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Sri Svapna Varahi Mantra Japa – श्री स्वप्न वाराही मन्त्र जप

Sri Svapna Varahi Mantra Japa – श्री स्वप्न वाराही मन्त्र जप
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ श्री स्वप्न वाराही अष्टादशाक्षर मन्त्र जप प्रयोगः ॥ १. विनियोगः अस्य श्री स्वप्न वाराही महामन्त्रस्य । ईश्वर ऋषिः । गायत्री छन्दः । श्री स्वप्न वाराही देवता । ॐ बीजं । स्वाहा शक्तिः । ह्रीँ कीलकं । मम स्वप्न वाराही प्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ २. ऋष्यादि न्यासः ईश्वर ऋषये नमः शिरसि । गायत्री छन्दसे नमः मुखे । श्री स्वप्न वाराही देवतायै नमः हृदि । ॐ बीजाय नमः गुह्ये । स्वाहा शक्तये नमः पादयोः । ह्रीँ कीलकाय नमः नाभौ । विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ॥ ३. वर्ण न्यासः ॐ नमः दक्षपादे । ह्रीँ नमः वामपादे । नँ नमः दक्षजानुनि । मोँ नमः वामजानुनि । वँ नमः लिण्गे । रँ नमः दक्षकटौ । ह्यँ नमः वामकटौ । घोँ नमः कण्ठे । रेँ नमः दक्षगण्डे । श्वँ नमः वामगण्डे । रिँ नमः दक्षनेत्रे । णिँ नमः वामनेत्रे । श्वँ नमः दक्षकर्णे । प्नेँ नमः वामकर्णे । ठः नमः नासिकायां । ठः नमः ललाटे । स्वाँ नमः मुखे । हाँ नमः हृदि ॥ ४. कर न्यासः ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा अंगुष्ठाभ्यां नमः । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा तर्जनीभ्यां नमः । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा मध्यमाभ्यां नमः । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा अनामिकाभ्यां नमः । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा कनिष्ठाभ्यां नमः । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ५. षडङ्ग न्यासः ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा हृदयाय नमः । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा शिरसे स्वाहा । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा शिखायै वषट् । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा कवचाय हुम् । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ ह्रीँ नमो वाराह्यघोर स्वप्ने ठः ठः स्वाहा अस्त्राय फट् । भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ६. ध्यानम् नीलाञ्जनगिरिश्यामां हेमरत्नविभूषिताम् । अश्वरूढां च वाराहीं पाशाङ्कुशधरां शुभाम् ॥ भीमरूपां महादेवीं खड्गखेटकधारिणीम् । चतुर्भुजां तीक्ष्णदंष्ट्रां दंष्ट्राग्रस्थवसुन्धराम् ॥ दुष्टहरणोद्युक्तां साधकस्य वरप्रदाम् । ध्यायेदञ्जनभूधरोज्ज्वलनिभामश्वाधिरूढांकरैर्बिभ्राणां मणिहेमभूषिततनुं पाशांङ्कुशौ भैरवीं । खड्गं खेटकमग्रदंष्ट्रविलसत्पृथ्वीमरिध्वंसिनीं देवीं तुङ्गपयोधरामनुदिनं श्रीस्वप्नवाराहिकाम् ॥ (अर्थ: मैं श्री स्वप्न वाराही का ध्यान करता हूँ, जो नील पर्वत के समान आभा वाली, रत्नों से विभूषित, अश्व पर सवार, पाश, अंकुश, खड्ग और ढाल धारण करने वाली, पृथ्वी को अपनी दाढ़ों पर उठाए हुए, शत्रुओं का नाश करने वाली और साधकों को वर देने वाली हैं।) ७. पञ्चपूजा लँ - पृथिव्यात्मिकायै गन्धं समर्पयामि। हँ - आकाशात्मिकायै पुष्पैः पूजयामि। यँ - वाय्वात्मिकायै धूपमाघ्रापयामि। रँ - अग्न्यात्मिकायै दीपं दर्शयामि। वँ - अमृतात्मिकायै अमृतं महानैवेद्यं निवेदयामि। सँ - सर्वात्मिकायै सर्वोपचार पूजाम् समर्पयामि॥ ८. जपमाला मन्त्रं (माला पूजन) ॐ मां माले महामाये सर्वमन्त्र स्वरूपिणि। चतुर्वर्ग स्त्वयिन्यस्त स्तस्मान्ये सिद्धिदा भव॥ ९. गुरु मन्त्र ॐ ह्रीं सिद्धगुरो प्रसीद ह्रीं ॐ ॥ १०. मूल मन्त्र (१८ अक्षरी) ॥ ॐ ह्रीं नमो वाराहि अघोरेश्वरि स्वप्ने ठः ठः स्वाहा ॥ (Om Hreem Namo Varahi Aghoresvari Svapne Thah Thah Svaha) ११. समर्पणम् गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मात्कृतं जपम्। सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादान्मयि स्तिरा॥ (जल छोड़े) १२. जपानंतरं मालामन्त्रं ॐ त्वं माले सर्वदेवानां प्रीतिदा शुभदा भव। शुभं कुरुष्य मे भद्रे यशो वीर्यं च देहिमे॥ ॐ ह्रीं सिद्ध्यै नमः॥ १३. पुरश्चरण विधि जप संख्या: १,००,००० (एक लाख)। दशांश: होम, तर्पण, मार्जन, ब्राह्मण भोजन।

श्री स्वप्न वाराही: परिचय और महत्व (Introduction & Significance)

