श्री हनुमान् मङ्गलाष्टकम्
Shri Hanuman Mangalashtakam

इस अष्टकम् का विशिष्ट महत्व
श्री हनुमान् मङ्गलाष्टकम् (Shri Hanuman Mangalashtakam) भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत शुभ और मंगलकारी स्तुति है। प्रत्येक श्लोक का अंत "मङ्गलं श्रीहनूमते" से होता है, जो हनुमान जी के लिए मंगल की कामना करता है। यह स्तोत्र हनुमान जी के जन्म (वैशाख मास, कृष्ण दशमी, शनिवार, पूर्वाभाद्रा नक्षत्र), उनके दिव्य स्वरूप, करुणा, वीरता और भक्त-वत्सलता का वर्णन करता है।
अष्टकम् के प्रमुख भाव और लाभ
मंगल प्राप्ति: प्रत्येक श्लोक में "मङ्गलं श्रीहनूमते" का उच्चारण जीवन में शुभता और मंगल लाता है।
करुणा और कृपा: "करुणारसपूर्णाय" - हनुमान जी करुणा से परिपूर्ण हैं और अपने भक्तों पर सदैव कृपा बरसाते हैं।
शोक निवारण: "जानकीशोकहारिणे" - जैसे उन्होंने माता सीता का शोक दूर किया, वैसे ही भक्तों के दुखों को भी हरते हैं।
भक्त रक्षा: "भक्तरक्षणशीलाय" - हनुमान जी का स्वभाव ही भक्तों की रक्षा करना है।
पाठ करने की विधि
इस अष्टकम् का पाठ मंगलवार और शनिवार को करना विशेष फलदायी है।
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले इसका पाठ करें।
हनुमान जयंती के दिन इसका पाठ विशेष कृपा प्रदान करता है।