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Sri Medha Dakshinamurthy Mantra in Sanskrit – श्री मेधा दक्षिणामूर्ति मन्त्रः

Sri Medha Dakshinamurthy Mantra in Sanskrit – श्री मेधा दक्षिणामूर्ति मन्त्रः
ओं अस्य श्री मेधादक्षिणामूर्ति महामन्त्रस्य शुकब्रह्म ऋषिः गायत्री छन्दः मेधादक्षिणामूर्तिर्देवता मेधा बीजं प्रज्ञा शक्तिः स्वाहा कीलकं मेधादक्षिणामूर्ति प्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ध्यानम् – भस्मं व्यापाण्डुराङ्ग शशिशकलधरो ज्ञानमुद्राक्षमाला । वीणापुस्तेर्विराजत्करकमलधरो लोकपट्टाभिरामः ॥ व्याख्यापीठेनिषण्णा मुनिवरनिकरैस्सेव्यमान प्रसन्नः । सव्यालकृत्तिवासास्सततमवतु नो दक्षिणामूर्तिमीशः ॥ मूलमन्त्रः – ओं नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा ॥ ओं शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ इतर पश्यतु ।

श्री मेधा दक्षिणामूर्ति मन्त्रः - परिचय

श्री मेधा दक्षिणामूर्ति मन्त्रः भगवान शिव की महिमा का गुणगान है। शिव जी, जो संहार और सृजन के देवता हैं, अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • आत्म-ज्ञान: शिव जी की कृपा से अज्ञान का नाश होकर आत्म-ज्ञान प्राप्त होता है।
  • भय मुक्ति: मृत्यु और संसार के भय से मुक्ति मिलती है।
  • शांति: मन को परम शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।
  • मोक्ष: निरंतर पाठ से शिव लोक की प्राप्ति सुलभ होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: सोमवार, प्रदोष काल और शिवरात्रि का दिन पाठ के लिए उत्तम है।
  • आसन: ऊनी या कुशा के आसन पर उत्तर मुख होकर बैठें।
  • पूजन: शिवलिंग पर जल/दूध अभिषेक और बिल्वपत्र अर्पण करें।
  • मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' का जाप पाठ से पूर्व और पश्चात करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. दक्षिणामूर्ति स्वरूप क्या है?

भगवान शिव का वह स्वरूप जो आदि-गुरु के रूप में ऋषियों को मौन व्याख्यान द्वारा आत्म-ज्ञान प्रदान करता है, दक्षिणामूर्ति कहलाता है।

2. नटराज रूप का क्या महत्व है?

नटराज रूप सृष्टि के सृजन, पालन और संहार के ब्रह्मांडीय नृत्य का प्रतीक है।