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ऋणहर्ता गणेश मंत्र (कर्ज मुक्ति मंत्र) अर्थ, लाभ और विधि

॥ Rinharta Ganesh Mantra ॥

ऋणहर्ता गणेश मंत्र (कर्ज मुक्ति मंत्र): अर्थ, लाभ और विधि
॥ ऋणहर्ता गणेश मन्त्र ॥

विनियोग:ॐ अस्य श्री ऋणहरण कृर्तृ गणपति स्तोत्र मन्त्रस्य सदाशिव ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्री ऋण हर्तृ गणपतिर्देवता, ग्लौं बीजम्, गः शक्तिः, गौं कीलकम्। मम सकलऋणनाशने जपे विनियोगः।
ध्यान:ॐ सिंदूर वर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम्।
ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम्॥
सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥
त्रिपुरस्य वधात्पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥
हिरण्यकश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥
महिषस्य वधे देव्या गणनाथः प्रपूजितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥
मंत्र:ॐ गणेश ऋणं छिंधि वरेण्यं हुं नमः फट्॥
॥ अर्थ ॥

हे सर्वश्रेष्ठ भगवान गणेश, मेरे ऋण (कर्ज) को काट दो (नष्ट कर दो)। मैं आपकी इस शक्तिशाली ऊर्जा (हुं) को नमन करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि यह सभी बाधाओं को तत्काल नष्ट करे (फट्)।

उत्पत्ति एवं शास्त्रीय संदर्भ

ऋणहर्ता गणेश मंत्र भगवान गणेश के 'ऋण हर्ता' अर्थात 'कर्ज को हरने वाले' स्वरूप को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और सर्वोत्तम मंत्र है। यह मंत्र विशेष रूप से ऋण (कर्ज) को दूर करने और दरिद्रता का नाश करने के लिए है। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रत्येक गृहस्थ को इस मंत्र का नित्य जप करना चाहिए, ताकि उसके जीवन में कभी आर्थिक संकट और कर्ज की स्थिति न बने।
इस मंत्र से संबंधित स्तोत्र के शास्त्रीय विधान (विनियोग) के अनुसार:
  • ऋषि: सदाशिव
  • छंद: अनुष्टुप्
  • देवता: श्री ऋणहर्तृ गणपति
  • बीज: ग्लौं
  • शक्ति: गः
  • कीलकम्: गौं
  • प्रयोजन: सकल ऋण नाश के लिए (मम सकलऋणनाशने)

ध्यान स्तोत्र एवं अर्थ

ॐ सिंदूर वर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम्।
ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम्॥

सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥

त्रिपुरस्य वधात्पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥

हिरण्यकश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥

महिषस्य वधे देव्या गणनाथः प्रपूजितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे॥
अर्थ: मैं उन देव गणेश को प्रणाम करता हूँ जो सिंदूरी वर्ण के हैं, दो भुजाओं वाले हैं, लम्बोदर हैं और कमल दल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा आदि देव और सिद्ध जिनकी सेवा करते हैं। सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा ने फल सिद्धि के लिए जिनकी पूजा की, वे पार्वती-पुत्र सदैव मेरे ऋण का नाश करें। त्रिपुर वध से पूर्व भगवान शिव ने जिनकी भली-भांति पूजा की, वे पार्वती-पुत्र सदैव मेरे ऋण का नाश करें। हिरण्यकशिपु आदि के वध के लिए भगवान विष्णु ने जिनकी पूजा की, वे पार्वती-पुत्र सदैव मेरे ऋण का नाश करें। महिषासुर के वध के समय देवी (दुर्गा) ने जिन गणनायक की पूजा की, वे पार्वती-पुत्र सदैव मेरे ऋण का नाश करें।

मंत्र का शब्दशः अर्थ

ॐ गणेश - हे भगवान गणेश
ऋणं छिंधि - ऋण को काट दो/नष्ट कर दो ('छिंधि' का अर्थ है 'काटना' या 'विदीर्ण करना')
वरेण्यं - हे सर्वश्रेष्ठ, हे वरण करने योग्य
हुं - एक शक्तिशाली बीज मंत्र (बाधाओं को नष्ट करने की ऊर्जा)
नमः - मैं नमन करता हूँ
फट् - अस्त्र बीज (नकारात्मक शक्तियों को तत्काल नष्ट करने हेतु)
संपूर्ण अर्थ: हे सर्वश्रेष्ठ भगवान गणेश, मेरे ऋण (कर्ज) को काट दो (नष्ट कर दो)। मैं आपकी इस शक्तिशाली ऊर्जा (हुं) को नमन करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि यह सभी बाधाओं को तत्काल नष्ट करे (फट्)।

मंत्र जाप के फल एवं लाभ

सर्वोत्तम कर्ज मुक्ति विधान

यह मंत्र हर प्रकार के ऋण, चाहे वह वित्तीय हो या कर्मों का, से मुक्ति दिलाने के लिए सर्वोत्तम उपाय माना गया है।

दरिद्रता का नाश

नियमित जाप से घर में व्याप्त दरिद्रता और धन की कमी दूर होती है और स्थायी समृद्धि का वास होता है।

घर में सुरक्षा कवच

शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में इस मंत्र का एक बार भी उच्चारण हो जाता है, वहां ऋण या दरिद्रता कभी प्रवेश नहीं कर सकती।

गृहस्थों के लिए वरदान

यह मंत्र विशेष रूप से गृहस्थ जीवन में आर्थिक स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए एक वरदान है।

जप की सरल विधि

यह एक अत्यंत प्रभावशाली मंत्र है और प्रत्येक गृहस्थ को इसका नित्य जाप करना चाहिए।
  1. नित्य पूजा: प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थान पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठें।
  2. संकल्प: अपने ऋणों से मुक्ति और दरिद्रता के नाश के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करें।
  3. जाप: लाल आसन पर बैठकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके, मूंगे या रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र की कम से कम एक माला (108 बार) का जाप करें।
  4. पूर्ण श्रद्धा: जाप करते समय पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें कि भगवान गणेश आपकी प्रार्थना अवश्य सुनेंगे।

सामान्य प्रश्न

'ऋणहर्ता' का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'ऋणहर्ता' दो शब्दों से मिलकर बना है - 'ऋण' (कर्ज) और 'हर्ता' (हरने वाला)। अतः, ऋणहर्ता का अर्थ है 'सभी प्रकार के कर्जों को हरने वाले' या 'कर्ज से मुक्ति दिलाने वाले'।

ध्यान में ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा गणेश पूजा का उल्लेख क्यों है?

उत्तर: यह भगवान गणेश के 'प्रथम पूज्य' होने के महत्व को दर्शाता है। यह बताता है कि सृष्टि की रचना (ब्रह्मा), संहार (शिव) और पालन (विष्णु) जैसे महान कार्यों से पहले भी इन प्रमुख देवताओं ने सफलता के लिए गणेश जी की पूजा की थी। यह इस मंत्र की शक्ति और प्रामाणिकता को और बढ़ा देता है।

क्या यह मंत्र केवल वित्तीय ऋणों के लिए है?

उत्तर: यद्यपि यह मंत्र मुख्य रूप से वित्तीय ऋण और दरिद्रता के लिए है, लेकिन 'ऋण' का व्यापक अर्थ कर्मों का ऋण भी होता है। गहरी श्रद्धा के साथ किया गया जाप साधक को कर्म बंधनों से मुक्ति की ओर भी अग्रसर करता है।