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Sri Lalitha Ashtakarika Stotram (Avirbhava Stuti) – श्री ललिता अष्टकारिका स्तोत्रम् (आविर्भाव स्तुतिः)

Sri Lalitha Ashtakarika Stotram (Avirbhava Stuti) – श्री ललिता अष्टकारिका स्तोत्रम् (आविर्भाव स्तुतिः)
विश्वरूपिणि सर्वात्मे विश्वभूतैकनायकि । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ १ ॥ आनन्दरूपिणि परे जगदानन्ददायिनि । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ २ ॥ ज्ञातृज्ञानज्ञेयरूपे महाज्ञानप्रकाशिनि । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ ३ ॥ लोकसंहाररसिके कालिके भद्रकालिके । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ ४ ॥ लोकसन्त्राणरसिके मङ्गले सर्वमङ्गले । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ ५ ॥ विश्वसृष्टिपराधीने विश्वनाथे विशङ्कटे । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ ६ ॥ संविद्वह्नि हुताशेष सृष्टिसम्पादिताकृते । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ ७ ॥ भण्डाद्यैस्तारकाद्यैश्च पीडितानां सतां मुदे । ललिता परमेशानि संविद्वह्नेः समुद्भव ॥ ८ ॥ इति श्री ललिता अष्टकारिका स्तोत्रम् ।

श्री ललिता अष्टकारिका स्तोत्रम् (आविर्भाव स्तुतिः) - परिचय

श्री ललिता अष्टकारिका स्तोत्रम् (आविर्भाव स्तुतिः) माँ ललिता त्रिपुरसुन्दरी को समर्पित है। माँ ललिता "श्रीविद्या" की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी उपासना से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • ऐश्वर्य प्राप्ति: माँ ललिता की कृपा से सुख, समृद्धि और राजयोग मिलता है।
  • सौंदर्य और आरोग्य: साधक को शारीरिक कांति और निरोगी काया प्राप्त होती है।
  • शत्रु नाश: समस्त बाधाओं और शत्रुओं का शमन होता है।
  • ब्रह्मज्ञान: अंततः साधक को आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: प्रातःकाल या रात्रि (विशेषकर शुक्रवार और पूर्णिमा) को पाठ करना श्रेयस्कर है।
  • आसन: लाल आसन पर बैठकर, पूर्वाभिमुख होकर पाठ करें।
  • शुद्धि: स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • नैवेद्य: देवी को खीर, मिश्री या फलों का भोग लगाएं।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. श्री ललिता अष्टकारिका स्तोत्रम् (आविर्भाव स्तुतिः) का पाठ किस तिथि को करना चाहिए?

शुक्रवार (Friday), पूर्णिमा और नवरात्रि के दिनों में इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

2. क्या बिना दीक्षा के श्रीविद्या उपासना की जा सकती है?

सामान्य स्तोत्र पाठ (जैसे ललिता सहस्रनाम) भक्ति भाव से कोई भी कर सकता है, परन्तु बीज मंत्रों का जप गुरु दीक्षा के बाद ही करना चाहिए।