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श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती

Shri Chintpurni Devi Ki Aarti | Jai Chintpurni Mata

श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती
जय चिंतपूर्णी माता, मैया जय चिंतपूर्णी माता।
आदि शक्ति कलयुग में, आकर करे निवासा॥
जय चिंतपूर्णी माता...॥

छिन्नमस्तिका रूप तुम्हारा, चिंता हरने वाला।
जो भी द्वारे आता, भर देती झोली खाली॥
जय चिंतपूर्णी माता...॥

माईदास के सपने में आ, तूने दर्शन दीना।
पिण्डी रूप में प्रकट हो, भव भय दूर कीना॥
जय चिंतपूर्णी माता...॥

जो भी तेरे दर पे आता, चिंता सब मिट जाती।
मनवांछित फल पाता, तुझसे जो भी है माँगा॥
जय चिंतपूर्णी माता...॥

ध्वजा नारियल भेंट चढ़े, और हलवे का भोग लगे।
तेरी कृपा से मैया, घर में भण्डार भरे॥
जय चिंतपूर्णी माता...॥

चिंतपूर्णी माँ की आरती, जो कोई नर गावे।
सुख-समृद्धि, वैभव, सब कुछ वो पा जावे॥
जय चिंतपूर्णी माता...॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

आरती का महत्त्व

"जय चिंतपूर्णी माता" देवी चिंतपूर्णी की आरती है, जो हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। माता चिंतपूर्णी को 'छिन्नमस्तिका' भी कहा जाता है और वे अपने भक्तों की सभी चिंताओं (Worries) को हरने वाली मानी जाती हैं।

आरती के मुख्य भाव

  • चिंता हरने वाली (Remover of Worries): "छिन्नमस्तिका रूप तुम्हारा, चिंता हरने वाला" - माता का यह रूप भक्तों के मानसिक तनाव और चिंताओं को नष्ट करता है।
  • माईदास की भक्ति (Devotion of Maidas): "माईदास के सपने में आ" - यह पंक्ति भक्त माईदास की कथा का स्मरण कराती है, जिन्हें माता ने स्वप्न में दर्शन देकर अपना स्थान बताया था।
  • मनवांछित फल (Desired Fruits): "मनवांछित फल पाता" - सच्चे मन से आरती करने वाले को इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

गायन विधि और अवसर

  • अवसर (Occasion): यह आरती नवरात्रि, अष्टमी, और चिंतपूर्णी धाम की यात्रा के दौरान गाई जाती है।
  • विधि (Method): माता को नारियल, हलवा और ध्वजा अर्पित कर, धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक यह आरती गाएं।
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