Logoपवित्र ग्रंथ

Sanghila Krita Uma Maheswara Ashtakam – उममहेश्वराष्टकम् (सङ्घिल कृतम्)

Sanghila Krita Uma Maheswara Ashtakam – उममहेश्वराष्टकम् (सङ्घिल कृतम्)
पितामहशिरच्छेदप्रवीणकरपल्लव । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वर ॥ १ ॥ निशुम्भशुम्भप्रमुखदैत्यशिक्षणदक्षिणे । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वरि ॥ २ ॥ शैलराजस्य जामातः शशिरेखावतंसक । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वर ॥ ३ ॥ शैलराजात्मजे मातः शातकुम्भनिभप्रभे । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वरि ॥ ४ ॥ भूतनाथ पुराराते भुजङ्गामृतभूषण । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वर ॥ ५ ॥ पादप्रणतभक्तानां पारिजातगुणाधिके । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वरि ॥ ६ ॥ हालास्येश दयामूर्ते हालाहललसद्गल । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वर ॥ ७ ॥ नितम्बिनि महेशस्य कदम्बवननायिके । नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं महेश्वरि ॥ ८ ॥ इति श्रीहालास्यमाहात्म्ये सङ्घिलकृतं उमामहेश्वराष्टकम् । इतर पश्यतु ।

उममहेश्वराष्टकम् (सङ्घिल कृतम्) - परिचय

उममहेश्वराष्टकम् (सङ्घिल कृतम्) भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत अष्टकम है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।

पाठ के लाभ (Benefits)

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
  • विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
  • समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
  • भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।

पाठ विधि (Recitation Method)

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
  • शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. उममहेश्वराष्टकम् (सङ्घिल कृतम्) का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।

2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?

हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।

3. उममहेश्वराष्टकम् (सङ्घिल कृतम्) के पाठ से क्या फल मिलता है?

इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।