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Shri Kalabhairava Ashtottara Shatanama Namavali – श्री कालभैरवाष्टोत्तरशतनामावली

Shri Kalabhairava Ashtottara Shatanama Namavali – श्री कालभैरवाष्टोत्तरशतनामावली
॥ श्री कालभैरवाष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं कालभैरवदेवाय नमः । ॐ कालकालाय नमः । ॐ कालदण्डधृते नमः । ॐ कालात्मने नमः । ॐ काममन्त्रात्मने नमः । ॐ काशिकापुरनायकाय नमः । ॐ करुणावारिधये नमः । ॐ कान्तामिलिताय नमः । ॐ कालिकातनवे नमः । ॐ कालजाय नमः । ॐ कुक्कुटारूढाय नमः । ॐ कपालिने नमः । ॐ कालनेमिघ्ने नमः । ॐ कालकण्ठाय नमः । ॐ कटाक्षानुग्रहीताऽखिलसेवकाय नमः । ॐ कपालकर्परपरमोत्कृष्टभिक्षापात्रधराय नमः । ॐ कवये नमः । ॐ कल्पान्तदहनाकाराय नमः । ॐ कलानिधिकलाधराय नमः । ॐ कपालमालिकाभूषाय नमः । ॥ कालीकुल-भैरव नामावलिः ॥ ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं कालीकुलवरप्रदाय नमः । ॐ काली-कलावती-दीक्षा-संस्कारोपासनप्रियाय नमः । ॐ कालिकादक्षपार्श्वस्थाय नमः । ॐ कालीविद्यास्वरूपवते नमः । ॐ कालीकूर्चसमायुक्तभुवनाकूटभासुराय नमः । ॐ कालीध्यानजपासक्तहृदाकारनिवासकाय नमः । ॐ कालिकावरिवस्त्यादिप्रधानकल्पपादपाय नमः । ॐ काल्युग्रावासव ब्राह्मी प्रमुखाचार्यनायकाय नमः । ॐ कङ्कालमालिकाधारिणे नमः । ॐ कमनीयजटाधराय नमः । ॐ कोणरेखाष्टभद्रस्थप्रदेशबिन्दुपीठकाय नमः । ॐ कदलीकरवीरार्ककञ्जहोमार्चनप्रियाय नमः । ॐ कूर्मपीठादि शक्तीशाय नमः । ॐ कलाकाष्ठाधिपालकाय नमः । ॐ कठभ्रुवे नमः । ॐ कामसञ्चारिणे नमः । ॐ कामारये नमः । ॐ कामरूपवते नमः । ॐ कण्ठादिसर्वचक्रस्थाय नमः । ॐ क्रियादिकोटिदीपकाय नमः । ॥ कर्मफल-प्रदाता भैरव नामावलिः ॥ ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं कर्णहीनोपवीतापाय नमः । ॐ कनकाचलदेहवते नमः । ॐ कन्धराकारदहरागसभासुर मूर्तिमते नमः । ॐ कपालमोचनानन्ताय नमः । ॐ कालराजाय नमः । ॐ क्रियाप्रदाय नमः । ॐ करणाधिपतये नमः । ॐ कर्मकारकाय नमः । ॐ कर्तृनायकाय नमः । ॐ कण्ठाद्यखिलदेशाहिभूषणाढ्याय नमः । ॐ कलात्मकाय नमः । ॐ कर्मखण्डाधिपाय नमः । ॐ किल्बिषमोचिने नमः । ॐ कामकोष्टकाय नमः । ॐ कलकण्ठारवानन्दिने नमः । ॐ कर्मश्रद्धावरप्रदाय नमः । ॐ गुणभाकीर्णगान्धारसञ्चारिणे नमः । ॐ गौमतीस्मिताय नमः । ॐ किङ्किणीमञ्जुनिर्वाण-कटीसूत्रविराजिताय नमः । ॐ कल्याणकृत्कलिध्वंसिने नमः । ॥ सुरक्षा-प्रदाता भैरव नामावलिः ॥ ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं कर्मसाक्षिणे नमः । ॐ कृतज्ञाय नमः । ॐ करालदंष्ट्राय नमः । ॐ कन्दर्पदर्पघ्नाय नमः । ॐ कामभेदनाय नमः । ॐ कालागुरुविलिप्ताङ्गाय नमः । ॐ कादरार्थाभयप्रदाय नमः । ॐ कलन्तिकाभरदाय नमः । ॐ कालीभक्तलोकवरप्रदाय नमः । ॐ कमिनीकाञ्चनाभक्तमोचकाय नमः । ॐ कमलेक्षणाय नमः । ॐ कादम्बरीरसास्वादलोलुपाय नमः । ॐ काङ्क्षितार्थदाय नमः । ॐ कबन्धनावाय नमः । ॐ कामाख्याकाञ्च्यादिक्षेत्रपालकाय नमः । ॐ कैवल्यप्रदमन्दाराय नमः । ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः । ॐ क्रियेच्छाज्ञानशक्तिप्रदीपकानललोचनाय नमः । ॐ काम्यादिकर्मसर्वस्वफलदाय नमः । ॐ कर्मपोषकाय नमः । ॥ सिद्धि-प्रदाता भैरव नामावलिः ॥ ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं कार्यकारणनिर्मात्रे नमः । ॐ कारागृहविमोचकाय नमः । ॐ कालपर्यायमूलस्थाय नमः । ॐ कार्यसिद्धिप्रदायकाय नमः । ॐ कालानुरूपकर्माङ्गमोक्षणभ्रान्तिनाशनाय नमः । ॐ कालचक्रप्रभेदिने नमः । ॐ कालिमन्ययोगिनीप्रियाय नमः । ॐ काहलादिमहावाद्यातालताण्डवलालसाय नमः । ॐ कुलकुण्डलिनीशाक्तयोगसिद्धिप्रदायकाय नमः । ॐ कालरात्री महारात्री शिवरात्र्यादि कारकाय नमः । ॐ कोलाहलध्वनये नमः । ॐ कोपिने नमः । ॐ कौलमार्गप्रवर्तकाय नमः । ॐ कर्मकौशल्यसन्तोषिणे नमः । ॐ केलीभाषणलालसाय नमः । ॐ कृत्स्नप्रवृत्तविश्वाण्डपञ्चकृत्यविदायकाय नमः । ॐ कालनाथपराय नमः । ॐ कालाय नमः । ॐ कालधर्मप्रवर्तकाय नमः । ॐ कुलाचार्याय नमः । ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं कुलाचाररताय नमः । ॐ गुह्याष्टमीप्रियाय नमः । ॐ कर्मबन्धाखिलच्छेदिने नमः । ॐ गोष्टस्थभैरवाग्रण्ये नमः । ॐ कठोरौजस्यभीष्माज्ञापालकिङ्करसेविताय नमः । ॐ कालरुद्राय नमः । ॐ कालवेलाहोरांशमूर्तिमते नमः । ॐ कराय नमः । ॥ इति श्री कालभैरवाष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥ ॥ श्री कालभैरवाय नमः ॥

