प्राणियों का कल्याण (भला) करने वाली हैं। यह नाम साधक के जीवन में सौभाग्य और मंगल लाता है।

२. पञ्चदशाक्षर्यै (नाम 25):

'पञ्चदश अक्षरी' = 15 अक्षरों वाली। यह श्रीविद्या के पञ्चदशी मंत्र का संकेत है, जो तंत्र शास्त्र का सर्वोच्च मंत्र माना जाता है। बाला इस मंत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।

३. परब्रह्मस्वरूपिण्यै (नाम 72):

यह नाम सिद्ध करता है कि बाला कोई साधारण देवी नहीं, बल्कि स्वयं परब्रह्म (Ultimate Reality) का स्त्री रूप हैं। इस नाम की उपासना से मोक्ष प्राप्त होता है।

४. त्रिकोणमध्यनिलयायै (नाम 90):

बाला श्रीयंत्र के मध्य त्रिकोण में विराजमान हैं। यह त्रिकोण 'योनि पीठ' कहलाता है और सृष्टि का मूल है। इस नाम से श्रीयंत्र की पूजा का फल प्राप्त होता है।

फलश्रुति: 108 नामों के लाभ

नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
  • दैनिक सुरक्षा: प्रतिदिन पाठ से एक अदृश्य कवच का निर्माण होता है जो दुर्घटना, रोग और शत्रु बाधा से रक्षा करता है।
  • विद्या वृद्धि: 'महाविद्यायै' (97) और 'आज्ञायै' (82) जैसे नामों के प्रभाव से स्मरण शक्ति और बुद्धि तीव्र होती है।
  • वाक सिद्धि: बाला 'मन्त्रिण्यै' (58) हैं — मंत्रों की देवी। उनके पाठ से वाणी में ऐसा प्रभाव आता है कि जो बोलें, वो सत्य हो।
  • सौभाग्य प्राप्ति: 'सौभाग्यवत्यै' (7) नाम विवाह योग्य युवतियों और विवाहित स्त्रियों के लिए सौभाग्यदायक है।
  • संतान सुख: 'स्कन्दजनन्यै' (11) नाम से संतान की कामना पूर्ण होती है। स्कन्द (कार्तिकेय) की माता होने से वे संतान प्रदायिनी हैं।

दैनिक पूजन विधि (Daily Worship)

108 नाम दैनिक पूजा के लिए आदर्श हैं। यहाँ एक सरल विधि है:

10 मिनट की विधि:

  1. स्थान: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। लाल/पीला आसन उत्तम है।
  2. दीपक: घी या तिल तेल का दीपक जलाएं।
  3. ध्यान: बाला का ध्यान करें — तीन नेत्र, चार भुजाएं, लाल वस्त्र, मुस्कान।
  4. संकल्प: "श्री बाला प्रसन्नतार्थं अष्टोत्तरशतनामावली पाठं करिष्ये।"
  5. पाठ: 108 नामों का स्पष्ट उच्चारण करें। माला से गिन सकते हैं (1 नाम = 1 मनका)।
  6. समापन: क्षमा प्रार्थना और प्रणाम।
विशेष दिन: शुक्रवार, पूर्णिमा, अष्टमी और नवरात्रि में पाठ का फल 10 गुना होता है।

FAQ - साधक जिज्ञासा

1. 108 नाम और 1000 नाम में क्या अंतर है?

108 नामों वाली अष्टोत्तरशतनामावली सहस्रनाम का संक्षिप्त सार है। दैनिक पूजा के लिए यह आदर्श है (10-15 मिनट), जबकि 1000 नाम विशेष अनुष्ठान के लिए हैं (45-60 मिनट)।

2. दैनिक पाठ का सही तरीका क्या है?

प्रातःकाल स्नान के बाद, लाल आसन पर बैठें। दीपक जलाएं, बाला की मूर्ति/चित्र के समक्ष 108 नामों का पाठ करें। प्रत्येक नाम पर कुमकुम या पुष्प अर्पित कर सकते हैं।

3. 'कल्याण्यै' पहला नाम क्यों है?

'कल्याणी' का अर्थ है 'कल्याण करने वाली'। यह बाला की मूल प्रकृति है — वे सबका भला करती हैं। इसीलिए यह सबसे पहला और महत्वपूर्ण नाम है।

4. क्या बच्चे भी पाठ कर सकते हैं?

हां, बाला स्वयं बाल स्वरूपा (9 वर्ष की कन्या) हैं। बच्चों द्वारा किया गया पाठ उन्हें अत्यंत प्रिय है और बच्चों की बुद्धि तीव्र करता है।

5. 108 की माला से जप कैसे करें?

प्रत्येक नाम के साथ एक मनका गिनें। 108 नाम = 108 मनके। यह सबसे सरल विधि है। रुद्राक्ष या स्फटिक माला उत्तम है।

6. पाठ में कितना समय लगता है?

सामान्य गति से 10-12 मिनट। यदि अर्चन (पुष्प/कुमकुम चढ़ाना) भी करें तो 15-20 मिनट।

7. 'त्रिपुरवासिनी' (नाम 64) का रहस्य क्या है?

त्रिपुर = तीन पुर (ब्रह्मा, विष्णु, शिव के लोक)। बाला इन तीनों में निवास करती हैं, अर्थात् वे सर्वव्यापी हैं और कहीं भी पूजी जा सकती हैं।

8. क्या मासिक धर्म में पाठ कर सकते हैं?

बाला बाल स्वरूपा होने से अत्यंत उदार हैं। मानसिक जप या पुस्तक से पाठ किया जा सकता है, परन्तु मूर्ति स्पर्श न करें — यह सामान्य नियम है।

9. सबसे शक्तिशाली नाम कौन सा है?

'परब्रह्मस्वरूपिण्यै' (नाम 72) — यह दर्शाता है कि बाला स्वयं परब्रह्म हैं। यह नाम मोक्षदायी है और 108 बार जप करने योग्य है।

10. विद्यार्थियों के लिए कौन सा नाम जपें?

'महाविद्यायै' (नाम 97) और 'पञ्चदशाक्षर्यै' (नाम 25) विद्यार्थियों के लिए उत्तम हैं। परीक्षा से पहले 108 बार जप करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।