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Kamala Ashtakam – कमलाष्टकम्

Kamala Ashtakam – कमलाष्टकम्
॥ कमलाष्टकम् ॥ न्यङ्कावरातिभयशङ्काकुले धृतदृगङ्कायतिः प्रणमतां शङ्काकलङ्कयुतपङ्कायताश्मशितटङ्कायितस्वचरिता । त्वं कालदेशपदशङ्कातिपातिपतिसङ्काश वैभवयुता शं काममातरनिशं कामनीयमिह सङ्काशयाशु कृपया ॥ १॥ आचान्तरङ्गदलिमोचान्तरङ्गरुचिवाचां तरङ्गगतिभिः काचाटनाय कटुवाचाटभावयुतनीचाटनं न कलये । वाचामगोचरसदाचारसूरिजनताचातुरीविवृतये प्राचां गतिं कुशलवाचां जगज्जननि याचामि देवि भवतीम् ॥ २॥ चेटीकृतामरवधूटीकराग्रधृतपेटीपुटार्घ्यसुमनो- वीटीदलक्रमुकपाटीरपङ्कनवशाटीकृताङ्गरचना । खेटीकमानशतकोटीकराब्जजजटाटीरवन्दितपदा या टीकतेऽब्जवनमाटीकतां हृदयवाटीमतीव कमला ॥ ३॥ स्वान्तान्तरालकृतकान्तागमान्तशतशान्तान्तराघनिकराः शान्तार्थकान्तवकृतान्ता भजन्ति हृदि दान्ता दुरन्ततपसा । यां तानतापभवतान्तातिभीतजगतां तापनोदनपटुं मां तारयत्वशुभकान्तारतोऽद्य हरिकान्ताकटाक्षलहरी ॥ ४॥ यां भावुका मनसि सम्भावयन्ति भवसम्भावनापहृतये त्वं भासि लक्ष्मि सततं भाव्ययद्भवनसम्भावनादिविधये । जम्भारिसम्पदुपलम्भादिकारणमहं भाव्यमङ्घ्रियुगलं सम्भावये श्रुतिषु सम्भाषितं वचसि सम्भाष्य तस्य तव च ॥ ५॥ दूरावधूतमधुधारागिरोच्चकुचभारानताङ्गलतिका- साराङ्गलिप्तघनसारार्द्रकुङ्कुमरसा राजहंसगमना । वैराकरस्मरविकारापसंसरणवाराशिमग्रमनसः श्रीराविरस्तु धुरि ताराय मे गुरुभिरारधिता भगवती ॥ ६॥ श्रीवासधूपकनदावासदीपरुचिरावासभूपरिसरा श्रीवासदेशलसदावापकाशरदभावाभकेशनिकरा । श्रीवासुदेवरमणी वामदेवविधिदेवाधिपावनपरा श्रीवासवस्तुनरदेवाहतस्तुतिसभावा मुदेऽस्तु सुतराम् ॥ ७॥ भाषादिदेवकुलयोषामणिस्तवनघोषाञ्चितस्वसविधा दोषाकुले जगति पोषाकुला सपदि शेषाहि शायिदयिता । दोषालयस्य मम दोषानपोह्य गतदोषाभिनन्द्यमहिमा शेषाशनाहिरिपुशेषादिसम्पद विशेषां ददातु विभवान् ॥ ८॥ ॥ इति श्रीकमलाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

कमलाष्टकम् — तांत्रिक लक्ष्मी की काव्यात्मक आराधना

कमलाष्टकम् (Kamala Ashtakam) संस्कृत साहित्य और भक्ति धारा का एक अद्वितीय रत्न है। यह 8 श्लोकों का स्तोत्र दश महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या, 'माँ कमला' (Tantric Lakshmi) को समर्पित है। यह स्तोत्र अपनी क्लिष्ट और अलंकारिक संस्कृत भाषा के लिए प्रसिद्ध है। इसमें कवि ने 'अनुप्रास अलंकार' (Alliteration) का ऐसा जादुई प्रयोग किया है कि पाठ करते समय जिह्वा पर एक विशिष्ट लय (Rhythm) और ऊर्जा उत्पन्न होती है।