परिचय: श्री कालभैरवाष्टोत्तरशतनामावली एवं तात्विक रहस्य (Detailed Introduction)

भगवान शिव के सबसे उग्र, न्यायप्रिय और रक्षक अवतारों में कालभैरव का स्थान सर्वोच्च है। तंत्र शास्त्र और पुराणों के अनुसार, कालभैरव का प्राकट्य मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी को महादेव के प्रचंड क्रोध से हुआ था। श्री कालभैरवाष्टोत्तरशतनामावली भगवान के १०८ ऐसे दिव्य नामों का समूह है जो उनके काल-नियंत्रक, रक्षक और मुक्तिदाता स्वरूपों की व्याख्या करते हैं। 'भैरव' शब्द की व्युत्पत्ति तीन अक्षरों—'भ', 'र' और 'व'—से हुई है, जो क्रमशः भरण (सृजन), रमण (स्थिति) और वमन (लय) के प्रतीक हैं। अर्थात, वे ही ब्रह्मांड की रक्षा करते हैं और अंततः उसे स्वयं में विलीन कर लेते हैं।
काल और न्याय के अधिपति: कालभैरव को 'काल' (समय) का स्वामी माना गया है। वे समय के निरंतर पहिये को संचालित करते हैं और उन्हीं की आज्ञा से सृष्टि में समय का प्रवाह सुनिश्चित होता है। 'कालराजाय' और 'कालकालाय' जैसे नाम यह प्रमाणित करते हैं कि वे मृत्यु के देवता यमराज के भी दण्डदाता हैं। वाराणसी (काशी) की पौराणिक मान्यता के अनुसार, वे 'काशी के कोतवाल' हैं। काशी में भगवान विश्वनाथ की पूजा से पूर्व कालभैरव की आज्ञा लेना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ही वहां के जीवों के पाप-पुण्य का न्याय करने वाले 'दण्डपाणि' हैं।
तांत्रिक और शाक्त आधार: इस नामावली की विशिष्टता इसके बीज मंत्र (ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं) में निहित है। यह मंत्र भैरव की तांत्रिक ऊर्जा को महाकाली के 'काली कुल' से जोड़ता है। नामावली में 'कालीकुलवरप्रदाय' और 'कालीविद्यास्वरूपवते' जैसे नाम स्पष्ट करते हैं कि कालभैरव केवल शिव के रूप नहीं हैं, बल्कि वे आद्या शक्ति के परम रक्षक और दस महाविद्याओं की साधना के मूल आधार हैं। वे साधक की 'कुलकुण्डलिनी' शक्ति के जागरण के मार्गदर्शक और योगियों के लिए 'सिद्धेश्वर' हैं।
अहंकार का दमन: कालभैरव के प्राकट्य की कथा हमें 'अहंकार' के विनाश की शिक्षा देती है। जब ब्रह्मा जी ने अपने पांचवें मस्तक से अहंकारवश महादेव का अपमान किया, तब भैरव ने उसी क्षण उस मस्तक का छेदन कर दिया। नामावली में 'कपालिने' और 'कपालमोचनानन्ताय' जैसे नाम उसी घटना का स्मरण कराते हैं। यह सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर अहंकार का कोई स्थान नहीं है। जो साधक निष्काम भाव से और पूर्ण शरणागति के साथ इस नामावली का पाठ करता है, भैरव उसके भीतर के अज्ञान और मद का नाश कर उसे शुद्ध चैतन्य की ओर ले जाते हैं।
आधुनिक अशांत जीवन में, जहाँ व्यक्ति अज्ञात शत्रुओं, मानसिक असुरक्षा और ऋण (कर्ज) के बोझ से दबा रहता है, कालभैरव के नामों का जप एक अभेद्य सुरक्षा कवच निर्मित करता है। 'भयापहाय' के रूप में वे साधक के मन से मृत्यु का भय निकालते हैं और 'कर्मसाक्षिणे' के रूप में वे उसे धर्मपरायण जीवन जीने की शक्ति देते हैं। १०८ नामों का यह तांत्रिक पुंज वास्तव में काल के चक्र को पार कर मोक्ष प्राप्त करने का एक गुप्त मार्ग है।

विशिष्ट तांत्रिक एवं ज्योतिषीय महत्व (Significance)

कालभैरवाष्टोत्तरशतनामावली का आध्यात्मिक महत्व इसकी 'न्याय' और 'शुद्धि' की क्षमता में है। भैरव की उपासना को 'अन्तर्याग' का अंग माना गया है, जहाँ साधक अपने ही भीतर के नकारात्मक संस्कारों की बलि देता है। 'कौलमार्गप्रवर्तकाय' नाम यह इंगित करता है कि वे आगम और तंत्र के गूढ़तम मार्गों के ज्ञाता हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से, राहु और शनि के क्रूर प्रभावों को शांत करने के लिए कालभैरव की पूजा सर्वाधिक प्रभावशाली बताई गई है। राहु जनित भ्रम और शनि जनित दण्ड से बचने के लिए 'कल्याणकृत्कलिध्वंसिने' भैरव के नामों का पाठ अचूक औषधि है। यह पाठ साधक के चारों ओर एक ऐसी ऊर्जा निर्मित करता है जिससे ऊपरी बाधाएँ और तंत्र-मंत्र के दुष्प्रभाव स्वतः ही निष्क्रिय हो जाते हैं।

फलश्रुति: पाठ के चमत्कारी लाभ (Benefits)

तांत्रिक आगमों और शिव पुराण के अनुसार, इस नामावली के श्रद्धापूर्वक पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
  • भय और अकाल मृत्यु से रक्षा: 'भयापहाय' नाम के जप से मन का अज्ञात भय, रात्रि का डर और अकाल मृत्यु का योग कट जाता है।
  • शत्रु और मुकदमा विजय: 'रक्षोबलविमर्दनाय' होने के कारण वे शत्रुओं के षड्यंत्रों को विफल करते हैं और अदालती मामलों में न्याय दिलाते हैं।
  • ऋण और दरिद्रता मुक्ति: 'कर्मसाक्षिणे' के रूप में वे प्रारब्ध के कर्मों को शुद्ध करते हैं, जिससे आर्थिक बाधाएँ और कर्ज का बोझ कम होता है।
  • कारागार और संकट निवृत्ति: 'कारागृहविमोचकाय' नाम का विशेष फल यह है कि यह साधक को कानूनी जकड़न और जीवन के घोर संकटों से बाहर निकालता है।
  • मानसिक शक्ति और एकाग्रता: भैरव उपासना से इच्छाशक्ति (Will Power) प्रबल होती है और साधक अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करता है।

