॥ द्वादशाक्षर राम मन्त्र ॥
विनियोग:अस्य मंत्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, विराद् छंदः, सीतापाणि परिग्रहे श्री रामो देवता, हुँ बीजम्, स्वाहा शक्तिः, चतुर्विध पुरुषार्थं सिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान:अयोध्यानगरे रम्ये रत्न सौन्दर्य मण्डपे।
मन्दार पुष्पैराबद्ध वितान तोरणांकिते॥
सिंहासने समारूणं पुष्पकोपरि राघवम्।
रक्षोभिर्हरिभिर्देवै दिव्ययान गतैः शुभै॥
संस्तुयमानं मुनिभिः सर्वतः परिसेवितम्।
सीतालङ्कृत वामांगं लक्ष्मणेनोपशोभितं॥
मंत्र:हुं जानकी वल्लभाय स्वाहा।
विनियोग:अस्य मंत्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, विराद् छंदः, सीतापाणि परिग्रहे श्री रामो देवता, हुँ बीजम्, स्वाहा शक्तिः, चतुर्विध पुरुषार्थं सिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान:अयोध्यानगरे रम्ये रत्न सौन्दर्य मण्डपे।
मन्दार पुष्पैराबद्ध वितान तोरणांकिते॥
सिंहासने समारूणं पुष्पकोपरि राघवम्।
रक्षोभिर्हरिभिर्देवै दिव्ययान गतैः शुभै॥
संस्तुयमानं मुनिभिः सर्वतः परिसेवितम्।
सीतालङ्कृत वामांगं लक्ष्मणेनोपशोभितं॥
मंत्र:हुं जानकी वल्लभाय स्वाहा।
॥ अर्थ ॥
माता जानकी के प्रियतम (भगवान राम) को मेरा समर्पण है।
यह मंत्र भी साधकों एवं गृहस्थ व्यक्तियों के लिए समान रूप से उपयोगी है।
माता जानकी के प्रियतम (भगवान राम) को मेरा समर्पण है।
यह मंत्र भी साधकों एवं गृहस्थ व्यक्तियों के लिए समान रूप से उपयोगी है।
परिचय एवं महत्व
यह मंत्र भी साधकों एवं गृहस्थ व्यक्तियों के लिए समान रूप से उपयोगी है। यह द्वादशाक्षर (12 अक्षरों वाला) राम मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है और भगवान राम की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।
इस मंत्र के शास्त्रीय विधान (विनियोग) के अनुसार:
- ऋषि: वसिष्ठ
- छन्द: विराद्
- देवता: सीतापाणि परिग्रहे श्री रामो
- बीजम्: हुँ
- शक्तिः: स्वाहा
- प्रयोजन: चतुर्विध पुरुषार्थं सिद्धये (चारों पुरुषार्थों की सिद्धि के लिए)
ध्यान श्लोक एवं अर्थ
अयोध्यानगरे रम्ये रत्न सौन्दर्य मण्डपे।
मन्दार पुष्पैराबद्ध वितान तोरणांकिते॥
सिंहासने समारूणं पुष्पकोपरि राघवम्।
रक्षोभिर्हरिभिर्देवै दिव्ययान गतैः शुभै॥
संस्तुयमानं मुनिभिः सर्वतः परिसेवितम्।
सीतालङ्कृत वामांगं लक्ष्मणेनोपशोभितं॥
मन्दार पुष्पैराबद्ध वितान तोरणांकिते॥
सिंहासने समारूणं पुष्पकोपरि राघवम्।
रक्षोभिर्हरिभिर्देवै दिव्ययान गतैः शुभै॥
संस्तुयमानं मुनिभिः सर्वतः परिसेवितम्।
सीतालङ्कृत वामांगं लक्ष्मणेनोपशोभितं॥
अर्थ: मैं अयोध्या के राजकुमार, सुंदर और कोमल भगवान राम का ध्यान करता हूँ, जो रत्नजड़ित स्वर्णमय मंडप में मंदार पुष्पों से सजे तोरण द्वार पर पुष्प के सिंहासन पर विराजमान हैं। जिनकी सेवा राक्षस, हरि, देवगण और मुनिगण कर रहे हैं। जिनके वाम भाग में माता सीता और दाहिने भाग में लक्ष्मण जी विराजमान हैं। जो सभी मुनियों द्वारा स्तुत और सर्वत्र सेवित हैं।
मंत्र का शब्दशः अर्थ
हुँ (Hung): शक्ति का बीज मंत्र।
जानकी (Janaki): माता सीता।
वल्लभाय (Vallabhaya): प्रियतम को।
स्वाहा (Swaha): समर्पित।
संपूर्ण अर्थ: माता जानकी के प्रियतम (भगवान राम) को मेरा समर्पण है। यह 12 अक्षरों वाला (द्वादशाक्षर) महामंत्र है।
मंत्र जाप के फल एवं लाभ
सभी प्रकार की सफलता
यह मंत्र सभी प्रकार की सफलता प्रदान करने में सहायक है और जीवन में समृद्धि लाता है।
मोक्ष प्रदायक
यह मंत्र साधक को मोक्ष प्राप्ति में सहायक है और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
राम कृपा
इस मंत्र के जाप से भगवान राम की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
साधकों और गृहस्थों के लिए समान
यह मंत्र साधकों और गृहस्थ दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी है।
मंत्र सिद्धि की विधि
इस मंत्र की सिद्धि के लिए शास्त्रों में निम्नलिखित विधान वर्णित है:
- जप संख्या: यह मंत्र दस लाख (10,00,000) बार जपने से सिद्ध होता है।
- नियमितता: प्रतिदिन एक निश्चित संख्या में मंत्र का जाप करना चाहिए।
- पवित्रता: जाप के दौरान शारीरिक और मानसिक पवित्रता का पालन आवश्यक है।