श्री विद्या तंत्र में 'स्वप्न वाराही' (Svapna Varahi) का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ये 'स्वप्न' (Dreams) की अधिष्ठात्री देवी हैं। मनुष्य के जीवन का एक बड़ा भाग निद्रा में बीतता है, और अवचेतन मन (Subconscious Mind) की गहराइयों में अनेक रहस्य छिपे होते हैं। स्वप्न वाराही देवी इसी अंधकारमय जगत में प्रकाश की किरण हैं।
साधक जब किसी दुविधा में होता है, या उसे भविष्य का कोई संकेत चाहिए होता है, तब वह स्वप्न वाराही की शरण लेता है। ये देवी स्वप्न में आकर स्पष्ट मार्गदर्शन देती हैं, शत्रुओं के षड्यंत्रों को उजागर करती हैं और आने वाली विपत्तियों से सावधान करती हैं।
इनका स्वरूप 'अघोर' (Fierce yet non-terrifying to devotees) है। वे अश्व (घोड़े) पर सवार हैं, जो मन की गति और नियंत्रण का प्रतीक है। उनकी साधना से साधक को 'त्रिकाल ज्ञान' (Past, Present, Future knowledge) की सिद्धि प्राप्त हो सकती है।

साधना के लाभ (Benefits of Sadhana)

  • स्वप्न सिद्धि: साधक को स्वप्न में देवी के दर्शन और निर्देश प्राप्त होते हैं।
  • भविष्य ज्ञान: आने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का पूर्व आभास हो जाता है।
  • समस्या समाधान: जटिल समस्याओं का हल नींद में स्वतः मिल जाता है।
  • दुस्वप्न नाश: बुरे सपनों और नींद के विकारों से मुक्ति मिलती है।
  • शत्रु भेद: गुप्त शत्रुओं की पहचान उजागर होती है।

विस्तृत प्रश्नोत्तरी (Detailed FAQs)

1. श्री स्वप्न वाराही कौन हैं?

श्री स्वप्न वाराही देवी, माँ वाराही का वह स्वरूप हैं जो 'निद्रा' और 'स्वप्न' अवस्था की स्वामिनी हैं। वे साधक के अवचेतन मन (Subconscious Mind) को जागृत कर उसे दिव्य दृष्टि प्रदान करती हैं, जिससे वह स्वप्न में भूत, भविष्य और वर्तमान के सत्य को जान सकता है।

2. इस साधना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य 'स्वप्न सिद्धि' प्राप्त करना है। यह साधना उन लोगों के लिए है जो किसी समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पा रहे हैं या भविष्य में होने वाली घटनाओं के प्रति सचेत रहना चाहते हैं। देवी स्वप्न में आकर मार्ग दिखाती हैं।

3. 18 अक्षरी मंत्र क्या है और इसका प्रभाव क्या है?

यह मंत्र (ॐ ह्रीं नमो वाराहि...) 18 बीजाक्षरों से बना है। यह अष्टादशाक्षर मंत्र सीधे आज्ञा चक्र को प्रभावित करता है, जिससे अंतर्ज्ञान (Intuition) की शक्ति बढ़ती है और साधक 'सत्य संकल्प' बनता है।

4. साधना का सर्वोत्तम समय कौन सा है?

चूंकि यह 'स्वप्न' से सम्बंधित है, इस मंत्र का जप विशेष रूप से रात्रि में सोने से ठीक पहले (Bedtime) करना चाहिए। इससे निद्रा योगनिद्रा में बदल जाती है।

5. क्या स्वप्न हमेशा सच होते हैं?

साधना सिद्ध होने पर, ब्रह्म मुहूर्त या गहरी नींद में आए स्वप्न प्रायः सत्य होते हैं। देवी प्रतीकों (Symbols) या स्पष्ट वाणी के माध्यम से सन्देश देती हैं। साधक को इन संकेतों को समझना सीखना पड़ता है।

6. क्या इससे बुरे सपनों (Nightmares) से मुक्ति मिलती है?

जी हाँ, स्वप्न वाराही मंत्र बुरे सपनों, नींद में डर लगना, या 'स्लीप पैरालिसिस' (Sleep Paralysis) जैसी समस्याओं का अचूक उपाय है। यह निद्रा को भयमुक्त और शांतिपूर्ण बनाता है।

7. क्या कोई विशेष नियम (Perquisites) हैं?

सोने से पहले हाथ-पैर धोकर शुद्ध वस्त्र पहनें। जिस बिस्तर पर सोएं, वह पवित्र हो। दक्षिण दिशा की ओर सिर करके न सोएं। सात्विक आहार लें, क्योंकि गरिष्ठ भोजन स्वप्न में बाधा डालता है।

8. ध्यान में देवी का रूप कैसा है?

ध्यान मंत्र के अनुसार, वे मेघों के समान गहरे नील वर्ण की हैं। तीन नेत्रों वाली और चन्द्रमा को मस्तक पर धारण करने वाली हैं। वे अश्व (घोड़े) पर सवार हैं और हाथों में पाश, अंकुश, तलवार और ढाल लिए हुए हैं।

9. कितने दिनों में सिद्धि मिलती है?

श्रद्धा और एकाग्रता के अनुसार, 11 से 41 दिनों के नियमित जप (विशेषकर रात्रि में) से साधक को स्वप्न में स्पष्ट संकेत मिलने लगते हैं। पूर्ण सिद्धि के लिए 1 लाख जप का विधान है।

10. क्या सामान्य जन यह साधना कर सकते हैं?

हाँ, यह साधना सौम्य और सुरक्षित है। विद्यार्थी, व्यापारी या गृहस्थ—कोई भी जो मार्गदर्शन चाहता है, इसे कर सकता है। गुरु मंत्र के बाद इसका जप अधिक फलदायी है।