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Shri Pitru Dev Aarti – श्री पितृ देव आरती

Shri Pitru Dev Aarti – श्री पितृ देव आरती
जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूँ थारी।
शरण पड़यो हूँ थारी बाबा, शरण पड़यो हूँ थारी॥
जय जय पितरजी महाराज...॥

आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहि जाणू, आप ही हो रखवारे॥
जय जय पितरजी महाराज...॥

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी॥
जय जय पितरजी महाराज...॥

देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई॥
जय जय पितरजी महाराज...॥

भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूँ मैं बारम्बार॥
जय जय पितरजी महाराज...॥

पित्तरों की नित आरती कीजै, तन मन धन चरणों में लीजै।
अपने कुल की रक्षा करते, पुत्र पौत्रो के दुःख को हरते॥
जय जय पितरजी महाराज...॥

स्वर्ग लोक में पास तुम्हारे, सेवा करते देवता सारे।
जिन पर आप खुशी हो जाओ, उनके कारज सिद्ध बनाओ॥
जय जय पितरजी महाराज...॥

जो कोई शरण में आवे तुम्हारो, जग में सुख पाता भारो।
जो कोई तिन पित्तरों की आरती गावे, नर जीवन में सुख सम्पत्ति पावे॥
जय जय पितरजी महाराज...॥
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आरती परिचय (Introduction)

श्री पितृ देव आरती पूजा के अंत में की जाने वाली महत्त्वपूर्ण वंदना है। जिस प्रकार देवी-देवताओं की आरती से पूजा पूर्ण होती है, उसी प्रकार श्राद्ध, तर्पण या पितृ पूजा के बाद आरती करने से पितृ देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपनी उपस्थिति का आभास कराते हैं।

यह आरती विशेष रूप से राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित है, जहां पितरों को "पितर जी महाराज" के रूप में पूजा जाता है।

आरती विधि (Method)

  • दीपक (Lamp)पितरों के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाएं। तिल के तेल या घी का दीपक प्रयोग कर सकते हैं। दीपक में थोड़ी काली तिल डालना शुभ होता है।
  • समय (Time)सूर्यास्त के समय (गोधूलि बेला) आरती करना श्रेष्ठ माना जाता है। अमावस्या और श्राद्ध पक्ष में इसे नित्य करें।

आरती के लाभ (Benefits)

आरती के शब्दों में ही इसका फल छिपा है:

  • कुल रक्षा: "अपने कुल की रक्षा करते" - यह आरती कुल और परिवार को विघ्नों से बचाती है।
  • सुख संपत्ति: "नर जीवन में सुख संपत्ति पावे" - आर्थिक कष्ट दूर होते हैं।
  • सहायता: "देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई" - यात्रा और विदेश में भी पितृ रक्षा करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या स्त्रियाँ पितृ आरती कर सकती हैं?

जी हाँ, स्त्रियाँ भी पितरों की आरती और सामान्य पूजा कर सकती हैं। तर्पण आदि में कुछ नियम होते हैं, लेकिन आरती भक्ति भाव से कोई भी कर सकता है।

2. पितृ आरती का सर्वोत्तम समय क्या है?

सूर्यास्त के समय (गोधूलि बेला) और अमावस्या की तिथि पितृ आरती के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

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