Logoपवित्र ग्रंथ

जय भारतमाता नीराञ्जना आरती

Bharat Mata Niranjana Aarti

जय भारतमाता नीराञ्जना आरती
जय जय भारत माता।
शक्ति भक्ति-सुख-दात्री,
जय भारत-माता॥

स्नेह-सुधा-रस सिक्ता,
गुण-गण-भूति-वहा।
ऋषि-मुनि-पूजित-पादा,
गौरव-शान्ति-सुधा॥

विश्वशान्ति-उपदेष्ट्री,
ज्ञान-भानु-हृत-शोका।
अरि-दल-दलन-सुपूता,
आत्म-त्याग-कृत-तोषा॥

जीवनदात्री सुखदा,
वरदा भूतियुता।
संसृति शोक-निरोद्धी,
करुणामय हृदया॥

तव चरणार्पित-देहा,
परिहृत निज शुचि-गेहा।
क्रान्ति-सुधा रस-स्फीता,
कति न स्वर्गमुपनीता॥

क्रान्तिकारि-जन-वन्द्या,
शान्तिपरैरभिनन्द्या।
गरिमाऽहृत भव-भूति,
मुक्ता-मणि-गण-सूति॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

इस आरती का विशिष्ट महत्व

"जय भारतमाता" आरती एक पारंपरिक भक्ति गीत से कहीं बढ़कर है; यह भारत की राष्ट्रीय पहचान का एक काव्यात्मक वंदन है। यह आरती भारत को एक देवी, 'भारत माता' या 'मदर इंडिया' के रूप में प्रस्तुत करती है, जो देश के प्रति प्रेम और सम्मान की गहरी भावना को दर्शाती है। इसका महत्व आध्यात्मिक होने के साथ-साथ देशभक्ति से भी ओत-प्रोत है। यह गीत नागरिकों में अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और जिम्मेदारी की भावना जगाता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस तरह की रचनाओं ने लोगों में राष्ट्रीय गौरव (national pride) और एकता (unity) की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आरती के प्रमुख भाव और अर्थ

यह आरती भारत माता के विभिन्न गुणों और उनकी महिमा का गुणगान करती है:

  • शक्ति, भक्ति और सुख की दात्री (Giver of Strength, Devotion, and Happiness): आरती की शुरुआत में भारत माता को शक्ति, भक्ति और सुख प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। यह भारत की उस भूमि को दर्शाता है जो अपने नागरिकों का पोषण करती है और उन्हें आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि (material prosperity) प्रदान करती है।
  • ज्ञान और शांति का प्रकाश (Light of Knowledge and Peace): पंक्तियाँ "विश्वशान्ति-उपदेष्ट्री" और "ज्ञान-भानु-हृत-शोका" भारत की भूमिका को विश्व गुरु के रूप में उजागर करती हैं, जो दुनिया को शांति का संदेश देता है और ज्ञान के प्रकाश से दुःख और अज्ञान को दूर करता है।
  • क्रांतिकारियों की वंदनीय (Revered by Revolutionaries): "क्रान्तिकारि-जन-वन्द्या" पंक्ति देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देती है, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। यह हमें उनके त्याग और बलिदान की याद दिलाता है।

आरती करने की विधि और विशेष अवसर

  • यह आरती विशेष रूप से राष्ट्रीय पर्वों जैसे स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) और गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर गाने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
  • इसे स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाया जा सकता है ताकि युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा मिल सके।
  • इस आरती के लिए किसी जटिल पूजा-विधि की आवश्यकता नहीं है। इसे स्वच्छ मन और हृदय में अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम के साथ गाना ही सबसे बड़ी पूजा है।
  • इसे गाने से मन में सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) और देश के प्रति अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है।
Back to aartis Collection