कमला और लक्ष्मी में भेद: यद्यपि कमला और लक्ष्मी एक ही हैं, परन्तु 'कमला' महाविद्या का स्वरूप अधिक व्यापक है। लक्ष्मी जहाँ विष्णु की पत्नी (वैष्णवी शक्ति) हैं और पालन करती हैं, वहीं 'कमला' एक स्वतंत्र तांत्रिक देवी हैं। वे राजसी वैभव, संतान, सौभाग्य और मोक्ष की स्वामिनी हैं। इस अष्टकम में उन्हें "हरिकान्ता" (विष्णु पत्नी) और "जगज्जननि" (जगत माता) दोनों रूपों में नमन किया गया है।

काव्य सौंदर्य (Poetic Beauty): श्लोक 3 को देखें — "चेटी... पेटी... वीटी... शाटी... खेटी..."। इसमें 'टी' वर्ण की आवृत्ति से एक संगीतमय ध्वनि उत्पन्न होती है। यहाँ कवि वर्णन करते हैं कि कैसे अप्सराएं (अमर वधुएं) माँ की सेवा में लगी हैं, उनके हाथों में आभूषणों की पेटियां और ताम्बूल (पान) हैं। यह दृश्य माँ के राजराजेश्वरी स्वरूप को दर्शाता है।

अष्टकम के सिद्ध लाभ (Benefits)

यह अष्टकम उन लोगों के लिए एक वरदान है जो जीवन में केवल धन नहीं, बल्कि 'क्लास' (Class), 'रुतबा' और 'बुद्धि' भी चाहते हैं। इसके प्रमुख लाभ हैं:

  • वाक सिद्धि (Power of Speech): श्लोक 2 में कवि प्रार्थना करते हैं — "प्राचां गतिं कुशलवाचां... याचामि"। जो लोग वाणी दोष से पीड़ित हैं, या जो लेखक, कवि, वकील और वक्ता बनना चाहते हैं, उन्हें यह पाठ वाक-पटुता और ज्ञान प्रदान करता है।
  • राजयोग और वैभव: श्लोक 5 में "जम्भारिसम्पद" (इन्द्र की संपत्ति) का उल्लेख है। यह पाठ साधक को राजा के समान ऐश्वर्य, वाहन, और भवन (मकान) का सुख देता है।
  • भय और कलंक का नाश: श्लोक 1 के अनुसार, यह पाठ शत्रुओं के भय (अरातिभय) और समाज में लगे किसी भी प्रकार के कलंक (Bad Reputation) को धो देता है।
  • मानसिक शांति: श्लोक 4 में माँ को "तापनोदनपटुं" (दुखों को दूर करने में कुशल) कहा गया है। यह संसार की भीषण गर्मी (कष्टों) से जलते हुए मन को शांति प्रदान करता है।
  • सौभाग्य और सौंदर्य: श्लोक 6 में माँ के अद्भुत श्रृंगार (कुंकुम, केसर) का वर्णन है। इसका पाठ करने से साधक के व्यक्तित्व में आकर्षण और तेज (Charisma) आता है।

साधना विधि एवं प्रयोग (Ritual Method)

कमला अष्टकम एक जाग्रत पाठ है। इसकी साधना यदि विधि-विधान से की जाए, तो फल कई गुना बढ़ जाता है।

  • कमल पुष्प का प्रयोग: "कमला" नाम का अर्थ ही है 'कमल पर विराजमान'। साधना में प्रतिदिन या शुक्रवार को माँ को एक खिला हुआ गुलाबी कमल (Pink Lotus) अवश्य अर्पित करें। यह माँ को वश में करने का सबसे सरल उपाय है।
  • समय: तांत्रिक लक्ष्मी होने के कारण, इनकी साधना गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय) या मध्य रात्रि में अधिक फलदायी होती है। हालांकि, गृहस्थ लोग इसे सुबह भी कर सकते हैं।
  • आसन और दिशा: गुलाबी या लाल आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • विशेष भोग: माँ कमला को 'ताम्बूल' (पान) अत्यंत प्रिय है (श्लोक 3 में उल्लेख है)। पूजा में लौंग, इलायची और गुलकंद युक्त मीठा पान अवश्य चढ़ाएं। इसके अलावा खीर या मखाने की खीर का भोग लगाएं।
  • अनुष्ठान: किसी विशेष कामना (जैसे कर्ज मुक्ति या प्रमोशन) के लिए 41 दिनों तक रोज शाम को घी का दीपक जलाकर इस अष्टकम के 8 पाठ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. कमलाष्टकम् और कनकधारा स्तोत्र में क्या अंतर है?

