Pradoshastotra ashtakam – प्रदोषस्तोत्राष्टकम्

सत्यं ब्रवीमि परलोकहितं ब्रवीमि
सारं ब्रवीम्युपनिषद्धृदयं ब्रवीमि ।
संसारमुल्बणमसारमवाप्य जन्तोः
सारोऽयमीश्वरपदाम्बुरुहस्य सेवा ॥ १ ॥
ये नार्चयन्ति गिरिशं समये प्रदोषे
ये नार्चितं शिवमपि प्रणमन्ति चान्ये ।
एतत्कथां श्रुतिपुटैर्न पिबन्ति मूढा-
-स्ते जन्मजन्मसु भवन्ति नरा दरिद्राः ॥ २ ॥
ये वै प्रदोषसमये परमेश्वरस्य
कुर्वन्त्यनन्यमनसोङ्घ्रिसरोजपूजाम् ।
नित्यं प्रवृद्धधनधान्यकलत्रपुत्र-
-सौभाग्यसम्पदधिकास्त इहैव लोके ॥ ३ ॥
कैलासशैलभवने त्रिजगज्जनित्रीं
गौरीं निवेश्य कनकाञ्चितरत्नपीठे ।
नृत्यं विधातुमभिवाञ्छति शूलपाणौ
देवाः प्रदोषसमयेऽनुभजन्ति सर्वे ॥ ४ ॥
वाग्देवी धृतवल्लकी शतमखो वेणुं दधत्पद्मज-
-स्तालोन्निद्रकरो रमा भगवती गेयप्रयोगान्विता ।
विष्णुः सान्द्रमृदङ्गवादनपटुर्देवाः समन्तात् स्थिताः
सेवन्ते तमनु प्रदोषसमये देवं मृडानीपतिम् ॥ ५ ॥
गन्धर्वयक्षपतगोरगसिद्धसाध्या
विद्याधरामरवराप्सरसां गणांश्च ।
येऽन्ये त्रिलोकनिलयाः सहभूतवर्गाः
प्राप्ते प्रदोषसमये हरपार्श्वसंस्थाः ॥ ६ ॥
अतः प्रदोषे शिव एक एव
पूज्योऽथ नान्ये हरिपद्मजाद्याः ।
तस्मिन्महेशे विधिनेज्यमाने
सर्वे प्रसीदन्ति सुराधिनाथाः ॥ ७ ॥
एष ते तनयः पूर्वजन्मनि ब्राह्मणोत्तमः
प्रतिग्रहैर्वयो निन्ये न यज्ञाद्यैः सुकर्मभिः ।
अतो दारिद्र्यमापन्नः पुत्रस्ते द्विजभामिनि
तद्दोषपरिहारार्थं शरणं यातु शङ्करम् ॥ ८ ॥
इति श्रीस्कान्दपुराणे ब्रह्मखण्डे तृतीये ब्रह्मोत्तरखण्डे षष्ठोऽध्याये शाण्डिल्य कृत प्रदोषस्तोत्राष्टकम् ।
इतर पश्यतु ।
प्रदोषस्तोत्राष्टकम् - परिचय
प्रदोषस्तोत्राष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक अद्भुत अष्टकम है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
पाठ के लाभ (Benefits)
- मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है और मन स्थिर होता है।
- विघ्न नाश: जीवन आने वाली बाधाएं भगवान शिव की कृपा से दूर होती हैं।
- समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- भक्ति: भगवान शिव के प्रति भक्ति और श्रद्धा दृढ़ होती है।
पाठ विधि (Recitation Method)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्या समय (प्रदोष काल) सर्वोत्तम है।
- शुद्धि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- आसन: पूजा कक्ष में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ध्यान: भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए पाठ करें।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. प्रदोषस्तोत्राष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, विशेषकर सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन इसका महत्व अधिक है।
2. क्या संस्कृत न जानने वाले भी पाठ कर सकते हैं?
हाँ, आप हिंदी अर्थ समझकर या श्रवण (सुनकर) भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भाव मुख्य है।
3. प्रदोषस्तोत्राष्टकम् के पाठ से क्या फल मिलता है?
इसके नियमित पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, भय का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।