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Sri Aditya Dwadasa Namavali – श्री आदित्य द्वादशनामावली

Sri Aditya Dwadasa Namavali – श्री आदित्य द्वादशनामावली
ॐ आदित्याय नमः । ॐ दिवाकराय नमः । ॐ भास्कराय नमः । ॐ प्रभाकराय नमः । ॐ सहस्रांशवे नमः । ॐ त्रिलोचनाय नमः ॥ ६ ॥ ॐ हरिदश्वाय नमः । ॐ विभावसवे नमः । ॐ दिनकृते नमः । ॐ द्वादशात्मकाय नमः । ॐ त्रिमूर्तये नमः । ॐ सूर्याय नमः ॥ १२ ॥ इति श्री आदित्य द्वादशनामावली ॥

नामावली का महत्व (Significance of Namavali)

नामावली का पाठ विशेष रूप से पूजा और अर्चन के लिए किया जाता है। जब हम भगवान के प्रत्येक नाम के साथ 'ॐ' (प्रणव) और अंत में 'नमः' (नमस्कार) जोड़ते हैं, तो वह एक मंत्र बन जाता है।
  • ॐ (Om): ब्रह्मांड की आदि ध्वनि, जो चित्त की एकाग्रता लाती है।
  • नमः (Namah): 'न मम्' अर्थात 'मेरा नहीं'। यह अहंकार को त्याग कर समर्पण का भाव है।

12 नामों का अर्थ (Meanings of 12 Names)

1. ॐ आदित्याय नमः

अदिति के पुत्र, देवताओं के रक्षक को नमस्कार।

2. ॐ दिवाकराय नमः

दिन का आरम्भ करने वाले, अंधकार को मिटाने वाले को नमस्कार।

3. ॐ भास्कराय नमः

स्वयं प्रकाशित होकर जगत को प्रकाशित करने वाले को नमस्कार।

4. ॐ प्रभाकराय नमः

ज्योति और प्रभा के स्वामी (पुंज) को नमस्कार।

5. ॐ सहस्रांशवे नमः

हजारों किरणों (अंशु) वाले विराट स्वरूप को नमस्कार।

6. ॐ त्रिलोचनाय नमः

तीनों कालों (भूत, भविष्य, वर्तमान) के साक्षी और दृष्टा को नमस्कार।

7. ॐ हरिदश्वाय नमः

किरण रूपी हरे घोड़ों से युक्त रथ वाले देव को नमस्कार।

8. ॐ विभावसवे नमः

प्रकाश और अग्नि ही जिनका परम धन है, उन तेजोमय को नमस्कार।

9. ॐ दिनकृते नमः

दिन और समय के निर्माता, कालचक्र के संचालक को नमस्कार।

10. ॐ द्वादशात्मकाय नमः

बारह सूर्य (आदित्य) रूपों में प्रकट होने वाले देव को नमस्कार।

11. ॐ त्रिमूर्तये नमः

वेदत्रयी (तीनों वेद) और त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) स्वरूप को नमस्कार।

12. ॐ सूर्याय नमः

संसार को कर्म में प्रवृत्त करने वाले, जगत की आत्मा को नमस्कार।

अर्चन विधि (Method of Worship)

  • तैयारी: प्रातःकाल स्नान के बाद एक तांबे के पात्र में जल, रोली, अक्षत और लाल पुष्प लें।
  • अर्घ्य: सूर्य देव को जल अर्पित करते समय इन 12 नामों का उच्चारण करें।
  • पुष्प अर्चन: यदि आप घर के मंदिर में पूजा कर रहे हैं, तो प्रत्येक नाम ("नमः") के साथ एक फूल या अक्षत सूर्य यंत्र या प्रतिमा पर अर्पित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. आदित्य द्वादशनामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?

स्तोत्र में श्लोक होते हैं जो कथा या स्तुति रूप में होते हैं, जबकि नामावली में भगवान के नामों का उच्चारण 'ॐ' और 'नमः' के साथ किया जाता है। नामावली का उपयोग विशेष रूप से पूजा और अर्चन (फूल चढ़ाना) में होता है।

2. क्या इन 12 नामों का जाप रोज कर सकते हैं?

हाँ, प्रतिदिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देते हुए इन 12 नामों का जाप करना अत्यंत लाभकारी है। इससे नेत्र ज्योति और तेज बढ़ता है।