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Sri Bagalamukhi Ashtottara Shatanamavali – श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः

Sri Bagalamukhi Ashtottara Shatanamavali – श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः
॥ श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः ॥ (श्रीविष्णुयामले) ॥ अथ नामावलिः ॥ ॐ बगलायै नमः । ॐ विष्णुवनितायै नमः । ॐ विष्णुशङ्करभामिन्यै नमः । ॐ बहुलायै नमः । ॐ वेदमात्रे नमः । ॐ महाविष्णुप्रस्वै नमः । ॐ महामत्स्यायै नमः । ॐ महाकूर्मायै नमः । ॐ महावाराहरूपिण्यै नमः । ॐ नरसिंहप्रियायै नमः । ॐ रम्यायै नमः । ॐ वामनायै नमः । ॐ वटुरूपिण्यै नमः । ॐ जामदग्न्यस्वरूपायै नमः । ॐ रामायै नमः । ॐ रामप्रपूजितायै नमः । ॐ कृष्णायै नमः । ॐ कपर्दिन्यै नमः । ॐ कृत्यायै नमः । ॐ कलहायै नमः । ॐ विकारिण्यै नमः । ॐ बुद्धिरूपायै नमः । ॐ बुद्धभार्यायै नमः । ॐ बौद्धपाषण्डखण्डिन्यै नमः । ॐ कल्किरूपायै नमः । ॐ कलिहरायै नमः । ॐ कलिदुर्गतिनाशिन्यै नमः । ॐ कोटिसूर्यप्रतीकाशायै नमः । ॐ कोटिकन्दर्पमोहिन्यै नमः । ॐ केवलायै नमः । ॐ कठिनायै नमः । ॐ काल्यै नमः । ॐ कलायै नमः । ॐ कैवल्यदायिन्यै नमः । ॐ केशव्यै नमः । ॐ केशवाराध्यायै नमः । ॐ किशोर्यै नमः । ॐ केशवस्तुतायै नमः । ॐ रुद्ररूपायै नमः । ॐ रुद्रमूर्त्यै नमः । ॐ रुद्राण्यै नमः । ॐ रुद्रदेवतायै नमः । ॐ नक्षत्ररूपायै नमः । ॐ नक्षत्रायै नमः । ॐ नक्षत्रेशप्रपूजितायै नमः । ॐ नक्षत्रेशप्रियायै नमः । ॐ नित्यायै नमः । ॐ नक्षत्रपतिवन्दितायै नमः । ॐ नागिन्यै नमः । ॐ नागजनन्यै नमः । ॐ नागराजप्रवन्दितायै नमः । ॐ नागेश्वर्यै नमः । ॐ नागकन्यायै नमः । ॐ नागर्यै नमः । ॐ नगात्मजायै नमः । ॐ नगाधिराजतनयायै नमः । ॐ नगराजप्रपूजितायै नमः । ॐ नवीनायै नमः । ॐ नीरदायै नमः । ॐ पीतायै नमः । ॐ श्यामायै नमः । ॐ सौन्दर्यकारिण्यै नमः । ॐ रक्तायै नमः । ॐ नीलायै नमः । ॐ घनायै नमः । ॐ शुभ्रायै नमः । ॐ श्वेतायै नमः । ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः । ॐ सुन्दर्यै नमः । ॐ सौभगायै नमः । ॐ सौम्यायै नमः । ॐ स्वर्णाभायै नमः । ॐ स्वर्गतिप्रदायै नमः । ॐ रिपुत्रासकर्यै नमः । ॐ रेखायै नमः । ॐ शत्रुसंहारकारिण्यै नमः । ॐ भामिन्यै नमः । ॐ मायायै नमः । ॐ स्तम्भिन्यै नमः । ॐ मोहिन्यै नमः । ॐ शुभायै नमः । ॐ रागद्वेषकर्यै नमः । ॐ रात्र्यै नमः । ॐ रौरवध्वंसकारिण्यै नमः । ॐ यक्षिण्यै नमः । ॐ सिद्धनिवहायै नमः । ॐ सिद्धेशायै नमः । ॐ सिद्धिरूपिण्यै नमः । ॐ लङ्कापतिध्वंसकर्यै नमः । ॐ लङ्केशरिपुवन्दितायै नमः । ॐ लङ्कानाथकुलहरायै नमः । ॐ महारावणहारिण्यै नमः । ॐ देवदानवसिद्धौघपूजितायै नमः । ॐ परमेश्वर्यै नमः । ॐ पराणुरूपायै नमः । ॐ परमायै नमः । ॐ परतन्त्रविनाशिन्यै नमः । ॐ वरदायै नमः । ॐ वरदाराध्यायै नमः । ॐ वरदानपरायणायै नमः । ॐ वरदेशप्रियायै नमः । ॐ वीरायै नमः । ॐ वीरभूषणभूषितायै नमः । ॐ वसुदायै नमः । ॐ बहुदायै नमः । ॐ वाण्यै नमः । ॐ ब्रह्मरूपायै नमः । ॐ वराननायै नमः । ॐ बलदायै नमः । ॐ पीतवसनायै नमः । ॐ पीतभूषणभूषितायै नमः । ॐ पीतपुष्पप्रियायै नमः । ॐ पीतहारायै नमः । ॐ पीतस्वरूपिण्यै नमः । ॥ इति श्रीविष्णुयामले नारदविष्णुसंवादे श्रीबगला-अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥

श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः — परिचय (Introduction)

श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलिः (Sri Bagalamukhi Ashtottara Shatanamavali) माँ पीताम्बरा के १०८ सिद्ध नामों का संग्रह है। यह 'विष्णु यामल' (Vishnu Yamala Tantra) में वर्णित अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का ही नामावलि स्वरूप है।
'नामावलि' का प्रयोग विशेष रूप से अर्चन (Archana) के लिए किया जाता है। इसमें प्रत्येक नाम के आदि में 'ॐ' (प्रणव) और अंत में 'नमः' लगाकर मंत्र का रूप दिया गया है। जब साधक इन मंत्रों के साथ देवी के श्रीयंत्र या विग्रह पर फूल या हल्दी अर्पित करता है, तो इसे 'अर्चन' कहते हैं।
यह पाठ कोर्ट-कचहरी में विजय, शत्रुओं के स्तम्भन, और ग्रह शांति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

अर्चन के लाभ (Benefits of Archana)

नामावलि द्वारा अर्चन करने से शीघ्र लाभ प्राप्त होते हैं:
  • शत्रु स्तम्भन: "शत्रुसंहारकारिण्यै नमः" — शत्रुओं की कुदृष्टि और षड्यंत्र विफल होते हैं। वे साधक के विरुद्ध कुछ भी करने में असमर्थ हो जाते हैं।
  • मुकदमे में विजय: कोर्ट केस या वाद-विवाद में जीत के लिए हल्दी की माला पर इन नामों का जप अमोघ है।
  • पारिवारिक कलह शांति: "कलहायै नमः" — देवी कलह का नाश करने वाली भी हैं। घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • सौभाग्य की प्राप्ति: "सौभाग्यदायिन्यै नमः" — साधक को धन, यश और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

पाठ विधि एवं अर्चन (Ritual Method)

पीत पुष्प अर्चन विधि

  • समय: गुरुवार, अष्टमी, चतुर्दशी, या नवरात्रि। रात्रि काल (9 बजे के बाद) या ब्रह्म मुहूर्त।
  • वस्त्र एवं आसन: पीले वस्त्र (Yellow Clothes) धारण करें और पीले आसन पर बैठें।
  • अर्चन सामग्री: पीले फूल (कनेर या गेंदा), साबुत हल्दी की 108 गांठें, और पीले अक्षत (हल्दी में रंगे चावल)।
  • विधि: दायें हाथ में एक फूल या हल्दी का टुकड़ा लें। एक नाम बोलें (जैसे "ॐ बगलायै नमः") और सामग्री को माँ के चरणों या यंत्र पर अर्पित करें। इसी प्रकार 108 नाम पूरे करें।
  • संकल्प: पाठ से पूर्व अपनी मनोकामना (जैसे "शत्रु शांति" या "मुकदमे में विजय") का संकल्प अवश्य लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. स्तोत्र पाठ और नामावलि पाठ में कौन श्रेष्ठ है?

दोनों का अपना महत्व है। 'स्तोत्र' में स्तुति और प्रार्थना होती है, जबकि 'नामावलि' का प्रयोग अर्चन (चढ़ावा चढ़ाने) के लिए होता है। यदि आप देवी को फूल या कुमकुम अर्पित करना चाहते हैं, तो नामावलि श्रेष्ठ है।

2. क्या हल्दी की माला पहन सकते हैं?

हाँ, बगलामुखी साधना के लिए हल्दी की माला (Turmeric Mala) सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। इसे धारण भी कर सकते हैं और इस पर जप भी कर सकते हैं। यह बृहस्पति ग्रह को भी अनुकूल बनाती है।

3. 'पीताम्बर' का क्या अर्थ है?

'पीत' का अर्थ है पीला और 'अम्बर' का अर्थ है वस्त्र। माँ बगलामुखी पीले वस्त्र धारण करती हैं, इसीलिए उन्हें 'पीताम्बरा' (Pitambara) कहा जाता है। साधक को भी पीले वस्त्रों का ही प्रयोग करना चाहिए।

4. क्या घर में अर्चन कर सकते हैं?

बिलकुल। आप घर के पूजा स्थल में श्रीयंत्र या माँ के चित्र के सामने यह अर्चन कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि स्थान पवित्र और शांत हो।

5. क्या 108 नामों का रोज पाठ करना चाहिए?

यदि कोई विशेष संकट या शत्रु बाधा है, तो 21 या 41 दिनों तक नित्य पाठ करना चाहिए। सामान्य शान्ति के लिए प्रत्येक गुरुवार या अष्टमी को पाठ करना पर्याप्त है।