पाठ विधि एवं साधना के नियम (Ritual Method)

कालभैरव की साधना उग्रता और अनुशासन की मांग करती है। पूर्ण फल हेतु निम्नलिखित विधि का पालन करें:

साधना के नियम

  • समय: रविवार या शनिवार की मध्यरात्रि (निशीथ काल) पाठ के लिए सर्वोत्तम है। मार्गशीर्ष अष्टमी (भैरवाष्टमी) पर विशेष अनुष्ठान करें।
  • शुद्धि: स्नान के पश्चात काले या लाल वस्त्र धारण करें। उग्र साधना में दक्षिण दिशा (South) की ओर मुख करके बैठना फलदायी है।
  • अर्पण: भगवान को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक, चमेली के फूल, सुगंधित इत्र और सिन्दूर अर्पित करें।
  • भोग: सात्विक पूजा में गुड़-चना, नारियल या 'दही-वड़ा' का भोग लगाएं। तंत्र मार्ग में अर्पण गुरु निर्देशानुसार होते हैं।
  • जप: प्रत्येक नाम के पूर्व 'ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं' बीज मंत्र का सम्पुट लगाने से पाठ की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

विशेष अवसर

  • भैरवाष्टमी: यह भैरव का प्राकट्य दिवस है, इस दिन २१ पाठ करने से असाध्य कार्य भी सिद्ध होते हैं।
  • प्रत्येक मास की कालाष्टमी: हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पाठ करना घर में स्थायी सुरक्षा प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. कालभैरव को 'काशी का कोतवाल' क्यों कहा जाता है?

मान्यता है कि भगवान विश्वनाथ ने काशी की सुरक्षा और वहां के निवासियों के कर्मों के न्याय का उत्तरदायित्व कालभैरव को सौंपा है। उनकी आज्ञा के बिना कोई काशी में प्रवेश नहीं कर सकता।

2. इस नामावली के साथ बीज मंत्र का प्रयोग क्यों आवश्यक है?

बीज मंत्र 'ॐ ह्रीं क्रीं हूं ह्रीं' भैरव की सुप्त तांत्रिक ऊर्जा को जाग्रत करता है। इसके बिना पाठ केवल नामों का उच्चारण है, जबकि बीज मंत्र के साथ यह साक्षात् कवच बन जाता है।

3. क्या घर में कालभैरव की नामावली का पाठ करना सुरक्षित है?

जी हाँ, गृहस्थ व्यक्ति सात्विक भाव से घर में पाठ कर सकते हैं। बस पूर्ण शुद्धि और श्रद्धा का ध्यान रखें। वे घर के मुख्य रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं।

4. राहु और शनि दोष के लिए यह पाठ कैसे सहायक है?

भैरव 'काल' के अधिपति हैं। राहु और शनि के दण्ड से बचने के लिए भैरव की शरण लेना सर्वोत्तम माना गया है क्योंकि वे न्याय के देवता हैं।

5. पाठ के लिए सबसे शुभ दिन कौन सा है?

रविवार और शनिवार कालभैरव की पूजा के लिए विशेष दिन हैं। कृष्ण पक्ष की अष्टमी (कालाष्टमी) सर्वाधिक शुभ मानी गई है।

6. 'कपालमोचनानन्ताय' नाम का क्या रहस्य है?

ब्रह्मा का मस्तक काटने के बाद भैरव पर जो ब्रह्महत्या का दोष लगा था, वह काशी के 'कपाल मोचन तीर्थ' पर समाप्त हुआ। यह नाम घोर पापों से मुक्ति का प्रतीक है।

7. क्या स्त्रियाँ कालभैरव की पूजा कर सकती हैं?

हाँ, भक्ति मार्ग में कोई भेद नहीं है। स्त्रियाँ भी अपनी सुरक्षा और परिवार के कल्याण के लिए श्रद्धापूर्वक यह पाठ कर सकती हैं।

8. पाठ के लिए कौन सी माला सर्वोत्तम है?

भैरव साधना और नामावली जप के लिए रुद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ और फलदायी मानी गई है।

9. 'भयापहाय' नाम का क्या महत्व है?

इसका अर्थ है 'भय को दूर करने वाला'। यह साधक के मन से मौत का डर, तंत्र-बाधा का डर और हीनभावना को मिटाकर उसे निर्भय बनाता है।

10. क्या इस पाठ से कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय मिलती है?

हाँ, कालभैरव न्याय के देवता हैं। यदि साधक धर्म के मार्ग पर है, तो उनकी नामावली का पाठ मुकदमे में सत्य की विजय सुनिश्चित करता है।