कनकधारा स्तोत्र शंकराचार्य जी द्वारा स्वर्ण प्राप्ति के लिए रचा गया भक्ति प्रधान स्तोत्र है। जबकि 'कमलाष्टकम्' दश महाविद्याओं में से एक 'कमला' (तांत्रिक लक्ष्मी) की साधना है, जो न केवल धन, बल्कि 'वाक सिद्धि' (वाणी की शक्ति), भोग और राजयोग भी प्रदान करती है।

2. इस अष्टकम की भाषा शैली इतनी जटिल क्यों है?

यह अष्टकम संस्कृत साहित्य के 'अनुप्रास अलंकार' (Alliteration) का उत्कृष्ट उदाहरण है। जैसे श्लोक 3 में 'चेटी, पेटी, वीटी, शाटी' जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है। यह ध्वन्यात्मक ऊर्जा (Sound Energy) उत्पन्न करता है जो मानसिक तंत्र को जागृत करती है।

3. माँ कमला कौन हैं?

कमला 'दश महाविद्या' समूह की दसवीं देवी हैं। वे तांत्रिक लक्ष्मी हैं। जहाँ सामान्य लक्ष्मी केवल धन देती हैं, वहीं कमला साधक को धन के साथ-साथ मोक्ष, ज्ञान और साम्राज्य (सत्ता) का सुख भी देती हैं।

4. श्लोक 1 में 'शङ्काकलङ्क' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि यह अष्टकम साधक के मन से हर प्रकार की शंका (Doubt), कलंक (Bad Reputation) और भय को मिटाकर उसे निडर और पवित्र बनाता है।

5. क्या यह पाठ कर्ज मुक्ति के लिए प्रभावी है?

हाँ, श्लोक 5 में कहा गया है कि यह 'जम्भारिसम्पद' (इन्द्र के समान संपत्ति) प्रदान करता है। यह कर्ज और दरिद्रता के 'अशुभ कान्तार' (मुसीबत के जंगल) से बाहर निकालता है।

6. श्लोक 3 में 'ताम्बूल' (पान) का वर्णन क्यों है?

श्लोक 3 में 'वीटी' (पान का बीड़ा) का उल्लेख है। तंत्र साधना में देवी को ताम्बूल अत्यंत प्रिय है। यह भोग और ऐश्वर्य का प्रतीक है। कमला साधना में ताम्बूल अर्पण का विशेष महत्व है।

7. पाठ के लिए कौन सा समय श्रेष्ठ है?

तांत्रिक देवी होने के कारण, कमला अष्टकम का पाठ गोधूलि बेला (शाम) या रात्रि में करना अधिक प्रभावशाली होता है। सामान्य धन प्राप्ति के लिए शुक्रवार की सुबह भी कर सकते हैं।

8. क्या यह पाठ वाक-सिद्धि (Speech Power) देता है?

जी हाँ, श्लोक 2 में साधक प्रार्थना करता है—'कुशलवाचां जगज्जननि याचामि' (हे माँ! मैं आपसे कुशल वाणी की याचना करता हूँ)। यह लेखकों, वक्ताओं और कवियों के लिए वरदान है।

9. साधना में किस रंग का प्रयोग करें?

माँ कमला को 'अरुण' (लाल/गुलाबी) रंग प्रिय है। लाल आसन, लाल वस्त्र और लाल कमल (या गुलाब) के साथ यह पाठ करें।

10. क्या इस अष्टकम के लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य है?

यद्यपि यह तांत्रिक प्रभाव वाला है, परन्तु यह एक 'स्तुति' (Praise) है, बीज मंत्र नहीं। इसलिए गृहस्थ व्यक्ति भी शुद्ध भाव से इसका पाठ कर सकते हैं।